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{ "हम विलुप्त हो चुकी "आदमी" नाम की प्रजातियाँ हैं" / "हम कहाँ मुर्दा हुए हमें पता नहीं".....!!! }

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"ओवररेटेड मिस्टर बराक ओबामा"

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OVERRATEDBARAK OBAMAविश्व मानचित्र पर सबसे ताकतवर महाशक्ति संयुन्क्त राज्य अमेरिका विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में चिन्हित है ! अमेरिका प्रति व्यक्ति सकल घरेलु उत्पाद में सालाना वृद्धि के मापदंड पर भी विश्व की छठी सबसे बड़ी शक्ति है ! सन 2008  वर्ष में पुरे विश्व में फैली वैश्विक मंदी ने अमेरिका सहित पुरे विश्व की अर्थव्यवस्था को तोड़-मरोड़ दिया था ! यही वह समय था जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश पर देश की अर्थव्यवस्था और अपने आर्थिक नियमनो के पुन:  आकलन का जबरदस्त दबाब था ,और २००८ वर्ष समाप्त होते होते तत्कालीन राष्ट्रपति जार्ज  बुश द्वारा अपनी आर्थिक नीतियों में यथोचित बदलाव ना कर पाना,सही आर्थिक उपाय ना कर पाना , 2009 के आते आते तक वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा को एक नए विकल्प के रूप में स्थापित कर गया !

बराक ओबामा ने भी “yes we can “  का  नारा दे अपनी छवि को एक चमत्कारिक सनसनीखेज रूप में  अमेरिकी जनता के सम्मुख स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी ! उन्होंने इस अवसर को खूब भुनाया ! पर वह इस बात से अभिनग्य ही रहे की अमेरिकी जनता को बराक ओबामा के चमत्कारिक व्यक्तित्व से ज्यादा मतलब देश के राष्ट्रिय सकल उत्पाद ( GDP Growth  ) के उन्नत विकास पर थी !

इस पुरे  प्रकरण ने बराक ओबामा को अन्य विकाशशील और विकसित महाशक्तियों की नजरों में ला खड़ा किया ! अमेरिकी जनता सहित सभी अन्य देशों की उपेक्षाएं उनसे बढ़ गयी ,इसका मूल कारण यह भी था की विकाशशील देशों  की अर्थव्यवस्था मुल्त: अमेरिका, चीन, जैसी अन्य महाशक्तियों की अर्थव्यवस्था पर निर्भर करती है !

पर बराक ओबामा ने भी जार्ज बुश द्वारा अपने कार्यकाल में की गई उन्ही गलतियों को फिर से दोहराया , मसलन और बराक ओबामा ने दिवालिया  होते बैंकों और खोखले ऑ़टो उद्योग को अरबो-खरबों डॉलर का बेल – आउट पैकेज दे दिया, पर उस बेल – आउट पैकेज की सही निवेश और उसके होने वाले बदलाव या सुधार की कोई समीक्षा नहीं की ,जिसका परिणाम हुआ की सम्बंधित उद्योग जगत ने उसका दुरूपयोग किया,जिससे वांछित सुधार नहीं हो पाया !  फेडरल रिजर्व के चेयरमैन बेन बर्नानके ने यंहा तक कहा की  मंदी खत्म हो चुकी है लेकिन रिकवरी नहीं दिख रही है.!

और इस विफल आर्थिक सुधार ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 2008 के दुस्वपन की तरफ फिर से मोड़ दिया !

ओबामा की आर्थिक नीतियों में ज्यादा बदलाव ना करते हुए जार्ज बुश के तय माप दंड पर ही चले ,जिसमे कोई नयापन नहीं था ! उदाहरणत: सरकारी  खर्च के बजट में कटौती की उपेक्षा वृद्धि ,कर अधिनियमों में वही  छुट , और निजी उद्योग जगत के विनियमन में समय समय पर वृद्धि देश की अर्थव्यवस्था को डांवाडोल करने के कारको में प्रमुख रहा !

और इस परिस्तिथि का सही समय पर आकलन ना होने से देश में बेरोजगारी ने एक भयंकर रूप ले लिया ! इस समस्या ने अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी ही आर्थिक निति पूंजीवादी उदार निति “ग्लोबलाइज़ेशन” के ठीक विपरीत सोचने पर मजबूर किया ! और लगातार 40 सप्ताह तक देश में बेरोजगारी आंकड़े 8 % या इससे ऊपर रहे !

इसका त्वरित झुंझलाहट वाला प्रभाव यह हुआ की अमेरिका ने बाहर से आने वाले रोजगार के इच्छुक विदेशियों पर रोक लगाने का निर्णय लिया !यह अत्यंत ही बचकाना और बिना सूझ बुझ से उठाया कदम था !

अमेरिकी प्रति व्यक्ति प्रति घंटे की कमाई 1 .7 % का अनुपात औसतन उपभोक्ता वस्तुओं में आई महंगाई २.३%  से बहुत कम था !

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ़्तार बहुत धीमी हो गई !

इसी बीच अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी  “standard & Poor ” संस्था ने अमेरिकी क्रेडिट पोलिसी को भी AAA  से घटा कर AA +  कर दिया !

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा समय समय पर “आतंकी लादेन”  को मार गिराए जाने को प्रदर्शित कर अपनी उपलब्धि को गिनवाया जाना ,उनके शासन काल में कुछ ख़ास उपलब्धि ना होने को ही दर्शाता है !

यदि लादेन नहीं मारा गया होता तो निश्चित ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर अरबो-खरबों रुपयों का आर्थिक सुरक्षा बजट होता !

पर इसमें भी उनकी उपलब्धि से अधिक लादेन की पाकिस्तानी भाईओं की गद्दारी का चमत्कार था !

ओवररेटेड मिस्टर ओबामा की असफल आर्थिक नीतियों का सबसे बड़ा उदहारण तो यही है की एक विकसित महाशक्ति के महामहिम को एक विकाशशील देश भारत  के पास हाथ फैलाने को आना पड़ा !

और अमेरिकी मीडिया का दोहरापन और दंभ तो देखीय की वह हमारे देश की अर्थव्यवस्था और उसके संचालक की कार्य कुशलता पर बड़ी ही बेशर्मी से प्रशन भी उठा रहा है !

पर मेरी नजर में मिस्टर ओबामा का भी कोई दोष नहीं ,बस उन्होंने खुद को इस तरह प्रचारित और प्रसारित किया की तत्कालीन समयवस्था  और अमेरिकी लोगो ने उन्हें एक सामान्य राष्ट्रपति से “ओवररेटेड मिस्टर ओबामा” बना दिया !

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