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"खाप के बाप"

Posted On: 20 Jul, 2012 में

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Khap panchayatमूलत: खाप पंचायत पश्चिमोत्तर भारतीय राज्यों हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से जैसे राज्यों में सामाजिक प्रशासन और क्षेत्रीय विकास को प्रतिबद्ध  संगठन की एक सुव्यवस्था थी.जिसका मूल कार्मिक उद्देश्य समय-समय पर राजनेतिक ,सामाजिक ,परिश्थितियों का मूल्यांकन कर उसमे सुधार की संभावना तलाश ,एक सामाजिक उत्थान की बात करना था !

पर देखा जाए तो खाप ,एक जातिगत आधार पर खड़ा विशाल क्षेत्रीय संघीय  ढांचा भर रह गया है ,अहलावत खाप,राठी खाप ,बाल्यान खाप  ,तोमर देश खाप, चौधरी खाप,भाटी खाप , कुछ विख्यात अपितु कुख्यात खाप पंचायत के रूप में उदाहर्णित किये जा सकता है !

विश्व पटल पर सबसे बड़े लोकतंत्र के  एक सामाजिक लघु रूप ने अब तानाशाह रूप ले लिया है ,जिसकी तुलना या नामकरण यदि तालिबानी व्यवस्थाओं के सैधांतिक रूप में होती है तो निश्चित ही हमारे देश के मौलिक अधिकारों का यह सामाजिक हनन है ,और आजाद भारत की  लोकतांत्रिक व्यवस्था की खिल्ली है !

इन खाप पंचायतो का यह सार्वजानिक बयान की हमारी संस्कृति ,हमारी परम्परा अलहदा है, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है ! किसी भी देश की सांस्कृतिक और परम्परा विस्तारण से उसमे अन्तर्निहित क्षेत्र,राज्य,कस्बा,प्रशाशन कैसे अलग हो सकता  है ! ऐसे  व्यक्तव्यों में अलगावाद की बू आती है !

अभी हाल में ही खाप महापंचायत ने नारी आचरण सहिंता के नए माप दंड स्थापित किये  और उसकी नारी स्वायतत्ता की नई नीति दशा तय की है ,उनकी मानना है जँहा मोबाइल ने सुचना प्रसारण के चमत्कारिक बदलाव से देश में विकास की क्रान्ति  ला दी, उसके ठीक  विपरीत  यह उनकी लाडो की अस्मिता सुरक्षा  में एक बहुत बड़ी सेंध होगा !

पर आप सोचीय किसी भी दुर्घटना या आप्दायिक परस्थिति में मदद को अपनों तक पहुचने का ईश्वरीय शक्ति के बाद यह सबसे बड़ा वरदान है !गर हम अपने आस पास देखे तो कितने सामाजिक उदाहरण मिल जायेंगे जिसमे इस दूरभाष यंत्र ने कृष्ण अवतार ले , मददगार की भूमिका निभाई है ,और यदि इसके वावजूद भी खाप के सर्वेसर्वा इससे इनकार करते है तो ,माफ़ कीजिय यह कहने में कतई गुरेज नहीं की खाप की यह  काली सोचअपनी बेटियों के चरित्र पर एक प्रश्नचिह्न है ,एक कुठारघात है ,जिसमे आपकी खोखली परम्परा की संवेदनहीन मानसिकता भी झलकती है !

अतः यह निराधार मापदंड है, जिसमे अपने ही परिवार के प्रति सामंती सोच उजागर होती है !

दुसरा हिटलरी फरमान , सलवार-कमीज को लबादे की तरह ओढने से है ,जिसमे स्वेच्छा से बेटियाँ अपने वस्त्रों का चयन नहीं कर सकती ,निश्चित ही यह खाप की बंधुआ सोच का  शोषण प्रारूप है जो नारी अधिकारों का शोषण कर रहा है !क्या इन सब व्यवस्थाओं ने खाप  समाज के प्रांगन में हुए बलात्कार के घटना पर अंकुश लगाया ,बिलकुल नहीं !

