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भोपाल गैस त्रासदी: शर्मनाक राष्ट्रीय दुर्घटना

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TRAGEDY OF BHOPAL GAS ACCIDENT
यदि हम देश मे हुए मजहबी दंगो को अनदेखा कर दे तो, मेरी नजर मे भोपाल गैस त्रासदी भारतीय इतिहास की सबसे शर्मनाक अप्राकर्तिक राष्ट्रिय दुर्घटना है ! अपितु  इसे हमारी राजनैतिक और मानवीय मूल्यों के स्वर्णिम भारतीय इतिहास पर सबसे बड़ा कलंक कहना अतिश्योक्ति न होगा  ! शायद यही वह समय था जब हमारे राजनेताओं की आम आदमी के प्रति आत्मीयता की संवेदना ने दम तोड़ दिया था !

3  दिसंबर 1984 की भारतीय  राज्य मध्यप्रदेश के भोपाल शहर ओद्धोगिक क्षेत्र मे एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी यूनियन कार्बाइड मे विश्व का सबसे दर्दनाक शर्मनाक ओद्धोगिक हादसा हुआ ! सबसे हैरान करने वाली बात यह है की अभी तक की लगभग अनगिनत परिचर्चाओं मे कंही भी तत्कालीन निजाम शासक अर्जुन सिंह की भूमिका पर कंही कोई खास समीक्षा या तीव्र आलोचना नहीं हुई !जो भी हलकी फुलकी चर्चा हुई उसे राजनेतिक साजिश के तहत बरगला दिया गया !

पर मेरा इस विषय को पुन: जीवित, प्रज्जवलन करने का मूल उद्देश्य उन 15000   निरपराध जानों ( सरकारी आकडे )  , और असंख्य , गैस त्रासदी से विकलांग लोगो की पीड़ा को आप आम जन तक पहुचना है !
बहुराष्ट्रीय कम्पनी यूनियन कार्बाइड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वारेन एंडरसन ने विश्व के अन्य देश ,प्रान्तों, प्रदेशो की तरह यंहा भोपाल मे भी इक अत्यंत आधुनिक और सुरक्षा और उत्पादन के शीर्ष मायनों पर खरा उतरते  रासायनिक कीटनाशक  उत्पादन की महत्वकांक्षा का कारखाना स्थापित किया था !
यूनियन कार्बाइड की बेहतरीन कीटनाशक उत्पादन प्रणाली बाजार के साथ सामजस्य स्थापित नहीं कर पाई और इसने कारखाने को अनुमानित अर्थलाभ की उपेक्षा आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ा ! जिसका कंपनी की उत्पादन प्राणाली , सुरक्षा मानकदंड, और उपकरणों के अनुरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा !

3  दिसंबर 1984 की काली खूंखोर रात  को यूनियन कार्बाइड के उत्पादन नियंत्रण कक्ष मे बैठे स्थाई कर्मचारियों  कुछ रासायनिक रिसाव की शंका हुई , उपस्थित कर्मचारी ने तत्काल ही भूमिगत रसायन भंडारण टैंक का निरिक्षण किया तो उन्हें वंहा रसायन ” मिथायल आइसो सायनाइड” का   मामूली सा रिसाव मिला ! जिसे उन्होंने दैनिक सुरक्षित रसायन रिसाव के छिटपुइय़ा रूप मे लिया ! पर देखते ही देखते इस रासायनिक रिसाव ने विकराल रूप ले लिया !
देखते ही देखते मिथायल आइसो सायनाइड के घातक वाष्पों ने भोपाल शहर के वायुमंडल  में प्रवेश ले लिया ! आपातकालीन समय की गंभीरता ने कर्मचारिओं को मजबूर किया की शीघ्र ही आपातकालीन सुरक्षा प्राणाली का उपयोग कर समस्या का निदान किया जाए !
सबसे पहले उन्होंने रासायनिक वेंट स्क्रबर का इस्तेमाल किया, जिसका काम असुरक्षित गैस को क्षारीय जल में घोलकर वायुमंडल में जाने से रोकना है ,पर मिथायल आइसो सायनाइड के अनियंत्रित गैस रिसाव के विशाल बादल इससे अप्रभावित रहा !
यूनियन कार्बाइड ने ऐसी व्यवस्था की थी की यदि किसी कारणवश वेंट स्क्रबर असफल होता है तो तत्पश्चात ‘प्रज्ज्वलन कालम’ में प्रवेश कर रही इस भयानक गैस को इधन के रूप में जला वायुमंडल में जाने से रोका जा सके !
पर यह प्रयास भी विफल रहा ,
तीसरा तथा अंतिम प्रयास जल अग्निशमन  के सिमित लघु संसाधनों के जल छिडकाव के रूप में रहा और  यह प्रयास भी विफल रहा ,

