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"जय जय 'कांग्रेस' तेरी जय जय हो" !

Posted On: 31 Aug, 2012 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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सभी आदरणीय मित्रगण,भद्रजन,अभद्रजन,बड़े,बुजुर्ग,जवान,स्त्री,पुरुष,अनुज, शत्रु इत्यादि-इत्यादि ! सभी भक्तजन एक बेसुरे  सुर में लम्बी तान(रंभाते हुए) चाहे तो गुर्रा भी सकते हैं, एक जोरदार जयकारा  लगायेंगे :—

“हे महाघोटालों के जनक :– आपकी  जय हो,

हे अर्थव्यवस्था के संहारक :– आपकी  जय हो,

हे महंगाई के दामाद :–आपकी जय हो,

हे बुराई के धोतक :– आपकी  जय हो,

हे भ्रष्टाचारी महाराज :–  आपकी जय हो,

हे कर्मचोर अधिराज :–     आपकी जय हो,

हे अन्याय के अनुपालक :– आपकी जय हो,

हे लोकतंत्र के तानाशाह :—आपकी  जय हो,

आपकी बारम्बार जय हो !

कृपा क्षमा करे इस अपुण्य काग्रेस व्रत कथा प्रारंभ होने से पहले ही महान असुर सम मुर्खानंद महाराज का जयकारा लगाना जरुरी समझा, वैसे भी मुझे पंडिताई का कोई ख़ास ज्ञान नहीं है ! इसलिय आप इसे मेरी त्रुटी के रूप में ले सकते हैं !

परन्तु इसके ठीक विपरीत, यदि आप मेरी पंडिताई की सिधहस्त्ता को प्रमाणित कर देंगे तो दान दक्षिणा का रोजगार अवश्य मिल जाएगा !

यह महान कथा पिछले दशक की है,जब एक महाबदनाम अधर्मी वीरांगना के अपुण्य,अप्रताप,रुपयाबल कुकर्मो से भारत वर्ष में पुन मुर्खानंदो को राज करने का अवसर मिला !

जनता को त्राहिमाम-त्राहिमाम करने का स्वर्णिम सौभाग्य प्राप्त हुआ !  भूखे पेट गोपाला तो नहीं पर कांग्रेस भजने का गौरवशाली अवसर मिला और गरीबी जैसा  मनोवर मुफ्त में बिना किसी कठोर तप के जन-जन को प्राप्त हुआ !

प्रजाजन ने बेरोजगारी के नए मापदंडो को छुआ ! सम्पूर्ण विश्व जगत में भारत को खिल्ली उडवाने का एकमात्र रिकार्डधारी आयाम मिला ,जिसे शायद ही कोई दूसरा दुराचारी प्रशाशक छु पाए !

मुर्खानंदो के इस भ्रष्ट कुशासन के कुछ वर्ष ही बीते थे की भारत के अलग-अलग कोने में ईमानदारी-सत्य-निस्वार्थ-ब्रह्मचारी  जैसे रोगों से ग्रस्त दो देशप्रेम के मनोरोगी पैदा हुए !

पैदा होते ही एक मनोरोगी जिसका नामकरण रामदेव  हुआ , जो काले धन के पहले शब्द उच्चारण से देशभक्ति के पागलपन की पराकाष्ठ तक जा पहुंचा ! और दूसरा ब्रह्मचारी अन्ना बाबा जन लोकपाल के मंत्रोचारण के साथ देशभक्ति के अनुष्ठान में लग गया

देखते ही देखते इन्होने भ्रष्टाचार-बेईमान-चोरो की हत्याएं शुरू कर दी ! सारा राष्ट्र इनके चंगुल में कैद हो गया ! सडको पर इनकी आततायी प्रकिरियाओं ने भारत को एकजुटता-जागरूकता जैसे खतरनाक फलदायी मुहाने पर ला के छोड़ दिया !

पर शीघ्र ही भ्रष्टाचार की असीम शांति में सुप्त कुम्भकरणीय मुर्खानंदो के कानो पर जुएँ रेकना चालू हो गई ! उन कानो पर जिन तक कोई पुकार ना पहुचे, इसके लिए उन्होंने कई महा कुकर्म किये थे !