अपितु सबसे वीभत्स ह्रदय विदारक बलात्कार की घटनाएं इन्ही क्षेत्रों से आती है ! स्त्री को परित्यक्त ,कैद कर  पुरुष पराधीन समाज की वासनाई सोच को बदला नहीं जा सकता , दोष कपड़ो का नहीं होता ,उस नजर का है जो वासनाई रोग  से ग्रस्त है !,

शर्म दिखने वाले इंसान की जरुरत से ज्यादा देखने वाले की नैतिक  आवश्यकता है  !

यदि कुछ पल के लिए गुवाहटी काण्ड में पीड़ित महिला के व्यक्तित्व पर वास्त्रिक दोष मढ़ भी  दिया जाए तो, उन वासनाई निर्लज अपराधियों  के  चारित्रिक दोष से कोई भी महिला आयोग ,या बुद्धि के तथाकथित सामाजिक ठेकेदार इनकार नहीं कर सकते है !

आज भारतीय नारी भारत की सर्वोच्य पद से , अमेरिकी नासा संस्थान ,औद्योगिक व्यवस्था ,और खेल जगत के शीर्ष पर विराजमान है ,और अपनी कुशलता से अपनी क्षमता को प्रमाणित भी करती है , यह सब हमारे सभ्य समाज के उदारपन से ही संभव हो पाया !

खापीय व्यवस्था स्त्री की भूमिका को कमजोर करती है ,उसे ताकतवर नहीं बनाती !  अत:  खुद को मजबूत और शक्तिशाली कहने वाली इस संस्था को बेटियों की सुरक्षा में अपने भरोसे का आत्मबल देना चाहिय , उन आततायी दानवो को अपनी व्यवस्था से निकाल फेकने की जरुरत है जो इन मापदड़ों की आड़ में स्त्री के साथ अपनी मनमानी करते  है !

खाप पंचायत या किसी भी माँ-बाप की जिम्मेदारी प्रतिबंधित नियमो के अनुसरण से पूरी नहीं हो जाती ! अपितु पुत्र हो या पुत्री उसमे सामाजिक और नैतिक मूल्यों के निर्माण की अनवरत कोशिश के  उदार संकल्प से ही हम अपेक्षित बदलाव की नीव रख पायेंगे !

और एक  बात पंच को परमेश्वर का दर्जा होता  है , अत: मेरा खाप के परमेश्वर पंचों से विनम्र अनुरोध है की सबक सिखलाये उनको , जो आपकी बेटी की अस्मिता पर प्रहार करे ,पर उनके डर से अपनी बेटियों पर बंधन ना बांधे .क्योंकि मै जानता हूँ आप हमारा ऐतिहासिक गौरव  है ,पर  कमजोर नहीं !

बस आप  मानवीय मूल्यों के सैद्धांतिक  भटकाव पथ पर अग्रसर  है !


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399 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lokendra के द्वारा
July 30, 2012

चदंन भाई, HELLO  Aapka lekh pada, very nice said…. ye khap panchayat ho ya inke jaisey vichaar rakhney wala koi aur. ye soch hi apney aap main galat hain ki agar koi dusara galat kar raha ho to uski saza apney aapko ya apnee betiyon ko. Kyon ? betiyan har cheez main beton se aage hi hain ghar se lekar bahar sab kuch dekh rahi hain desh ki rashtrpati se lekar antriksh yatri tak. Koi missile bana rahi hai to koi bank chala rahi hain….essey main inkey jaisi soch bas dakiyanusi nahi to fir kya hai???

manoranjanthakur के द्वारा
July 30, 2012

सार्थक लेख ही आपकी पहचान है बहुत बधाई

    Chandan rai के द्वारा
    July 30, 2012

    मनोरंजन जी , आपके विवेचनात्मक विचार और अमूल्य समय के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया !

yogi sarswat के द्वारा
July 24, 2012

बहुत ही सटीक , सार्थक , स्पष्ट और तेज तर्रार लेख ! मित्रवर चन्दन राय जी , असल में कानून जब हल्का पड़ने लगता है तब इस तरह की बातें सामने निकल कर आती हैं ! बहुत ही निर्भीक लेखन