देखते ही देखते मिथायल आइसो सायनाइड के घातक वाष्पों ने रियाह्शी क्षेत्रों में अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया , लोगो के फेफड़ो ,आँतों ,आँखों में ये जहरीला रसायन समा गया , मासूम बच्चे , बूढ़े ,जवान  सभी उलटी ,आँखों में जलन , सांस लेने में दिक्कत की घातक समस्या से जूझने लगे !
निर्दोष जनता ने अकारण तड़प तड़प प्राण त्यागना शुरू कर दिया ,
उपचार करने वाले चिकित्सक को कभी अमोनिया गैस कभी फोस्जिन गैस के रिसाव की गलत और अतिक्रूर सुचना दी गई ,जिससे उपचाराधीन लोगो और चिकित्सक दोनों को गुमराह किया !

इधर राजनेतिक गलियारों में हलचल चालु हो गई ,जो बस दिखावे मात्र को था ,वारेन एंडरसन को भारत आते ही गिरफ्तार कर लिया गया और अपने ही गेस्ट हाउस में उसे किसी शाही मेहमान की तरह रखा गया और कुछ ही दिनों में जमानत ले वह अपने देश लौट गया !
वारेन एंडरसन ने स्वदेश लौटते ही इस मार्मिक वीभत्स दुर्घटना को साजिश का जामा पहनाना शुरू कर दिया ,उसने अपने कारखाने के अत्यंत आधुनिक और सुरक्षा और उत्पादन के शीर्ष मायनों का हवाला देना शुरू कर दिया !

इधर देश में केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभिक जांच भारतीय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान (सीएसआईआर) और केंद्रीय जांच ब्यूरो परिषद द्वारा आयोजित किया गया ! जिसने 1994 तक किसी भी आकडे की सार्वजनिक सुचना से इनकार कर दिया !

आप सोच सकते है की 15000  से अधिक लोगो के जानमाल के नुक्सान को तत्कालीन सरकार ने बहुत ही शर्मनाक ढंग से अनदेखा कर दिया था !
लाशों की लाशें ,निर्बोध पशु मारे गए थे , शहर जैसे भुतहा नगर बन गया था !

यह जानना यंहा हर भारतीय नागरिक के लिए आवश्यक हो जाता है की आखिर इस दुर्घटना ने इतना विकराल रूप कैसे ले लिया ! एक  विदेशी संस्था ने लाख प्रतिबन्ध के बाद जो गुप्त  रूप से जांच की उसमे निम्नलिखित कारक सामने आये !

1 ; मिथायल आइसो सायनाइड का  भण्डारण तरल रूप में प्रशीतन ( ठन्डे ) माध्यम में किया जाता है ! पर आर्थिक नुक्सान के चलते इसे अनदेखा कर दिया गया था !
२.  मिथायल आइसो सायनाइड का  क्षमता से अधिक भण्डारण ! जिस समय दुर्घटना हुई उसमे 42  टन  मिथायल आइसो सायनाइड था ,जबकि सुरक्षा मानकों के अनुसार 30 टन मिथायल आइसो सायनाइड का भण्डारण ही होना चाहिय था !
३ मिथायल आइसो सायनाइड की प्रकति के अनुसार यदि इसमें कोई अशुद्ध्त्ता मिश्रित हो जाए तो यह खतरनाक एक्ज़ोथिर्मिक प्रतिक्रिया का रूप ले लेता है ! यही हुआ भी, क्युंकी आर्थिक बजट के नियंत्रण के चलते प्रबंधन ने  मेंटेनैंस सुपरवाईसर को निकाल दिया था !
और एक ही उपकरण कई प्रकिरियाओं में इस्तेमाल  होने लगा, जिसने किसी तरह पानी और आयरन जंग को  मिथायल आइसो सायनाइड टैंक के भीतर पहुंचा दिया !
4 उपकरण नियंत्रक नाइट्रोजन वाल्व का ख़राब होना !
5  रासायनिक वेंट स्क्रबर,प्रज्ज्वलन कालम’, जल अग्निशमन यंत्रों की  क्षमता का कमजोर और ख़राब होना !