शीघ्र ही एक सेना टुकड़ी भेजी गई,जिसने पहले उपद्रवी रामदेव को लठिया पाठ पढाया ! और सी-बी-आई, टैक्स अधिनियम जैसे सर्पासन से पाश में धर दबोचा !

दुसरे खिलंदड अन्ना बाबा को उसके ही अस्त्र अनशन के तिलिस्म में ऐसा फसाया की वो भटकते फिरते है और पानी भी नहीं मांगते !

इस तरह हम देखते है की ऐसे महा भ्रष्ट मुर्खानंद शासकसुर का कुचक्र-अत्याचार का कितना विशाल दायरा है ! पर यह सब भी उनके लालची बलिदानों की उस अध्याय से  कम है, जो उन्होंने बाद में एक नए कोयले घोटाले के रूप में किया है ! यकीं मानिए यह उनका चमत्कार ही है की जिस कोयले को सौ मन साबुन उजला नहीं कर पाए उन्होंने उसे उजला कर दिया !

यही कहते हुए इस महाकथा का समापन करता हूँ !

जिस-जिस भी भक्तजन ने इस अतिपापी कथा का श्रवण सुख का परमानंद उठाया है,शीघ्र ही उसे अपने पापों में अपार वृद्धि करने का कुअवसर मिलेगा ! उसे घोटाले  जैसे महाप्रवीण क्रिया में दक्षता प्राप्त होगी,

वह चाहेगा तो इस कौशल के जनप्रसार के लिए एक दीक्षा केंद्र भी खोल सकेगा ! उसकी काली कमाई में रिश्वत के चार चाँद लग जायेंगे ,और यदि उसकी बदनामी ने महानता को छुआ तो एक ना एक दिन जेल जैसे पुण्य स्थल पर मुफ्त रोटिया तोड़ने का अवसर भी मिलेगा !

कृपा इस अपवित्र कथा को जन जन तक पहुचाएं ताकि सभी इस पापी व्रत से लाभ उठा सकें !

प्रत्येक सोलह साप्ताहिक घोटालों के बाद इसका उद्यापन करे, विशेष लाभ होगा !

सब फिर से एक बार बेसुरी तान पकडे !

सत्यं स्वाहा !

शान्ति स्वाहा!

इमानदारी स्वाहा !

और जयकारा लगायेंगे :—–

“जय जय कांग्रेस तेरी जय जय हो” !

(कृपा यह बात ध्यान रखें की इस कथा के सभी पात्र काल्पनिक है ,और कांग्रेस एक विश्वव्यापी शब्द है , यंहा प्रयुक्त नामों का भी किसी भी व्यक्ति विशेष या  संस्था से मेल खाना संयोग  ही हो सकता है !  हमारा मकसद आपके पेट में हसोड़ के गुलगुले छोड़ना था ,ताकि आपकी बत्तीसी खुल के चौषठ चौराई हो जाए !)

इसी के साथ ही  ही ! ही !ही ! ही ! ही !ही ! ही ! ही !ही ! ही ! ही !ही ! ही ! ही !ही ! ही ! ही !ही ! ही ! ही !ही ! ही ! ही ! का प्रसाद घर लेते जाएँ !

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375 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 8, 2012

हे भ्रष्टाचारी महाराज :– आपकी जय हो, हे कर्मचोर अधिराज :– आपकी जय हो, हे अन्याय के अनुपालक :– आपकी जय हो, हे लोकतंत्र के तानाशाह :—आपकी जय हो, लेकिन जल्दी क्षय भी हो …हम भी चन्दन भाई आप की राग में राग मिलाते हैं एक बार हाथ में सत्ता आई पुलिस लाठी डंडा फिर जो चाहे कर लो या अपनी जान बचा जी लो … भ्रमर ५

