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{ "हम विलुप्त हो चुकी "आदमी" नाम की प्रजातियाँ हैं" / "हम कहाँ मुर्दा हुए हमें पता नहीं".....!!! }

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"हिंदुत्व":एक सम्प्रदायिक उत्प्रेरक या सर्वहिताय राजधर्म ?

Posted On: 24 Jun, 2012 Others,न्यूज़ बर्थ में

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LET US UNITसर्वप्रथम यंहा यह जानना अत्यंत  आवश्यक हो जाता है की आखिर हिंदुत्व क्या है ! इसका मुलभुत सैद्धांतिक  आधार क्या है और भारतीय समाज के लिए इसके मायने क्या हैं !  इसकी आवश्यकता क्या हमारे राष्ट्र और समाज के उन्नत अध्यात्मिक, सांस्कृतिक, और सर्वधर्म एकीकरण के लिए अपेक्षित है !

“हिन्दुत्व” शब्द मूलतः  फ़ारसी शब्द “हिन्दू” और संस्कृत प्रत्यय -त्व से बना है । कुछ प्रकांड हिन्दू विद्वानों और कट्टर हिंदूवादी संगठनों का मानना है की  हिन्दुत्व हिन्दू धर्म के अनुयायियों  के द्वारा विशेषतः हिन्दुओं के उत्थान के लिए इक सुसंगठित प्रयास है ! जंहा पर राष्ट्रिय विचारधारा हिंदुत्व को ही परिभाषित करती हो ! इस कट्टर संकीर्ण मानसिकता ने हिंदुत्व को तोड़मरोड़ दिया और इक विस्फोटक खतरनाक हिन्दुवाद को जन्म दिया !
इन कट्टर बुद्धिजीविओं ने हिंदुत्व और हिन्दुवाद को समरूप बना दिया ! हालाँकि हिंदुत्व और हिन्दुवाद दो अलग-अलग विषय-वस्तु हैं !

हिंदुत्व किसी भी धर्म ,वर्ण ,वर्ग ,सम्प्रदाय ,आश्था को भारतीय राष्ट्र के लिए अभिशाप नहीं मानता,  उसका मूल उद्देश्य भारतीय संस्कृति और उसकी अमूल्य धरोहरों को सरंक्षित करना है , इक मजबूत कौमी एकता और राष्ट्रवाद जागरण का नवनिर्माण करना है ,भारत की प्राकृतिक संपदा,गाय माँ ,गंगा और आध्यात्म के चंहुमुखी दिग-दिगंतो,स्तंभों  को विस्थापित होने से बचाना है ,

आज भारतीय समाज में बहुत सी हिंदूवादी संस्थाएं हिंदुत्व के अर्थ का दुरूपयोग कर अपनी कुसंगत विषाक्त जड़े भारतीय समाज में जमाने की चेष्टा में प्रयासरत है , राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल,सनातन संस्था , कुछ ऐसे संगठन है ,जो समय समय पर अपनी हिंदूवादी सोच के लिए हिंदुत्व के लिए इक शर्मनाक उदाहरण के रूप में चिन्हित हुए है ! आज फिर से हिंदुत्व इनके मानवी असंवेदना और हिंसक राष्ट्रविरोधी कुकृत्यों से आज भारतीय राजनीति में हाशिय पर रखा है ,

समय-समय पर कुछ गिने चुने कट्टरपंथियों ने मजहबी शागुफे छेड देश की एकता और अखंडता पर कठोर, क्रूर, कुठारघात किये है ! अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद ध्वस्तीकरण ,गुजरात में गोधरा काण्ड ,मालेगांव ब्लास्ट , मडगांव ब्लास्ट, हमारे हिंदुत्व के कपाल पर कभी ना मिटने वाली कालिख और शर्मनाक राष्ट्रिय दुर्घटना है ! जरासोचीय क्या कभी कोई धर्म,कोई धर्मवाद क्या उपदेश देता है की अपनी संप्रभुता और अपनी संस्कृति के बचाव के लिए उसके अनुयायी मासूम ,निर्दोष लोगो की न्रशंश: ह्त्या का स्वांग रचे ,क्या इन शर्मनाक बगुलाप्रयासों के काटे, आघात किये समाज के लहू से रक्त रंजित राज्यभिषेक प्रतिफूलित होगा !

क्या धर्म कहता है की आप पिशाचर हो किसी को धर्म के नामपर ज़िंदा जला दे ?  किसी भी अबला नारी के साथ धर्म के नाम पर किय अपने घिनोनेपन को छुपाये !  इन्ही चंद कट्टरपंथियों ने मुस्लिम धर्म में भी जेहाद की परिभाषा बदल दी है, और लगे है बरगलाने में अल्लाह और राम के मानने वालो को ! कोई भी धरम किसी एक वर्ण, वर्ग, जाति, सम्प्रदाय , के हित की बात नहीं कहता, वह तो सर्वजन सर्वधर्म हिताय की जरुरत को चिन्हित करता है !