अब इससे भी शर्मनाक बात यह है की इन सब जांचो और सुचना के बाद भी 90  वर्षीय वारेन एंडरसन स्वीटज़रलैंड में रिटायरमेंट की खुशहाल आरामदायक छुट्टियां बिता रहा है !
और इस विभत्स अतिक्रूर परमाणु बम्ब के से शर्मनाक दुर्घटना के शिकार मासूम लोग आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहें है ,
कंही भी उनकी मार्मिक चीखों का असर नहीं दिखता ! असर दिखता है तो बस उनके आने वाली पीढ़ीओं  में , जो आज भी विकलांगता और गंभीर बिमारी की समस्या से जूझ रही है !
और इक और हास्यपद बात यह की इस दुर्घटना में मारे गए लोगो पर वारेन एंडरसन प्रति व्यक्ति 600  डालर का मुआवजा रूपी अहसान के बदले उस पर दायर मुक़दमे को खारिज चाहता है !
जिस कंपनी में ये हादसा हुआ और जिससे हजारों लोग मारे गए और घायल हुए ! आज वही लन्दन ओलम्पिक खेलों को प्रायोजित कर रही है और भारत कुछ नहीं कर पा रहा ,ऐसा बहुत से लोग मानते है ,पर खेल प्रायोजित ना करने देना ,हमारी अक्षमता को ही दिखाता है ,सोचीय हम दोषी को सजा दिलाने और मृतको को सही मुआवजा दिलवाने की उपेक्षा तर्कहीन बातो को उठा रहे है ,
आज जरुरत है की फिर कोई एंडरसन या उसका कोई कारखाना ऐसा विनाशकारी हादसा का जिम्मेदार ना बने ! हमे चाहिय की अपनी व्यवस्था को सही रखने में सरकार की भूमिका को जिम्मेदार बनाये !

अपने ही हाथों से परमाणु बम्ब जैसी की इस तबाही से घायल इन्साफ 28  वर्ष बाद भी अपने न्याय के लिए प्रतीक्षित है !

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376 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Punita Jain के द्वारा
July 18, 2012

आदरणीय चन्दन जी, भोपाल गैस त्रासदी के बारे में आपने बहुत ही सूक्ष्म और गम्भीर विवेचन सबके सामने रखा | यह बहुत ही शर्मनाक घटना थी और इससे ज्यादा शर्मनाक यह है कि इसके पीड़ितों को आजतक न्याय नहीं मिला |

    Chandan rai के द्वारा
    July 19, 2012

    पुनीता जी , आपकी संवेदना की ही जरुरत है आज भारतीय समाज को , जो कंही ग़ुम हो गई है ! आज जरुरत है की फिर कोई एंडरसन या उसका कोई कारखाना ऐसा विनाशकारी हादसा का जिम्मेदार ना बने ! हमे चाहिय की अपनी व्यवस्था को सही रखने में सरकार की भूमिका को जिम्मेदार बनाये !

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
July 18, 2012

शर्म, शर्म, शर्म

    Chandan rai के द्वारा
    July 19, 2012

    आपकी संवेदना के लिए आभार !

rajhans के द्वारा
July 17, 2012

आप सोच सकते है की 15000 से अधिक लोगो के जानमाल के नुक्सान को तत्कालीन सरकार ने बहुत ही शर्मनाक ढंग से अनदेखा कर दिया था ! लाशों की लाशें ,निर्बोध पशु मारे गए थे , शहर जैसे भुतहा नगर बन गया था ! भारत में जान बहुत सस्ती है, चन्दन जी| हमे आबादी कम करनी चाहिए, जिससे मानव-संसाधन की कीमत समझ आय|

    Chandan rai के द्वारा
    July 17, 2012

    राजहंस जी , आपका व्यंगात्मक कथन सब हाल कह रहा है ! आपके विचारों के लिए शुक्रिया !

shailesh के द्वारा
July 16, 2012

चन्दन जी बहुत ही उम्दा लेख और बहुत सम्वेदंसील विषय चुना है

    Chandan rai के द्वारा
    July 16, 2012

    मित्र मेरा लेख लिखने का मूल उद्देश्य यही है की लोग इस भयंकर नरसंहार की बर्बक घटना से परिचित हो सकें !