    Chandan rai के द्वारा
    September 8, 2012

    भ्रमर जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद

Lahar के द्वारा
September 7, 2012

आपका लेख पढ़ कर मुझे नागार्जुन जी की कवितायेँ याद आरही है |

    Chandan rai के द्वारा
    September 8, 2012

    लहर जी लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद

Punita Jain के द्वारा
September 7, 2012

आदरणीय चन्दन जी, सुन्दर हास्य -व्यंग | पूजा का आरम्भ और अंत बहुत मनोरंजक रहा |

    Chandan rai के द्वारा
    September 8, 2012

    punita ji लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद

vijay के द्वारा
September 7, 2012

चन्दन भाई तुस्सी ग्रेट हो धो डाला आपने निंदा करने की अनोखी शेली अपनाई है आपने और किसी का नाम भी नहीं लिया ये तो दस जनपथ अवश्य भेजनी चाहिए बधाई

    Chandan rai के द्वारा
    September 8, 2012

    विजय मित्रवर , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद

drbhupendra के द्वारा
September 6, 2012

जय जय जय जय जय…. वक़्त भी आएगा जब खान्ग्रेस की होगी पराजय पराजय पराजय पराजय पराजय बहुत सुन्दर …उत्तम

    Chandan rai के द्वारा
    September 8, 2012

    मित्रवर , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद

ashishgonda के द्वारा
September 5, 2012

मित्र चन्दन. वर्तमान भारत पर बहुत ही करारा व्यंग है, बहुत खूब मजा आ गया, http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/09/05/%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8/

    Chandan rai के द्वारा
    September 5, 2012

    आशीष mitr , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद

aman kumar के द्वारा
September 4, 2012

बहुत खूब ! चन्दन जी ,आपकी ये कथा महाभारत से लम्बी हो सकती थी ! इतनी महानता है एस महाकथा में थोरा लम्बाई बड़ा कर , भाग -१, २…………..| एकता कपूर के सेरियल की तरह ये कथा कभी समाप्त नही होंगी …… बधाई हो !

    Chandan rai के द्वारा
    September 5, 2012

    अमन जी ., लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद

Himanshu Nirbhay के द्वारा
September 4, 2012

सत्यं स्वाहा ! शान्ति स्वाहा! इमानदारी स्वाहा ! इन मुर्खानान्दो का सर्वनाश भी तय है बन्धु!…….. अप्रतिम व्यंग…..

    Chandan rai के द्वारा
    September 5, 2012

    निर्भय जी लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद

yogi sarswat के द्वारा
September 3, 2012

मित्रवर चन्दन राय जी , न जाने किस घडी में इसका जन्म हुआ ! आपको एक बात बताता हूँ – गाँधी जी ने स्पष्ट कहा था की आज़ादी के बाद कांग्रेस को ख़त्म कर दिया जाये किन्तु ये आज तक जिन्दा है ! बढ़िया , मस्त लेखन

    Chandan rai के द्वारा
    September 3, 2012

    योगी मित्रवर , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद

gunjan के द्वारा
September 3, 2012

चन्दन जी , बेहतरीन व्यंग !

    Chandan rai के द्वारा
    September 3, 2012

    गुंजन जी, लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

rajakr के द्वारा
September 3, 2012

चन्दन जी हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा बेहतरीन

    Chandan rai के द्वारा
    September 3, 2012

    रजा जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

shadab ali के द्वारा
September 3, 2012

चन्दन जी , वर्तमान विसंगतियों को लेकर बेहतर व्यंग्य, बधाई। हा हा हा हा हा

    Chandan rai के द्वारा
    September 3, 2012

    शादाब जी लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

alkargupta1 के द्वारा
September 2, 2012

चन्दन जी , बहुत ही आनंददायक हास्य व्यंग्य द्वारा सत्यता के दर्शन करा दिए….. हार्दिक बधाई

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

chaatak के द्वारा
September 2, 2012

स्नेही चन्दन जी, सादर अभिवादन, हास्य के बहाने हकीकत बायाँ करने का ये तरीका काफी कारगर है| हार्दिक बधाई!

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    चातक जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

    Leaidan के द्वारा
    July 11, 2016

    This is a most useful courtibntion to the debate

manoranjanthakur के द्वारा
September 2, 2012

इस मंत्र का १०१ बार पाठ करने से विशेष लाभ होगा हा हा हा बधाई

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    मनोरंजन जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 2, 2012

चंदन जी, सादर। वर्तमान विसंगतियों को लेकर बेहतर व्यंग्य, बधाई। 

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    भानु जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

Ravinder kumar के द्वारा
September 2, 2012

चंदन जी, नमस्कार. मन में पीड़ा है, क्षोभ है, कुछ न कर पाने की विवशता है, अनाज के समान दो पाटों के बीच चुप-चाप पिसते हुए, आप का व्यंग्य चेहरे पर मुस्कराहट लाने में सफल हुआ. आप को बधाई. मेरी शुभकामनाएं. नमस्ते जी.