आज भारतीय राजनीति में हिंदुत्व के नाम पर चक्रवात आया हुआ है , आप सोचीय क्यूँ जरुरत पड़ी की एक हिन्दू राजनेतिक नेता एक दुसरे हिन्दू राजनेतिक नेता का इतना कडा विरोध कर रहा है , इनके मतान्तरों से यह अभिप्रयाय निकलता है की कंही ना कंही तथाकथित राजनेतिक पार्टी या उसके हिंदुत्ववादी सोच में खोट है और सायद वह हिंदूवादी सोच की दकियानूसी मानसिकता में उलझा हुआ है ,जिसका मुलभुत  उद्देश्य इक वर्ग ,वर्ण की बात कर इक राष्ट्रिय साम्प्रदायिकता को जन्म देना है !

गुजरात का गोधरा काण्ड वंहा के नेताओं के दायित्विक आत्महत्या का इक विकृत घिनोना रूप है , जिसे उनके हिंदूवादी मलहम  ने सदभावना की उपेक्षा, इक वीभत्स दरार के रूप में और तोड़ने का प्रयास किया है ! तो क्या हम ऐसे निजाम शासक से सर्वहिताय राजधर्म की उपेक्षा कर सकते हैं जिसे किसी अन्य वर्ण-वर्ग-धर्म का सम्मान अछूत की तरह लगता है ,क्या ऐसी हिंदूवादी  सोच से आप इत्तेफाक रखते हैं  ?

जंहा तक मै समझता हूँ “हिंदुत्व” शब्द हिन्दुस्तान के एकजुट राष्ट्रनिर्माण और उसकी अखंडता और एकता ,संस्कृति के अथाह संकल्प को परिलक्षित करता है !

पर मै अपने आलेख से कोई भी निर्णायक फैसला नहीं करना चाहता ! मै चाहता हूँ भारतवासी होने के नाते हर धर्म- वर्ग- वर्ण- समुदाय-समाज का व्यक्ति ये तय करे की आखिर हिंदुत्व क्या है ?  “एक सम्प्रदायिक उत्प्रेरक या सर्वहिताय राजधर्म”  ?

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463 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Abhay1 के द्वारा
October 23, 2012

चन्दन राय, पहली बात तुम्हारे जैसे बेवकुफो की वजह से आज हिन्दू, हिंदुस्तान में सुरक्षित नहीं है, दूसरी बात की ये हिंदुस्तान है इसीलिए इतनी बकवास कर ले रहा है अगर पाकिस्तान होता तो अब तक तेरी जबान खीच ली गयी होती, तीसरी और आखरी बात अब हिन्दुओ ने माफ़ और क्षमा करना और माफ़ करने की पुरानी गलती दोहराना बंद कर दिया है, अगर हिन्दू सुरुवात से यही निति अपनाते तो न पाकिस्तान होता, ना कट्टर गद्दार मुसलमान, ना हम उनकी वज़ह से कट्टर बनते.

indian के द्वारा
August 29, 2012

hindu कभी गलत कर ही नहीं सकते,२००२ में उनके अन्दर का आक्रोश फूटा था,और फूटता rahega , माधरचोद कांग्रेसी ने देश का बंटाधार कर दिया

DHARAMSINGH के द्वारा
August 20, 2012

आप का आलेख बहुत गलत व बायस है  जो मरजी हमे मारे हमारी इजत से खेले लूटे चुप रहो वाह कैसा उपदेश  दिया है

vishnu के द्वारा
August 18, 2012

चन्दन जी आसाम के बारे मे आपका क्या विचार है क्या वहां हिन्दू है या बंगलादेशी इस पर भी कुछ लिखते

    Chandan rai के द्वारा
    August 18, 2012

    विष्णु जी , आपके अमूल्य उपस्थिति और आग्रह के लिए आभार मे इस मुद्दे पर फिलहाल लिखने की अपनी मंशा को स्थगित कर रखा है , क्यूंकि लेख का असंतुलन दंगा उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है , जाने यह किस तरह से प्रभाव डाले ! फिर भी अपने पुर सामर्थ्य से यदि एक संतुलित और उचित लेख बन पाया तो अवश्य प्रयास करूंगा , आप तक पहुचाने की !

jalaluddinkhan के द्वारा
July 12, 2012

मैंने पहले भी कहा है और आज भी कहता हूँ- खुदा के वास्ते नफरत की आंधियां न चला, मेरे वतन को मोहब्बत का बाग रहने दे. इस दिशा में आपका यह प्रयास बहुत सराहनीय है.काश देश में लोग अम्नोअमन की बात ही करते.

    Chandan rai के द्वारा
    July 12, 2012

    जलालुद्दीन  खान, आपके vichaar ओं से मेरे लेख को तृप्ति मिल गई , लिखने का मूल उद्देश्य सफल हो गया ! कम से कम आज का युवा वर्ग तो एक है

pritish1 के द्वारा
July 8, 2012

चन्दन जी……..प्रीतीश आपके ज्वलंत आलेख की प्रतीक्षा में हूँ आपसे एक प्रश्न है उत्तर अवश्य दें क्यों बनाया हमने ऐसा समाज………! http://pritish1.jagranjunction.com/2012/07/07/kyun-banaya-hamne-aisa-samaj/