Naresh के द्वारा
July 16, 2012

चंदन राय जी, तथ्यपूर्ण आंकड़ों के साथ भोपाल गैस त्रासदी की महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान के लिए शुक्रिया !

    Chandan rai के द्वारा
    July 16, 2012

    आप इस त्रासदी के क्रूर सच से रूबरू हो पाए मेरा प्रयास सफल !

narayani के द्वारा
July 16, 2012

नमस्कार चंदन राय जी भोपाल गैस त्रासदी का खौपनाक मंजर आज भी दिल दहलाता है.कितने पीड़ित है जो आज तक इस त्रासदी से उबर नही पाए . अपराधी को सजा देने का रिवाज नही ,थाल में सुसज्जित भोजन परोसते है हम वो हमारे मेहमान जो ठहरे ,निवाला छीनेंगे हम अपने देश वासियों का उनका क्या वो तो अपने ठहरे ?????????????????? धन्यवाद नारायणी

    Chandan rai के द्वारा
    July 16, 2012

    नारायणी जी , आपकी संवेदना की ही जरुरत है आज भारतीय समाज को , जो कंही ग़ुम हो गई है !

Chandan rai के द्वारा
July 15, 2012

डाक्टर साहिबा , आपका लेख और उसमे निहित उद्देश्य पढ़ बहुत अधिक प्रसन्ता हुई ! हमे इसी तरह अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वाहन करना होगा ! आप एक सच्ची लेखिका हैं !

akraktale के द्वारा
July 15, 2012

चन्दन जी नमस्कार, आपने भोपास त्रासदी से सम्बंधित कई रोचक जानकारियाँ दी है. निश्चित रूप से वारेन एंडरसन को भगाना एक षड्यंत्र था क्या उन षडयंत्र करने वालों को इस देश में सजा मिली? क्या एंडरसन को म्रत्युदंड भी दे दिया जाए तो उन पीड़ितों का कुछ भला होगा? दोनों ही के उत्तर है नहीं.इसलिए मेरा मानना है की सरकार खुद पहल करे और उन व्यवस्थाओं पर ध्यान दे जो इन पीड़ितों के लिए की गयी है जो अस्पताल इनके लिए बने है उसपर पैनी नजर रखे, पीड़ित की अक्षमता पर उसके भरणपोषण की व्यवस्था करे. क्योंकि इस घटना के बाद के पहलुओं को भी मैंने देखा है लोगों ने तुरंत अपने दूर रहने वाले रिश्तेदारों के नाम भी पीड़ितों की लिस्ट में शामिल करा दिए है इसकारण यह संख्या हकीकत से कहीं बड़ी नजर आने लगी है. कई व्यक्ति सक्षम थे उन्होंने खुद के खर्च पर अपना इलाज कराया. कई नौकरी पेशा लोग थे जो अब भोपाल में नहीं रहते. और अब इस घटना का भी राजनीतिकरण हो गया है.

    Chandan rai के द्वारा
    July 15, 2012

    अशोक साहब , इस दुर्घटना के समय जो राजनेतिक कारन हुआ ,वाही वजह है की अपराधी को सजा नहीं मिली ,ना लोगो को सही इलाज , मुआवजा ! अब इस मुद्दे से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला ,पीड़ित इस सदमे से उबार चुके हैं ,उन्होंने इतना कुछ खोया है पाने की लालसा भी नहीं होगी ! आज जरुरत है की फिर कोई एंडरसन या उसका कोई कारखाना ऐसा विनाशकारी हादसा का जिम्मेदार ना बने ! हमे चाहिय की अपनी व्यवस्था को सही रखने में सरकार की भूमिका को जिम्मेदार बनाये !