    Chandan rai के द्वारा
    July 24, 2012

    योगी मित्रवर , आपकी विवेचनात्मक टिपण्णी इस लेख की चर्चा को और आधार और दिशा दे रही है , आपकी अनमोल विचार लेख की सुन्दरता हैं ! आपके विवेचनात्मक विचार और अमूल्य समय के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया !

ajaykr के द्वारा
July 24, 2012

आदरणीय ,चन्दन भईया ,सादर प्रणाम| खाप पंचायितो के बारे में काफी जानकारी दिया आपने|| आभार ||खाप पंचायिते दकियानूसी विचार धाराओ पर आधारित हैं ,उनसे पीड़ित जनों से हमारी पूर्ण सहनभूति हैं | http://avchetnmn.jagranjunction.com/

    Chandan rai के द्वारा
    July 24, 2012

    अजय मित्र , आप समाज के ही सदस्य है ,और आपके द्वारा इन बातों का समर्थन दूसरों को भी प्रोत्साहित करेगा ! आपका आभार !

    Elida के द्वारा
    July 11, 2016

    Thniikng like that shows an expert at work

seemakanwal के द्वारा
July 23, 2012

चन्दन जी आप के विचारों से पूर्ण सहमत हूँ .नारी को घर में कैद कर दिया जाय तो क्या ये लोग सुरक्षा की गारंटी देंगे ,वो तो अपने घर में भी सुरक्षित नहीं है .

    Chandan rai के द्वारा
    July 24, 2012

    सीमा जी , आपका विनम्र नारी मन , और अमूल्य विचार समाज का आइना है और इक अनुगूँज जो सब हाल कह रहा है आपका शुक्रिया

Mohinder Kumar के द्वारा
July 23, 2012

चंदन जी, मैं आपकी राय से सहमत हूं…प्रजातंत्र में तुर्की फ़र्मान की कोई जगह नहीं है. लिखते रहिये.

    Chandan rai के द्वारा
    July 23, 2012

    मोहिंदर जी , आपके विचार और अमूल्य समय के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया

satya sheel agrawal के द्वारा
July 23, 2012

चन्दन जी. हैरानी की बात यह की लोकतान्त्रिक व्यवस्था के अंतर्गत मिली आजादी का खाप पंचायेतें नाजायज फायेदा उठाना चाहती है.दूसरी बात यह है हमारे ग्रामीण समाज से जुड़े लोग समाज को कौन सी सदी में ले जाना चाहते हैं .यह तो सत्य है जिस देश में पाबंदियां अधिक थोपी गयी वह देश उन्नति नहीं कर सका .उदहारण हमारे सामने है एक तरफ अफगानिस्तान है जो तालिबानियों से त्रस्त है,पाकिस्तान बंगलादेश जैसे अनेक मुल्क पिछड़े हुए हैं तो दूसरी तरफ उदारवादी दृष्टिकोण के कारण संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश विश्व पटल पर अपना परचम लहरा रहे हैं. पश्चिमी देश विकसित देशों की पंक्ति में सबसे पहले खड़े हुए,कारण वैचारिक आजादी.

    Chandan rai के द्वारा
    July 23, 2012

    अग्रवाल साहब , आपकी विस्तृत टिपण्णी लेख को एक नई दिशा प्रदान करता है , आपने उदहारण सहित तर्क संगत विवेचना से सकीर्ण सामंती सोच से होने वाले दुष्प्रभावो का सीधे तौर पर समाज और राष्ट्र को होने वाले नुक्सान से चेताया है ! आपकी विवेचनात्मक टिपण्णी इस लेख की चर्चा को और आधार और दिशा दे रही है , आपकी अनमोल विचार लेख की सुन्दरता हैं ! आपके विवेचनात्मक विचार और अमूल्य समय के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया !