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    रविंदर जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

vikramjitsingh के द्वारा
September 2, 2012

बहुत खूब…..प्रिय चन्दन जी…….. एक उत्कृष्ट रचना…….

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    विक्क्रम जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

akraktale के द्वारा
September 2, 2012

चन्दन जी             सादर, आप भी अवश्य ही उद्द्यापन पर आयोजित कुछ कोयले बड़े, छोटे  कुछ जले कुछ अध् जले का भोजन प्रसादी  २ जी, अर्थात दो गिलास जल ग्रहण  करने पधारें हाँ इस बात का अवश्य ध्यान रखे की  यह आयोजन कामन वेल्थ  से होना है इसलिए कुछ चंदा अवश्य ही दें. धन्यवाद.

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    अशोक साहब , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

jlsingh के द्वारा
September 2, 2012

कांग्रेस विश्वव्यापी शब्द है. जिसमे सत्यं स्वाहा ! शान्ति स्वाहा! इमानदारी स्वाहा ! कांग्रेस का भी हो जाय स्वाहा… आ .. आ …. सुन्दर प्रस्तुति!

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    जवाहर जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

अजय यादव के द्वारा
September 1, 2012

उत्कृष्ट व्यंग रचना ,बधाई

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    yaadav ji , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

Madhur Bhardwaj के द्वारा
September 1, 2012

भाई चन्दन जी सादर नमस्कार, आपकी यह कविता तो गज़ब ढा रही है कांग्रेस को आपने कहीं का न छोड़ा! इस बेहतरीन ब्याज निन्दात्मक आलेख के लिए आपको हार्दिक बधाई! http://madhurbhardwaj.jagranjunction.com

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    मधुर ji , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

aartisharma के द्वारा
September 1, 2012

नमस्कार चन्दन जी…बेहद हंसोड़ कविता है…बधाई हो आपको ..

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    आरती जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

D33P के द्वारा
September 1, 2012

चंदनजी नमस्कार बेहतरीन आलेख, उम्दा प्रस्तुति के लिये बधाई ।

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    दीप्ती जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

nishamittal के द्वारा
September 1, 2012

सही चन्दन राय जी आपका उद्देश्य पूर्ण हुआ हा हा हा

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    निशा जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

Rajesh Dubey के द्वारा
September 1, 2012

महंगाई से त्रस्त जनता के तरफ से अपुण्य काग्रेस व्रत कथा प्रत्येक घरों में होना चाहिए.

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    दुबे जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

के द्वारा
September 1, 2012

महंगाई से त्रस्त जनता के तरफ से अपुण्य काग्रेस व्रत कथा प्रत्येक घरों में होना चाहिए.

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    मित्रवर , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

dineshaastik के द्वारा
September 1, 2012

भाई चंदन ही बेहतरीन ब्याज निन्दात्मक आलेख, जन जागरण के लिये ऐसे आलेख बहुत ही आवश्यक हैं। आलेख की प्रस्तुति के लिये अधिकाधिक बधाई स्वीकृत करें।

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    दिनेश जी लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !

bharodiya के द्वारा
September 1, 2012

पिछवाडा मर्यादापुरुषोत्तम होता है । फेविकोल लगी कुर्सि पर बैठ जाये तो पिछवाडा चिपक जाता है । कोइ कहता है उठो, तो मैं नही उठुंगा, मैं नही जाउंगा बोलता रहेगा। चिपक गया हुं ऐसा नही कहेगा । दो साल चिपकना जरूरी है,अभी भारत में थोडा धन बाकी है, ईस ठिकेने लगाना जरूरी है ।

    Chandan rai के द्वारा
    September 2, 2012

    भरोदिया जी , लेख पर आपके विचारों के लिए धन्यावाद !


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