Dr. Aditi Kailash के द्वारा
July 15, 2012

चन्दन जी, आपने एक बहुत ही अच्छा विषय चुना……. भोपाल गैस त्रासदी भारतीय इतिहास और मानव इतिहास की सबसे क्रूरतम् औद्योगिक दुर्घटना रही है, जिसकी पीड़ा आज भी भोपाल वासी भुगत रहे हैं……..मैने भी इस विषय पर एक लेख लिखा था लिंक दे रही हुँ, शायद आपको पसन्द आये….. http://aditikailash.jagranjunction.com/2010/06/08/%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%95/

prabhat mishra के द्वारा
July 14, 2012

त्रासदी की महत्वपूर्ण जानकार साझा करने के लिए शुक्रिया ! 

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    मित्र मेरा लेख लिखने का मूल उद्देश्य यही है की लोग इस भयंकर नरसंहार की बर्बक घटना से परिचित हो सकें !

mohammad के द्वारा
July 14, 2012

चन्दन जी , त्रासदी के लेख के माध्यम से सरकार की बेदिल कुनितिओं को उजागर करने के लिए आपका आभार !

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    अप इस त्रासदी के क्रूर सच से रूबरू हो पाए मेरा प्रयास सफल !

allrounder के द्वारा
July 14, 2012

नमस्कार भाई चन्दन जी, ये भारतीय क्या विश्व इतिहास का इतना भयावह हादसा था, जिसकी भयानकता दशकों से कुछ लोग भुगत रहे हैं ! हमारी संवेदनाएं इससे प्रभावित परिवारों के साथ हैं !

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    सचिन भाई , आपकी संवेदना की ही जरुरत है आज भारतीय समाज को , जो कंही ग़ुम हो गई है !

    Ryne के द्वारा
    July 11, 2016

    I came, I read this article, I codereuqn.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 14, 2012

निर्दोष जनता ने अकारण तड़प तड़प प्राण त्यागना शुरू कर दिया , उपचार करने वाले चिकित्सक को कभी अमोनिया गैस कभी फोस्जिन गैस के रिसाव की गलत और अतिक्रूर सुचना दी गई ,जिससे उपचाराधीन लोगो और चिकित्सक दोनों को गुमराह किया प्रिय चन्दन जी बहुत ही दर्दनाक दिल दहला देने वाला मंजर था …प्रभु करें अब और कहीं ऐसा कुछ न हो …बहुत सुन्दर जानकारी हम सब से बांटने के लिए आभार भ्रमर ५

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    भ्रमर साहब , आज की जनता पहले की उपेक्षा जागरूक है और आज मजदुर यूनियन संगठन है , आज कम्पनी अधिनियम के तहत कई छमाही ,वार्षिक आडिट होते है ,जो किसी भी कंपनी की कार्यप्रणाली की समय समय पर समीक्षा करते है , और उनके लाइसेंस रद्द कर देते हैं !

yogi sarswat के द्वारा
July 14, 2012

जिस कंपनी में ये हादसा हुआ और जिससे हजारों लोग मारे गए और घायल हुए आज वाही लन्दन ओलम्पिक खेलों को प्रायोजित कर रही है और भारत कुछ नहीं कर पा रहा ! भारत में सामान्य आदमी को न्याय मिलता कब है चन्दन जी ! अगर न्याय ही दिलाना होता तो एंडरसन को राजीव गाँधी ने चुपके से देश से बहार नहीं भिजवा दिया होता ! ये चित्र दिल में गहरे तक उतर जाता है ! बहुत ही उम्दा लेख और बहुत सम्वेदंसील विषय चुना है आपने !

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    योगी मित्र , खेल प्रायोजित ना करने देना ,हमारी अक्षमता को ही दिखाता है ,सोचीय हम दोषी को सजा दिलाने और मृतको को सही मुआवजा दिलवाने की उपेक्षा तर्कहीन बातो को उठा रहे है , हमारी सरकार ,तंत्र ,संस्थाएं, व्यवस्था वो सब जिम्मेदार है जिन्होंने कभी उस काखाने की वार्षिक या छमाही आडिट नहीं किया , जिससे कारखाने की सही स्थिति का जायजा हो सकता ! और दुर्घटना होती ही नहीं !