    Chandan rai के द्वारा
    July 8, 2012

    प्रीतिश भाई , अआप्को इस आलेख पर ही उस समाज की चित्र चिह्न दिख रहे हो होंगे , में हतप्रभ होता हूँ की कैसे लोग राष्ट्रवाद को छोड़ अपने अपने बनाये पाखण्ड में जीते है , कैसे अलगाववाद की बात कह देश आगे बढाने की बात कहते है , अब मुझे इन्होने हुनुओं का विरोधी ही अत दिया ,जाकी में कह रहा हूँ जो राष्ट्र तोड़ने की बात करे या कृत्य उसे दंड दो चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम या कोई और ! हमने ये समाज अपनी स्वार्थपरता से निर्मित किया है ,अपने निज लाभ साधने के लिए देश को तोड़ रहे हैं , aap jaise logo की देश को jarurat है जो sarvdharan samhav rakhe !

vikasmehta के द्वारा
July 8, 2012

sangh nhi chandan ji mujhe to aap hi bhatke hue lag rahe hain bhagvan apko sadbuddhi de

    Chandan rai के द्वारा
    July 8, 2012

    विकास भाई , आप जैसे मित्रों की दुआए ही तो जिदा रखे है , आप का कर्ज ना उतार सकूंगा !

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 8, 2012

आज भारतीय राजनीति में हिंदुत्व के नाम पर चक्रवात आया हुआ है , आप सोचीय क्यूँ जरुरत पड़ी की एक हिन्दू राजनेतिक नेता एक दुसरे हिन्दू राजनेतिक नेता का इतना कडा विरोध कर रहा है , इनके मतान्तरों से यह अभिप्रयाय निकलता है की कंही ना कंही तथाकथित राजनेतिक पार्टी या उसके हिंदुत्ववादी सोच में खोट है और सायद वह हिंदूवादी सोच की दकियानूसी मानसिकता में उलझा हुआ है ,जिसका मुलभुत उद्देश्य इक वर्ग ,वर्ण की बात कर इक राष्ट्रिय साम्प्रदायिकता को जन्म देना है ! राजकमल उर्फ कसाई जी , आपका आभार प्रकट करने के लिए मेरे पास फंड की बेहद कमी हो गई है जल्द ही लोन के लिए अप्लाई करके + अरेंज करके आपका कर्ज चुकता करने की पुरजोर कोशिश करता हूँ – चन्दन राय – “खुशबूदार” :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| (इस देश में अपने स्वार्थ के लिए हरेक सही चीज को तोड़ा मरोड़ा गया है और गलत तरीके से पेश किया गया है तथा देश की भोली और समझदार दोनों प्रकार की जनता को अच्छी तरह से मूर्ख बनाया गया है * ) जय बोलो भगवान शंकर महादेव महाराज जी की सदाशिव जी की

    Chandan rai के द्वारा
    July 8, 2012

    राजकमल साहब , शंकर भगत कांग्रेसी महाराज जी , आपने आलेख पर उपस्थिति जैसे किसी सैन्य आक्रमण की तरह दी है , अपनी अक्षुनी सेना के साथ ! आपके विचारों का स्वागत !

sinsera के द्वारा
July 8, 2012

चन्दन जी नमस्कार, कहाँ आप ये पचड़ा ले बैठे.. उनका जो काम है वो अहले सियासत जाने, मेरा पैगाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुंचे..

    Chandan rai के द्वारा
    July 8, 2012

    सरिता जी , ये देश मेरा ही उतना है , jab लोगो को इस तरह बरगलाते देखता हूँ तो दुःख होता है !

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
July 7, 2012

हिंदुत्व को अगर कट्टरवादी धर्म के तौर पर देखा जाएगा तब उसकी अवधारणा ही विलुप्त होती दिखेगी। सही बात तो यह है कि धर्म वह है जो मानव को आदर्श मानव बनाए और जब कोई जड़ता का ही प्रलाप करने लगे तब उसे कोई धर्म या विचारधारा मानने से भी इंकार करना पड़ सकता है, इसलिए जरूरी यह है कि हिंदुत्व कहें, अपनत्व या फिर मानवतावाद परंतु यह बात सदैव ध्यान में रखनी होगी कि जो समाज के श्रेयष्कर है वही सर्वश्रेष्ठ है।

    Chandan rai के द्वारा
    July 8, 2012

    सिंह साहब , आपके विचार से me पूर्ण रूप से सहमत हूँ , आज ऐसे ही विचारो की जरुरत है !

Chandan rai के द्वारा
July 7, 2012

प्रिय मित्रजनो , धर्म कोई भी हो वह सभी के सद्भाव उत्थान प्रेमभाव की बात कहता है ,कोई धरम अत्याचार ,दुराचार ,आतंक को सही नहीं ठहराता ,उसकी नजर में सब समान है ======== जिस तरह अलाह या राम एक है उसी तरह जितने चाहे धरम मान लो सब धरम का मूल एक है , ———— हमारे देश में सभी संगठनों ,व्यक्ति ,संस्था को अपनी बात एक निश्चित दायरे या विरोध का एक सवेधानिक तरीका है , पर कोई भी व्यक्ति इस सीमा को लान्खता है तो उस पर अंकुश लगाना अनिवार्य है , और यदि उसकी प्रामिन्कता के सबूत हमारी न्याय प्रणाली उपयुक्त मानती है तो जरुर कारवाई होनी चाहिय , पर जिन संस्था का लेख में वर्णन है उनकी भाषा ,आचरण ,संवाद में एक सार्वजानिक अभिव्यक्ति का और राष्ट्रिय एकता पर प्रहार का दोष पाया गया है ! सायद आप इसे ना नकारे !