Rajesh Dubey के द्वारा
July 23, 2012

तानाशाही और तालिबानी सोंच के लोगों का लोकतंत्र में कही स्थान नहीं होना चाहिए. खाप के नाम से जाने जाने वाले इलाकों में बेटियों के बारे में गलत-सलत फरमान का विरोध होना चाहिए.

    Chandan rai के द्वारा
    July 23, 2012

    dubey ji , आप समाज के ही सदस्य है ,और आपके द्वारा इन बातों का समर्थन दूसरों को भी प्रोत्साहित करेगा ! आपका आभार !

shashibhushan1959 के द्वारा
July 23, 2012

आदरणीय चन्दन जी, सादर ! खाप पंचायतों का विस्तृत विवरण पढ़ने-जानने को मिला ! समाज को सही दिशा में ले जाने के लिए वर्तमान परिवेश को देखते हुए दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ! अव्यावहारिक निर्देशों से उनकी ही गरिमा को चोट पहुंचेगी ! वैसे तीन-चार दिन पहले मैंने दैनिक जागरण में एक खबर पढ़ी, जिसमें किसी क्षेत्र की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही लड़कियों ने स्वयं मोबाइल का न्यूनतम प्रयोग और जींस या भड़काऊ वस्त्र न पहनने की बात की है ! सादर !

    Chandan rai के द्वारा
    July 23, 2012

    शशि जी , ये बच्चे बेचारे माँ बाप की जोर जबरदस्ती से कुछ बोल नहीं पाते जिस खप ने ये नियमन किये थे ,उसी परिवार की लड़कियों ने मिडिया में इस नियमन की आलोचना की है आपके विवेचनात्मक विचार और अमूल्य समय के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया !

rekhafbd के द्वारा
July 22, 2012

आदरणीय चन्दन जी ,सही लिखा है आपने खाप एक जातिगत आधार पर खड़ा विशाल क्षेत्रीय संघीय ढांचा भर रह गया है |आज भारतीय नारी भारत की सर्वोच्य पद से , अमेरिकी नासा संस्थान ,औद्योगिक व्यवस्था ,और खेल जगत के शीर्ष पर विराजमान है ,और अपनी कुशलता से अपनी क्षमता को प्रमाणित भी करती है लेकिन खापीय व्यवस्था स्त्री की भूमिका को कमजोर करती है ,उसे ताकतवर नहीं बनाती ! ,काप के तुगलकी फरमानों पर अच्छी जानकारी देता हुआ बढ़िया आलेख ,आपका आभार

    Chandan rai के द्वारा
    July 23, 2012

    रेखा जी , आपका विनम्र अमूल्य विचार समाज का आइना है और इक अनुगूँज जो सब हाल कह रहा है आपका शुक्रिया

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 22, 2012

मैं तो बस इतनी बात जानता हूँ की देश का कानून सभी पर + सभी जगह पर एक समान रूप से लागु होना चाहिए …. देश के कानून के उपर कोई भी व्यक्ति तथा संस्था नहीं होने चाहिए …. औरतो को आजके जमाने में भी अपने अधीन करने के लिए इस तरह की कुत्सित चाले चली जाती है तुगलकी फरमान अदा किये जाते है यह गिरावट की निशानी है तरक्की की नहीं बेहतरीन लेख पर मुबारकबाद :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-? :-x :-) :-? :-x :-) :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-P :-? :-x :-) :evil: ;-) :-D :-o :-( :-D :evil: ;-) :-D :mrgreen: :-? :-x :-) : :roll: :oops: :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) :-D :-o :-( :-? :-x :-) :-P :mrgreen: :oops: :roll: :cry: :evil: ;-) जय श्री कृष्ण जी

    Chandan rai के द्वारा
    July 23, 2012

    राजकमल साहब , बिलकुल हमे बस इनकी मानसिकता को ही हतोत्साहित करने की जरुरत है ! फिर लोकतंत्र भी तो यही कहता है आपके मार्गदर्शक विचारों के लिए आभार

rajanidurgesh के द्वारा
July 22, 2012

चंदनजी नयापन और सामयिक लेख लिखना आपकी विशेषता है. बहुत अच्छा लिखा है आपने.