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
July 14, 2012

चन्दन जी नमस्कार , क्या विडंम्बना है कि इतनी वीभत्स दुर्घटना के शिकार लोग इतना समय बीतने के बाद ,आज भी न्याय के लिए तरस रहे हैं. दुर्घटना के दोषी आराम से जिन्दगी बिता रहे हैं.यही तो दोष है हमारी व्यवस्था का जहाँ अपराधी गंभीर अपराध के बाद भी आराम से जी रहे हैं और पीड़ित ही सजा पा रहे हैं. तथ्यपूर्ण जानकारी के लिए धन्यवाद.

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    राय साहब , ये हमारो असंवेदन शीलता की कामचोरी है की हम अपने भाईओ के लिए कुछ कर नहीं पाए ! कैसी सरकारे है जो जनता के लिए बनी तो हैं पर बस लुटने के लिए ! कान्हा मर गया इंसान में ढूंढ़ता हूँ !

Ravinder kumar के द्वारा
July 13, 2012

चन्दन जी, सादर नमस्कार. भोपाल गैस त्रासदी के बाद जैसी सरकारी असंवेदनशीलता देखने को मिली, उसने पीड़ितों को अधिक व्यथित किया है. आज तक पीड़ितों का न्याय के लिए भटकना सिद्ध करता है के दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मानव अधिकारों के मामले में कितना कंगाल है. चन्दन जी, सरकार आज परमाणु बिजली पर इतना जोर दे रही, लेकिन क्या किसी संभावित दुर्घटना से हमें सुरक्षा दे पाएगी. मन को विचलित करने वाली दुर्घटना पर आप ने इतनी जानकारी प्रस्तुत की उसके लिए बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएं. नमस्ते जी.

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    रविंदर भाई , हम खुद में इतने खोये लोग है जो झूठा दुम्भ भरते देश की फिकर का , हमे तो बस तब जाने की जरुरत होती है जब कोई हादसा हो ! उससे पहले हम जिम्मेदारी की कोई आवाज नहीं उठाते ! देश में इतने पहलु है पर हादसा ही हमारी गले की घंटी है !

rajeev namdev के द्वारा
July 13, 2012

बहुत ही संवेदनशील विषय चुना है आपने ….बेहतरीन लेख…..

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    नामदेव भाई , मेरा लेख लिखने का मूल उद्देश्य यही है की लोग इस भयंकर नरसंहार की बर्बक घटना से परिचित हो सकें ! जान सकें ! की हम स्वार्थपरता में जीते लोग है मैंने यह लेख , लेख के रूप में नहीं लिखा !

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
July 13, 2012

चन्दन जी, नमस्कार तथ्यपूर्ण आंकड़ों के साथ भोपाल गैस त्रासदी की महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान की. यह भी एक त्रासदी ही है कि पीडितों को आज तक हमारी निकम्मी सरकारों कि वजह से न्याय तक नहीं मिल पाया..

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    दुबे जी आपने बिलकुल ठीक कहा————- हमारी तंत्र ,संस्थाएं, व्यवस्था वो सब जिम्मेदार है जिन्होंने कभी उस काखाने की वार्षिक या छमाही आडिट नहीं किया , जिससे कारखाने की सही स्थिति का जायजा हो सकता !

ANAND PRAVIN के द्वारा
July 13, 2012

चन्दन भाई, नमस्कार बहुत ही सटीक प्रश्न आपने उठाया है ………..हमारे देश का दुर्भाग्य ही यही है की इन्साफ को भले शर्म आ जाए किन्तु हमें शर्म नहीं आएगी कभी ……………….राजनीति में धुला हुआ यह चेहरा बहुत काला है…..इस विषय पर इसी मंच के आदरणीय डा मनोज रस्तोगी जी की एक छोटी सी कविता आपको पढ़ाना चाहूँगा सुन रहे यह गैस आदमखोर है । हर तरफ बस चीख, दहशत शोर है ।। बढ रहे हैं जिस सदी की ओर हम । यह उसी की चमचमाती भोर है ।। मौत से क्‍यों इस तरह घबरा रहे । जिंदगी तो एक रेशम डोर है ।। इस तरह मातम मनाते क्‍यों भला । देश तो अपना प्रगति की ओर है ।। मत कहो यह गैस जहरीली बहुत । आदमी ही आजकल कमजोर है ।। डा. मनोज रस्‍तोगी मुरादाबाद