Chandan rai के द्वारा
July 4, 2012

प्रिय मित्रजनो , विगत कुछ दिनों से मेरे लाख चाहने पर भी अपरिहार्य कारणों से मै मंच पर अनुपस्थित था , अभी भी कुछ निजी जिम्मेदारिओं में उलझा हुआ हूँ , पर आपके विचारों और सवालों का खुले दिल से स्वागत !, निश्चित ही यह ऐसा मुद्दा है जिस पर खुल कर मंथन होना चाहिय !, ===== संभवत में कोशिश करूंगा और आपके सभी विचारो और सवालों का सायद अपने अल्पज्ञान से कुछ सपष्टीकरण दे पाऊं ! पर आज का समय मै आपके विचार पढने मे दूंगा !

yamunapathak के द्वारा
July 3, 2012

चन्दन जी,आपका यह लेख अत्यंत ही उत्कृष्ट है. सर्वप्रथम तो धर्मं शब्द ही लोगों ने गलत अर्थ में लिया है धर्मं ध्री धातु से जिसका अर्थ है धारण करना .कुछ आधारभूत मूल्य हर धर्मं में हैं और हिंदुत्व भी अपनी उन्ही आधारभूत मूल्यों की प्रवाहमयी धारा है.

    Chandan rai के द्वारा
    July 5, 2012

    यमुना जी , आपने बहुत ही सुन्दर व्याख्या की है

ajaykr के द्वारा
July 2, 2012

चन्दन भाई , हिंदुत्व एक विशिष्ट धर्म हैं और हर धर्म शान्ति,सुकून के साथ जीने की प्रेरणा देता हैं ,और इतिहास गवाह हैं की सदियों से हम हिन्दुओ जैसे शांतिप्रिय लोग इस धरा पर नही हुए हैं ……………………………. फेसबुक जैसी साईट पर मैंने  कई हिन्दुस्तानी मुस्लिमो का बेहद घटिया रुख और नजरिया देखा हैं ,सब हिन्दुवादी संघटन गलत नही हों सकते ……. हमने हैदराबाद ,लखनऊ जैसे क्षेत्रो में मुस्लिम इलाके में ऐसा महसूस किया हैं जैसे वहाँ कोई दूसरा कट्टरपंथी मुल्क हों ,लव जेहाद छोटी छोटी बातों पर अत्याचार आम हैं ,,……. क्या कहते हैं आप ..इन लोग का क्या मकसद हैं क्या ये भटके लोग नही हैं

    Chandan rai के द्वारा
    July 5, 2012

    अजय मित्र , आपकी बातो से सहमती यदि कोई हिंदूवादी सोच से सर्वजन हिताय की बात कहता है तो अपने आप में वह धर्मनिरपेक्ष और हिन्दुत्वादी है , वह कंही से भी अलगाव वादी या सिर्फ हिंदूवादी नहीं है , बिलकुल ये भटके लोग ही है

    Gloriana के द्वारा
    July 11, 2016

    Damn, I wish I could think of soemihtng smart like that!