    Chandan rai के द्वारा
    July 23, 2012

    डाक्टर साहिबा ! आपकी उदार और स्नेही भावना के लिए आपका शुक्रिया !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
July 22, 2012

इसकी चिंता किसी को ( पापी नेताओं को ) थोड़े ही है ! उनकी तो नज़र और चिंता उनके वोटों पर है | चन्दन जी, आप बराबर कुछ न कुछ नया देते हैं | बधाई !!

    Chandan rai के द्वारा
    July 23, 2012

    gunjan ji , हमे बस इनकी मानसिकता को ही हतोत्साहित करने की जरुरत है आपकी उदार और स्नेही भावना के लिए आपका शुक्रिया !

अजय कुमार झा के द्वारा
July 22, 2012

खाप पंचायतों से परिचय कराने के लिए आभार । आपने बहुत सारी बातें बताईं जो हम नहीं जानते थे । सार्थक पोस्ट

    Chandan rai के द्वारा
    July 23, 2012

    मित्र , आपकी उदार और स्नेही भावना के लिए आपका शुक्रिया !

jagojagobharat के द्वारा
July 21, 2012

विश्व पटल पर सबसे बड़े लोकतंत्र के एक सामाजिक लघु रूप ने अब तानाशाह रूप ले लिया है  और इसका जम कर सम्पूर्ण भारत में विरोध किया जा न चाहिए ताकि यह लघु रूप कही विकराल रूप ना ले ले और तलैबनियो के तरह अपना वर्चस्व कयाम करने में लग जाये .बहुत सुन्दर आलेख

    Chandan rai के द्वारा
    July 22, 2012

    मित्रवर , आपके विवेचनात्मक विचार और अमूल्य समय के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया !

nishamittal के द्वारा
July 21, 2012

नारी विरोधी इन खप पंचायतों पर प्रतिबन्ध कोई नहीं लगाएगा आखिर वोट बैंक तो यही हैं ,बहुत सही कहा चन्दन जी.

    Chandan rai के द्वारा
    July 22, 2012

    निशा जी , आपके विचार ने राजनेतिक समाज की कुसंगति की कलई खोल दी है ! आपका आभार !

allrounder के द्वारा
July 21, 2012

लोकतान्त्रिक देश मैं, इस प्रकार की दकियानूसी और तानाशाह पंचायतों का कोई वुजूद नहीं, होना चाहिए ये हमारे संघीय ढांचे को हिलाकर रख देंगे, इनके किसी भी अलोकतांत्रिक और अमानवीय फरमान को गंभीरता से लेते हुए कार्यवाही की जानी चाहिए, जिससे ऐसी मानसिकता के लोगों को हतोत्साहित किया जाये !

    Chandan rai के द्वारा
    July 22, 2012

    सचिन भाई , बिलकुल हमे बस इनकी मानसिकता को ही हतोत्साहित करने की जरुरत है ! फिर लोकतंत्र भी तो यही कहता है आपके मार्गदर्शक विचारों के लिए आभार !

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
July 21, 2012

चन्दन भाई, ये वही खाप पंचायते हैं जो कभी बलात्कार करने वाले पुरुष को 10 जूते मारने का फरमान सुनाती है, कभी पांच-दस हजार रूपये की आर्थिक सजा सुनाकर उसके कुकर्मो की भरपाई करवाने का ढोंग रचती हैं, इन खाप पंचायतों की नज़रों में स्त्री की इज्ज़त की क्या कीमत है आप खुद ही अंदाजा लगाइए….हाँ इन्हें इसमें स्त्री की ही गलती देखनी है क्या करें खुद भी तो उसी पुरुष मानसिकता से ग्रस्त हैं, किसी दिन खुद भी किसी का बलात्कार करते हुए पकडे गए तो पांच-दस हज़ार रूपये देकर बात रफा-दफा करवा लेंगे…. जब इनकी अपनी बेटी की साथ कभी बलात्कार होगा तब शायद इन्हें एहसास हो की बेटी की इज्ज़त क्या होती है….या ये भी हो सकता है की तब ये उस लड़के और अपनी लड़की दोनों को मौत के घात उतार कर अपनी इज्ज़त पर लगा दाग धोने की कोशिश करें…..बहुत शर्म और बहुत गुस्सा आता है ऐसे इज्ज़त के ठेकेदार खाप पंचों पर