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    आनंद भाई , आपने बहुत ही पुण्य काम किया ,यंहा यह मार्मिक रचना लिख के , हर पाठक इसे पढ़ सायद अपने भीतर झांके ! हम नेतिक मूल्यों के मापदंड पर कान्हा उतारते है ,हमे अपने भीतर झाकना होगा !

mayankkumar के द्वारा
July 13, 2012

आप ने इस संवेदनशील मुद्दे को उठाकर वाकई पाठकवर्ग की आँखों में आंसू ला दिए …… आपकी कलम को सलाम !

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    मयंक जी , जिस भी व्यक्ति को यह त्रासदी झकझोरती है वह सही मायनों में इंसान कहलाने लायक है , मैंने यह लेख , लेख के रूप में नहीं लिखा !

alkargupta1 के द्वारा
July 13, 2012

चन्दन जी , तथ्यपूर्ण आंकड़ों के साथ इस त्रासदी की महत्त्वपूर्ण जानकारी दी जिसने मानवता पर एक प्रश्न चिह्न लगा दिया…..

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    अलका जी , मेरा लेख लिखने का मूल उद्देश्य यही है की लोग इस भयंकर नरसंहार की बर्बक घटना से परिचित हो सकें ! जान सकें ! की हम स्वार्थपरता में जीते लोग है

ashishgonda के द्वारा
July 13, 2012

मित्र चन्दन जी ! आपने इस त्रासदी को हमारे सामने रखा इसके लिए आभार, भारतीय राजनीति किसी भी क्षेत्र में कुछ विशेष नहीं कर पा रही है, वही इधर भी हुआ है.

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    मित्र आशीष , आप जैसे युवा आप इससे रूबरू हुए , मेरा मकसद फलीभूत हुआ !

rekhafbd के द्वारा
July 13, 2012

चन्दन जी ,बिकुल सही लिखा है आपने,शर्मसार करने वाली इस राष्ट्रिय दुर्घटना से घायल लोगों को अभी भी इन्साफ नही मिला ,मै दिनेश जी से भी सहमत हूँ ,एंडरसनसे बड़े वो अपराधी है जिन्होंने उसे बचाया , फिर से जागरूक करने पर आभार

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    रेखा जी , एंडरसन से बड़े वो अपराधी वो देशद्रोही राजनेता है जिन्होंने एंडरसन को बचाया , हमारी संस्थाएं जिन्होंने कभी उस काखाने की वार्षिक या छमाही आडिट नहीं किया , जिससे कारखाने की सही स्थिति का जायजा हो सकता !

Mohinder Kumar के द्वारा
July 13, 2012

चंदन जी, आंकडों से भरपूर सार्थक लेख. ऐसे प्रकरण जब भी देखने को मिलते हैं तो लगता है कि यह एक मजाक भर है कि “कानून के हाथ लम्बे होते हैं”… यदि लम्बे होते भी हैं तो शायद उनमें दम नहीं होता कि अपराधी को पकड कर सजा दिला सकें. लिखते रहिये.

    Chandan rai के द्वारा
    July 14, 2012

    मोहिंदर जी , कानों के हाथ में दम तो है ,पर कुछ स्वार्थी संवेदनहिन् देशद्रोही लोग इसके हाथ बाँध देते है उन्हें देश और देश के लोगो से कोई मतलब नहीं !

dineshaastik के द्वारा
July 13, 2012

चंदन जी, एडरसन से बड़े अपराधी तो वह हैं जिन्होंने उसे बचाने में मदद की, इस हत्याकाण्ड के दूसरे आरोपी तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह जी थे। राजीव  भी अप्रत्यक्ष रूप से इसके जिम्मेदार कहलायेंगे। यह इत्तफाक ही था कि इस घटना के दो माह पूर्व तक में दो वर्ष से भोपाल में रह रहा था।