विमल सोनी के द्वारा
July 2, 2012

मुस्लिम आक्रांता की कब्र हेतु 25 लाख और हिन्दू राजा का स्मारक उपेक्षित… लानत भेजो ऐसी “शर्मनिरपेक्षता” पर क्या आपने इब्राहीम लोदी का नाम सुना है? ज़रूर सुना होगा… क्या आपने हेमचन्द्र विक्रमादित्य (हेमू) का नाम सुना है? क्या कहा – याद नहीं आ रहा? इतनी आसानी से याद नहीं आयेगा… असल में हमें, बाबर, हुमायूं, अकबर, शाहजहाँ, औरंगज़ेब आदि के नाम आसानी से याद आ जाते हैं, लेकिन हेमचन्द्र, सदाशिवराव पेशवा, पृथ्वीराज चौहान आदि के नाम तत्काल दिमाग में या एकदम ज़ुबान पर नहीं आते… ऐसा क्यों होता है, इसका जवाब बेहद आसान है – हमारी मैकाले आधारित और वामपंथी शिक्षा प्रणाली ने हमारा “ब्रेन वॉश” किया हुआ है। सबसे पहले ऊपर दिये गये दोनों राजाओं का संक्षिप्त परिचय दिया जाये… इब्राहीम लोदी कौन था? इब्राहीम लोदी एक मुस्लिम घुसपैठिया था जिसने मेवाड़ पर आक्रमण किया था और राणा सांगा के हाथों पराजित हुआ था। इब्राहीम लोदी के बाप यानी सिकन्दर लोदी ने कुरुक्षेत्र के पवित्र तालाब में हिन्दुओं के डुबकी लगाने पर रोक लगाई थी, और हिमाचल में ज्वालामुखी मन्दिर को ढहा दिया था, उसने बोधन पंडित की भी हत्या करवा दी थी, क्योंकि पंडित ने कहा था कि सभी धर्म समान हैं। इब्राहीम लोदी का दादा बहोल लोदी अफ़गानिस्तान से आया था और उसने दिल्ली पर कब्जा कर लिया था। ऐसे महान(?) वंश के इब्राहीम लोदी की कब्र के रखरखाव और मरम्मत के लिये केन्द्र और हरियाणा सरकार ने गत वर्ष 25 लाख रुपये स्वीकृत किये हैं, जबकि रेवाड़ी स्थित हेमू के स्मारक पर एक मस्जिद का अतिक्रमण हो रहा है। अब जानते हैं राजा हेमू (1501-1556) के बारे में… “राजा हेमू” जिनका पूरा नाम हेमचन्द्र था, हरियाणा के रेवाड़ी से थे। इतिहासकार केके भारद्वाज के शब्दों में “हेमू मध्यकालीन भारत का ‘नेपोलियन’ कहा जा सकता है”, यहाँ तक कि विन्सेंट स्मिथ जिन्होंने समुद्रगुप्त को भी नेपोलियन कहा था, मानते थे कि हेमू को भी भारतीय नेपोलियन कहा जाना चाहिये। हुमायूं के पतन के बाद हेमचन्द्र ने बंगाल से युद्ध जीतना शुरु किया और बिहार, मध्यप्रदेश होते हुए आगरा तक पहुँच गया। हेमचन्द्र ने लगातार 22 युद्ध लड़े और सभी जीते। आगरा को जीतने के बाद हेमचन्द्र ने दिल्ली कूच किया और 6 अक्टूबर 1556 को दिल्ली भी जीत लिया था, तथा उन्हें दिल्ली के पुराने किले में “विक्रमादित्य” के खिताब से नवाज़ा गया। 5 नवम्बर 1556 को अकबर के सेनापति बैरम खान की विशाल सेना से पानीपत में उसका युद्ध हुआ। अकबर और बैरम खान युद्ध भूमि से आठ किमी दूर थे और एक समय जब हेमचन्द्र जीतने की कगार पर आ गया था, दुर्भाग्य से आँख में तीर लगने की वजह से वह हाथी से गिर गया और उसकी सेना में भगदड़ मच गई, जिससे उस युद्ध में वह पराजित हो गये। अचेतावस्था में शाह कुलीन खान उसे अकबर और बैरम खान के पास ले गया, अकबर जो कि पहले ही “गाज़ी” के खिताब हेतु लालायित था, उसने हेमू का सिर धड़ से अलग करवा दिया और कटा हुआ सिर काबुल भेज दिया, जबकि हेमू का धड़ दिल्ली के पुराने किले पर लटकवा दिया… हेमू की मौत के बाद अकबर ने हिन्दुओं का कत्लेआम मचाया और मानव खोपड़ियों की मीनारें बनीं, जिसका उल्लेख पीटर मुंडी ने भी अपने सफ़रनामे में किया है… (ये है “अकबर महान” की कुछ करतूतों में से एक)। एक तरह से देखा जाये तो हेमचन्द्र को अन्तिम भारतीय राजा कह सकते हैं, जिसके बाद भारत में मुगल साम्राज्य और मजबूत हुआ। ऐसे भारतीय योद्धा राजा को उपेक्षित करके विदेश से आये मुस्लिम आक्रांता को महिमामण्डित करने का काम इतिहास की पुस्तकों में भी किया जाता है। भारत के हिन्दू राजाओं और योद्धाओं को न तो उचित स्थान मिला है न ही उचित सम्मान। मराठा पेशवा का साम्राज्य कर्नाटक से अटक (काबुल) तक जा पहुँचा था… पानीपत की तीसरी लड़ाई में सदाशिवराव पेशवा, अहमदशाह अब्दाली के हाथों पराजित हुए थे। भारत में कितनी इमारतें या सड़कें सदाशिवराव पेशवा के नाम पर हैं? कितने स्टेडियम, नहरें और सड़कों का नाम हेमचन्द्र की याद में रखा गया है? जबकि बाबर, हुमायूँ के नाम पर सड़कें तथा औरंगज़ेब के नाम पर शहर भी मिल जायेंगे तथा इब्राहीम लोदी की कब्र के रखरखाव के लिये 25 लाख की स्वीकृति? धर्मनिरपेक्षता नहीं विशुद्ध “शर्मनिरपेक्षता” है ये…। धर्मनिरपेक्ष(?) सरकारों और वामपंथी इतिहासकारों का यह रवैया शर्मनाक तो है ही, देश के नौनिहालों का आत्म-सम्मान गिराने की एक साजिश भी है। जिन योद्धाओं ने विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ़ बहादुरी से युद्ध लड़े और देश के एक बड़े हिस्से में अपना राज्य स्थापित किया उनका सम्मानजनक उल्लेख न करना, उनके बारे में विस्तार से बच्चों को न पढ़ाना, उन पर गर्व न करना एक विकृत समाज के लक्षण हैं, और यह काम कांग्रेस और वामपंथियों ने बखूबी किया है। इतिहास की दो महत्वपूर्ण घटनायें यदि न हुई होतीं तो शायद भारत का इतिहास कुछ और ही होता – 1) यदि राजा पृथ्वीराज चौहान सदाशयता दिखाते हुए मुहम्मद गोरी को जिन्दा न छोड़ते (जिन्दा छोड़ने के अगले ही साल 1192 में वह फ़िर वापस दोगुनी शक्ति से आया और चौहान को हराया), 2) यदि हेमचन्द्र पानीपत का युद्ध न हारता तो अकबर को यहाँ से भागना पड़ता (सन् 1556) (इतिहास से सबक न सीखने की हिन्दू परम्परा को निभाते हुए हम भी कई आतंकवादियों को छोड़ चुके हैं और अफ़ज़ल अभी भी को जिन्दा रखा है)। फ़िर भी बाहर से आये हुए आक्रांताओं के गुणगान करना और यहाँ के राजाओं को हास्यास्पद और विकृत रूप में पेश करना वामपंथी “बुद्धिजीवियों” का पसन्दीदा शगल है। किसी ने सही कहा है कि “इतिहास बनाये नहीं जाते बल्कि इतिहास ‘लिखे’ जाते हैं, और वह भी अपने मुताबिक…”, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक सच्चाई कभी न पहुँच सके… इस काम में वामपंथी इतिहासकार माहिर हैं, जबकि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण में… इसीलिये अकबर और औरंगज़ेब का गुणगान करने वाले लोग भारत में अक्सर मिल ही जाते हैं… तथा शिवाजी की बात करना “साम्प्रदायिकता” की श्रेणी में आता है… जाते-जाते एक बात बताईये, आपके द्वारा दिये गये टैक्स का पैसा इब्राहीम लोदी जैसों की कब्र के रखरखाव के काम आने पर आप कैसा महसूस करते हैं? ——————————— ——————————— With deepest regards, Anil Kumar Jharotia aniljharotia@yahoo.com