    Chandan rai के द्वारा
    July 22, 2012

    अनिल मित्र , आपने समाज में हो रहे काले अघोर कृत्य पर प्रकाश डाला है , पर जिसकी जानकारी सार्वजनिक ना होने के कारण अभी खाप समाज की कार्यप्रणाली पर खुल कर चर्चा नहीं हुई है ,पर अब खाप को फिर से अपने भीतर झांकना होगा ! नए समाज की धुरी पर उसे खरा उतरना होगा ! बेहद जागरूक टिपण्णी !

akraktale के द्वारा
July 21, 2012

चन्दन जी नमस्कार, आपने बिलकुल सही कहा है कि खाप पंचायतें महिलाओं पर तो लगातार प्रतिबन्ध लगाती जा रही है किन्तु उन मर्दों के लिए कोई नियम जारी नहीं कर रही है जो इनके साथ दुराचार कर रहे हैं. यह पंचायत का एक तरफा निर्णय है. दरअसल आज खाप पंचायत में बैठे पंचों में निष्पक्ष कम और रसूख वाले लोग ज्यादा बैठे हैं. कोई पंचायत में बैठे इन ताउओं को हकीकत का सकारात्मक पहलू बताने को तैयार ही नहीं है. इनके यह मुस्लिमो के फतवे कि तरह जारी निर्णय महिलाओं में खौफ लाने और समाज के पुरुषप्रधान होने कि याद दिलाने के निर्णय अधिक लगते हैं इनसे कुछ भला होगा ऐसा लगता तो नहीं है. और सरकार को बार बार बुरा कहना भी अब लगता है कि हम वही घिसा पिटा रिकार्ड बजा रहे हैं. यदि सरकार जागरूक हो तो कोई खाप पंचायत या कोई मुस्लिम संगठन किस तरह इस तरह के अनैतिक फैसलों पर मुहर लगा सकते हैं. सच्चाई पूर्ण आलेख पर साधुवाद.

    Chandan rai के द्वारा
    July 22, 2012

    अशोक साहब , आपकी विवेचनात्मक टिपण्णी इस लेख की चर्चा को और आधार और दिशा दे रही है , निश्चित यही लोग है जो समाज की दशा ख़राब कर सरकार पर इसका ठीकरा फोड़ते है , और कभी दंगे कर शान्ति भंग करते है ! आपकी अनमोल विचार लेख की सुन्दरता हैं !

pritish1 के द्वारा
July 21, 2012

आपने सच और सच लिखने का प्रण कर रखा है……..आपके लेख पढता हूँ तो santusti मिलती है…….पुन: एक प्रभावकारी रचना………. आपका प्रीतीश

    Chandan rai के द्वारा
    July 22, 2012

    आपके द्वारा मेरा मुलयानकन मेरे लिए अनमोल है , आपकी समीक्षा के लिए आभार !!

jlsingh के द्वारा
July 21, 2012

chandan jee, सादर! खाप पंचायत या किसी भी माँ-बाप की जिम्मेदारी प्रतिबंधित नियमो के अनुसरण से पूरी नहीं हो जाती ! अपितु पुत्र हो या पुत्री उसमे सामाजिक और नैतिक मूल्यों के निर्माण की अनवरत कोशिश के उदार संकल्प से ही हम अपेक्षित बदलाव की नीव रख पायेंगे ! और एक बात पंच को परमेश्वर का दर्जा होता है , अत: मेरा खाप के परमेश्वर पंचों से विनम्र अनुरोध है की सबक सिखलाये उनको , जो आपकी बेटी की अस्मिता पर प्रहार करे ,पर उनके डर से अपनी बेटियों पर बंधन ना बांधे .क्योंकि मै जानता हूँ आप हमारा ऐतिहासिक गौरव है ,पर कमजोर नहीं ! बस आप मानवीय मूल्यों के सैद्धांतिक भटकाव पथ पर अग्रसर है ! उत्तम अभिब्यक्ति! बधाई!