    Chandan rai के द्वारा
    July 13, 2012

    दिनेश जी , यदि आलोचना की जाए तो निश्चित ही तत्कालीन केंद्र सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री अपनी निरंकुश शाशन की मरी हुई इंसानियत के कठगरे में सजा पाने के हकदार है , पर विडंबना देखीय की भारतीय लोग ही मारे गए और उनका अपराधी कम्पनी के प्रबंधकों को ही घोषित कर दिया गया ! जबकि वो बेचारे तो कठपुतली थे !

bharodiya के द्वारा
July 12, 2012

चन्दनभाई नमस्कार अर्जुन सिंह की भूमिका पर समीक्षा काफी साल पहले हो चुकी है । समिक्षकों का आरोप था की ईस महाशय ने भारत की पूलिस को मिडिया मजबूर करे उसे पकडने के लिए ईस से पहले एन्डरसन को खुद अपने विमान में उडाके ले गये और अमरिकी विमानमें बैठा दिया । फिर कहा गया फरार हो गया । आपने टेक्निकल बातें बताई वो नई समिक्षा है । कमसे कम मेरे लिए । धन्यवाद ईस लेख के लिए ।

    Chandan rai के द्वारा
    July 13, 2012

    भदोरिया जी , राजनेतिक आलोचना और संवेदनहिन् राजनीती की बर्बता से सभी परिचित थे , लोगो को सायद दुर्घटना के कारको का कम पता था ,इसलिए सायद ये राजनेता लोगो को गुमराह भी करते रहे इसलिय मैंने निश्चय किया की कम से कम में आम जन तक दुर्घटना के कारकों को पहुंचाऊं ! आपके विचार से मेरा प्रयास सफल लगता है !

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 12, 2012

भोपाल में हमारे रिश्तेदार रहते है उनको है महीने कुछ रकम मिलती है भगवान का शुक्र रहा की उनपर खुद पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा लेकिन उनका एक बेटा बहुत ही मामूली रूप से मंदबुद्धि है ….. मुआवजे के बंटवारे में भी हमेशा की ही तरह से असरकारक कारकों ने अपना पूरा रोल निभाया है ….. सच में ही यह दुःख की बात है की प्रभावित व्यक्ति मौत के मुंह में समा जाए और उसके केस को इतने लंबे समय तक खींचा जाए …..

    Chandan rai के द्वारा
    July 12, 2012

    राजकमल जी , हमारे इसी सुप्त न्याय व्यवास्था ने एंडरसन को कुछ ही दिनों में जमानत दे ,और तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री ने अपनी संवेदना एंडरसन के लिए सरंक्षित कर ली थी ! शर्म आती है ऐसे मानवीय मूल्यों के दोहरेपन पे !

shashibhushan1959 के द्वारा
July 12, 2012

आदरणीय चन्दन जी, सादर ! इस त्रासदी से हुए नुक्सान की भरपाई किसी रूप में नहीं की जा सकती ! पर धन्य हैं हमारे राजनैतिक नेता ! और धन्य है हमारी न्याय व्यवस्था ! कहीं ऐसा तो नहीं की ये नेता जान बूझ कर या पैसों के लालच में इस मामले की लीपापोती करने में लगे हों ! अगर ऐसा है तो प्रभु करें, संसद में ही ऐसा गैस रिसाव हो जाय ताकि ये तमाम हत्यारों से जनता को निजात मिले !

    Chandan rai के द्वारा
    July 12, 2012

    शशि जी , हमारी न्यायव्यवस्था ,हमारी संवेदना , हमारा शाशन तंत्र ,हमारी इंसनियत सब क सब सुप्त अवस्था me है , हमे केवल अपने आप से मतलब है , कान्हा से हम इंसान कहलाने लायक है

nishamittal के द्वारा
July 12, 2012

आपने विस्तृत जानकारी प्रदान की त्रासदी के संदर्भ में जो मानवता के लिए कलंक है.

    Chandan rai के द्वारा
    July 12, 2012

    निशा जी , मेरा लेख लिखने का मूल उद्देश्य यही है की लोग इस भयंकर नरसंहार की बर्बक घटना से परिचित हो सकें ! जान सकें ! की हम स्वार्थपरता में जीते लोग है


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