    Chandan rai के द्वारा
    July 5, 2012

    मित्र , यदि हम भी इन दकियानूसी सोच में शामिल हो जाए तो देश की एकता तो खतरे में पड जायेगी ! फिर तो धर्मनिरपेक्ष शब्द ही मर जाएगा ! क्या हम अपने हिंदुत्व को अलगाववादी विचारधारा का पक्षधर बना दे ! अच्छी एतासिक जानकारी के लिए आपका धन्यवाद !

    vishnu के द्वारा
    July 6, 2012

    मित्र सोनी जी एक घटना और अगर नेहरु जी की जगह सरदार पटेल प्रधानमंत्री होते तो देश का नक्शा और होता I मेरी नज़र मे अब भी कुछ बिगड़ा नहीं है अगर हिन्दू जाति आधारित नहीं हो दूसरा एक दुसरे की टांग खिचाई न करे जैसे श्री मान चन्दन राइ और अनिल अदीन jee

    vikasmehta के द्वारा
    July 9, 2012

    chandan ji hmari soch dakiyanusi hai to unki soch kaisi lagti hai apko jo ab bhi is desh ko dharm ke nam par tod rahe hain ,,,,,chandan ji chodiye vampanthi or baki dharmnirpeksho ko khush karne ke tareeke kuch accha likhiye jisse desh jagruk ho ,,,,,,,,,varna kachra to bahuto ne likhaa hai

    vikasmehta के द्वारा
    July 9, 2012

    soni ji namskar mai apse purntya sahmat hoo ,,,,,

    Abhay के द्वारा
    October 23, 2012

    चन्दन राय, पहली बात तुम्हारे जैसे बेवकुफो की वजह से आज हिन्दू, हिंदुस्तान में सुरक्षित नहीं है, दूसरी बात की ये हिंदुस्तान है इसीलिए इतनी बकवास कर ले रहा है अगर पाकिस्तान होता तो अब तक तेरी जबान खीच ली गयी होती, तीसरी और आखरी बात अब हिन्दुओ ने माफ़ और क्षमा करना और माफ़ करने की पुरानी गलती दोहराना बंद कर दिया है, अगर हिन्दू सुरुवात से यही निति अपनाते तो न पाकिस्तान होता, ना कट्टर गद्दार मुसलमान, ना हम उनकी वज़ह से कट्टर बनते.