    Chandan rai के द्वारा
    July 21, 2012

    सिंह साहब , आप समाज के ही सदस्य है ,और आपके द्वारा इन बातों का समर्थन दूसरों को भी प्रोत्साहित करेगा ! आपका आभार !

dineshaastik के द्वारा
July 21, 2012

चंदन जी आपके आलेख के एक एक शब्द से सहमत एवं आपके विचारों से पूर्णतः सहमत…..

    Chandan rai के द्वारा
    July 21, 2012

    दिनेश जी , आपकी हामी खाप समाज के लिए आइना है आपका शुक्रिया !

vinitashukla के द्वारा
July 20, 2012

इंसानियत के खिलाफ कुचक्र रचने वाली इन पंचायतों का, खूब भंडाफोड़ किया है आपकी इस पोस्ट ने. बधाई.

    Chandan rai के द्वारा
    July 21, 2012

    विनीता जी , आपकी सहमती जताती प्रशंशनीय विवेचना के लिए आपका आभार !

yamunapathak के द्वारा
July 20, 2012

वैसे भी तो पंच को परमेश्वर का दर्जा होता है , अत: मेरा खाप के परमेश्वर पंचों से विनम्र अनुरोध है की सबक सिखलाये उनको , जो आपकी बेटी की अस्मिता पर प्रहार करे ,पर उनके डर से अपनी बेटियों पर बंधन ना बांधे .क्योंकि मै जानता हूँ आप हमारा ऐतिहासिक गौरव है ,पर कमजोर नहीं ! चंदनजी आपकी इस बात से सहमत हूँ मैं आपने कई खाप के नाम की भी नयी जानकारी दी इसका धन्यवाद.एक विचारणीय लेख है सभी को पढ़ना चाहिए आपका आभार

    Chandan rai के द्वारा
    July 20, 2012

    यमुना जी , आपका विनम्र आग्रह और अमूल्य विचार समाज का आइना है और इक अनुगूँज जो सब हाल कह रहा है आपका शुक्रिया

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 20, 2012

खापीय व्यवस्था स्त्री की भूमिका को कमजोर करती है ,उसे ताकतवर नहीं बनाती ! अत: खुद को मजबूत और शक्तिशाली कहने वाली इस संस्था को बेटियों की सुरक्षा में अपने भरोसे का आत्मबल देना चाहिय , उन आततायी दानवो को अपनी व्यवस्था से निकाल फेकने की जरुरत है जो इन मापदड़ों की आड़ में स्त्री के साथ अपनी मनमानी करते है ! वैसे भी तो पंच को परमेश्वर का दर्जा होता है , अत: मेरा खाप के परमेश्वर पंचों से विनम्र अनुरोध है की सबक सिखलाये उनको , जो आपकी बेटी की अस्मिता पर प्रहार करे ,पर उनके डर से अपनी बेटियों पर बंधन ना बांधे .क्योंकि मै जानता हूँ आप हमारा ऐतिहासिक गौरव है ,पर कमजोर नहीं ! सहमत, आदरणीय चन्दन जी, सादर

    Chandan rai के द्वारा
    July 20, 2012

    कुशवाहा जी , आपकी सहमती निश्चित ही समाज का प्रतिबिम्ब के रूप में स्थापित होती है आपका आभार!

nishamittal के द्वारा
July 20, 2012

समाज में सकारात्मक भूमिका का निर्वाह करके ही इन खापों का अस्तित्व बना रह सकता है,ऐसे फतवे लागूं काके नहीं

    Chandan rai के द्वारा
    July 20, 2012

    निशा जी , आपकी अमूल्य टिपण्णी निश्चित खाप की कार्य प्राणाली की एक सामाजिक दिशा को तय करती है आपका आभार !


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