विमल सोनी के द्वारा
July 2, 2012

मैं इस बात की चेतावनी कई बार दे चूका हूँ , कि ये एक साजिस है जो हमारे हिन्दू सनातन धर्मं के खिलाफ है , हमारे हिन्दू धर्म में दूधों -नहाओ , पूतों फलो का आशीर्वाद दिया जाता था ..जिसे साजिस के तहत दुस्प्रचारित किया गया , , सोचो जब विक्रमी सम्वंत शुरू हुआ था तब से सातवीं शताब्दी तक भारत सोने की चिड़िया बन चूका था दूध की नदियाँ बहती थी , सोने चांदी के विशाल भण्डार थे ..गुरुकुल की परंपरा के कारण हमारा शैक्षिक स्तर विश्व भर में सबसे उन्नत था , हमारा निर्यात पूरे विश्व में चौतीस प्रतिशत था , प्रत्येक प्रकार की उन्नत वस्तु अति उत्तम किस्म की बनाई जाती थी , ये तब होता था जब हमारी ( हिन्दू धर्म की ) संख्या विश्व में काफी ज्यादा थी , हमारा भारत वर्तमान के इरान से लेकर म्यमार तक और इंडोनेसिया से लेकर श्री लंका तक था , तब इसका नाम आर्याव्रत था ……………….और आज हमारी संस्कृति पर चौतरफा हमला किया जा रहा है ….हमें कहा जा रहा है ..अपनी मात्र भाषा हिंदी छोडो …अंग्रेजी अपनाओ …नहीं तो पिछड़ जाओगे ….हुआ क्या हम आगे बढे ???? गौमाता – हमारी अर्थव्यवस्था कि रीड थी ..दूध और उससे बने उत्पादनों का विश्व भर में निर्यात किया जाता था …हर-घर में गौमाता होती थी और पूजी जाती थी …..और आज साजिस के तहत उसकी हत्या के कत्लखाने हज़ारों कि संख्या में मुल्लों को खुश करने के लिए खोले जा रहे ………उसका मांस खाया जा रहा है ………मुझे समझ में नहीं आता कि भाए हम जी क्यों रहे है इतना अपमान सहकर ..कोई हमारी माँ को हमारे सामने कि काटकर खा रहा है ..और हम शांत होकर देख रहे है …और ये हो तो तब रहा है जब कोंग्रेस सरकार उनकी मदद कर रही है लाईसेंस देकर ………..हम ये कैसी तरक्की कर रहे है ??????क्या हम आगे बढ़ रहे है हम अपने शालीन ( धोती कुरता और साडी -सूट- सलवार )परिधानों को छोड़कर कुल्हे से नीचे खिसकती जींस की पैंटों और तंग होती स्कर्टों -टापों गर्मी में भी बंद गले वाले कोट और पैंट , टाई…प्रकृति के विरुद्ध परिधानों का चयन करते करते है …….तो क्या हम आगे बढ़ रहें है ?????? हम दो हमारे दो …का नारा अब कुछ इस तरह से प्रचारित किया जा रहा है —शेर का बच्चा एक ही अच्छा ………..खुद तो दुसरे के धर्मो के लोगों को भी तोड़कर अपने में मिलकर अपनी संख्या में वृद्धि कर रहे है ..और स्वयं तो संख्या वृद्धि में लगे ही हुए है …और हमें ये कहा जा रहा है की आप एक या दो बच्चे पैदा करो ..पढ़ -लिख कर डॉक्टर या इंजीनयर बनेगे ….और खुद ज्यादा पैदा करके अपनी जनसँख्या बढ़ा रहे है …लोकतंत्र है भाई नेता तो उन्ही का बनेगा …फिर हमारे डॉक्टर और इंजिनियर उनके नोकर होंगे ,…..मतलब …खुद मियाँ फजीहत दूसरों को नसीहत ………तो क्या हम आगे बढ़ रहे है …. गलत……………गलत …………….गलत …………. हम आगे अपने अस्तित्व को खुद ही समाप्त करने पर जोर – शोर से तुले हुए है …..आत्महत्या कर रहे है …….अभी भी वक्त है हिन्दुओ गरजो दहाड़ी …शेरों की संख्या में बढ़ोतरी होनी चाहिए ..अपना वर्चस्व कायम करना होगा ….अगर ऐसा नहीं किया तो गीदड़ों की संख्या इतनी बढ़ जायेगी की …शेर का बच्चा एक ही अच्छा …कुछ भी न कर पायेगा …नोच –नोच कर खा जायेंगे ये गीदड़ …जैसा की कोसीकलां में हुआ है अभी हाल ही में …हमें बचने कोई भी नहीं आएगा …..क्योंकि कुछ हमारे ही भाई मतिभ्रष्ट होकर सेकुलर बन गए है और मुल्लों का साथ दे रहे है …मीडिया भी नल्ले-पाए , लेग पीस खाकर बोटी नोचकर इन्ही के गुण गाता है ……. सोचो ..सच्चे भारतीय सपूतो सोचो ……विचार करो …नहीं तो …मिट जाओगे …जिस तरह से हिन्दुस्तान मिट रहा है …. इतिहास भी साक्षी है जब – जब हिन्दू घटा या बंटा……. भारत का क्षेत्रफल भी घटा या बंटा है —- अआप खुद इतिहास देख लीजिये …….सौ वर्ष पहले हमारा भारत कैसा था ….और आज कैसा है …….और ऐसा ही रहा तो आने वाले सौ -वर्षों में क्या रहेगा ?? जय श्री राम जय हिन्दू सनातन धर्मं क़ी भारत माता की जय आपका दोस्त –सुदेश शर्मा ,

विमल सोनी के द्वारा
July 2, 2012

चन्दन जी …. हिदुओ के पार्टी आपकी जानकारी उत्तम है वन्दना है आपकी…. जुलम बर्दास्त करते रहना चाहिए हिन्दुओ को बेटी को लव जिहाद में छेड़े तो माँ को भी पेश करदेना चाहिए …. किया का जीकर न कर आप प्रतिक्रिया पर बोल रहे है…. यदि रेल में हिदुओ को न जलाया जाता और गोधरा होता तो सर निंदनीय होता कोई शक नहीं … पर गोधरा हुआ क्यों? इस से लगता है आपको कोई लेना देना नहीं …. आज एक १२ साल कि बच्ची को घर से उठा कर ले गए और तीन दिन में इस कदर नोचा उसे कि वो मर ही गयी…. कोई बड़ी बात नहीं कि बाद मरने के उसकी मृत देह को उन कुत्तों ने न झंझोड़ा होगा …. प्रतापगढ़ पर क्या लिखोगे…. लिखो …. कश्मीर से हिंदू काट काट कर बाहर निकाले गए लिखो उस पर… मथुरा पर लिखो…. नहीं लिखोगे … मै जानता हू क्युकि सच के पक्ष में बोलना नेताओं कि फितरत ही नहीं बची… हिन्दुओ के पतन पर नजर नहीं वो खंडित दर खंडित होता जा रहा है नहीं दिखा …. सत्ता में बैठे लोग क्या कर रहे है नहीं दिखा ….. क्या दिखा…..हिन्दुओ ने बचाव में जो किया वो दिखा …..  हम आज ऐसे स्थान पर इसी मानसिकता के चलते पहुचे है….. मै रहता हू नरोडा पाटिया मै जानता हू क्या हुआ आप कुछ दिन आकार रहो यहाँ दूर बैठ कर इस तरहा लिखना सच का साथ नहीं है …. मै जानता हू आप कि भावना अन्यथा नहीं हो सकती …. आपका पक्ष सच होता यदि ये क्रिया कि प्रतिक्रया ना होती पर अभी ये सर्वथा निन्दनीय बन गयी है…. और मै निंदा करता हू…. हां आपके दिल में शांती के उस जज्बे की क़द्र भी…. पर वो अधूरा है ….

    Chandan rai के द्वारा
    July 5, 2012

    मैंने यही माना है और यही लिखने का उद्देश्य भी की हिन्दुस्तान का हिंदुत्व सबसे उदारवादी सोच है और कर्म है , यदि हम पर कोई आक्षेप करता है तो क्या हम उदारवादी सोच त्याग दे ,हम भी अशभय ,दुराचारी कार्य में सम्मिलित हो जाए ,आज जब विश्व हमारी जैविक विविधतता के पश्चात हमारी राष्ट्रिय एकता का उदाहरण देता तो क्या हम उसे खंडित कर दे , यदि कोई मुस्लिम विरोधी बात कहता है ,वो भी चंद आतंकवादिओं के कारन तो जरा वह इतिहास और अपना मन खंगाल ले की भारत को आजादी दिलाने वाले क्रान्तिकारिओन में मुस्लिम सामान रूप से सहभागी थे , और इसी सनुचित मानसिकता ने देश को बाट दिया ,और समय पर दंगों का घात ,आतंकवाद इसी अलगाववादी रुग्न सोच का नतीजा है , मे अपनी कविता के दो पंक्तिया कहना चाहूंगा , कौन कहता है लहू मत उबालो ,म्यान से तलवार न खींचो , में कहता हूँ मेरे भाई जन्हा देखो मुहब्बत ,अदब से सर झुका लो !

    Ashish के द्वारा
    July 19, 2012

    इतिहास और अपना मन खंगाल ले की भारत को आजादी दिलाने वाले क्रान्तिकारिओन में मुस्लिम सामान रूप से सहभागी थे ,…………………… आखिर वो क्यो शमिल थे, क्योंकि वो भारत पर राज नही कर पा रहे थे। जब अंग्रेजों से सत्ता वापस मिलने को हुई तो तुरन्त अलग देश की माँग कर बैठे। यदि वो अलग देश की माँग न करते भारत को खुद का देश समझते, यहीं के निवासी बन कर जीने मे गौरवान्वित समझते तो मानता कि हाँ वो समान रूप से सहयोग किये। आज भी कश्मीर की समस्या हल नही हुई। अगर सिख , जैन, ईसाई सभी उसी समय अलग देश की माँग करते तो,,,,,,,,,,

    Chandan rai के द्वारा
    July 19, 2012

    आशीष जी , मौलाना अबुल कलम आजाद,बहादुर शाह ज़फर, मौलाना मोहनी ,मुलाना मजहरुल हकुए ,अली जवाद जैदी , दादा भाई मेरोजी ,जिन्नाह ,अशफाकुल्लाह , और जाने कितने है हिंदुत्व के उदारवाद का इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता ही पंडित राम प्रसाद बिस्मिल ने ब्रह्मण होकर भी बिस्मिल शब्द को अपने अस्तित्व में समाहित किया था ! और बिस्मिल जी ,अशफाकुल्ला ,रोशन जी ने एकजुटता का एक श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया ! पकिस्तान और भारत का निर्माण राजशाही महत्वकांक्षा का कुजन्म है इसमें कंही भी धार्मिक अनुसंधान का हस्तक्षेप नहीं है

chandrahas के द्वारा
July 2, 2012

mujhe samjh me nahi aata hai ki dharm nirpechhata ke nam par bas hindu dharm ki burai karne ka chalan kyu suru ho gya hai.Aap sab logo ko bas gujrat ka danga yad aata lekin uski suruat ke bare me koi kyu nhi bolata hai.aap jaise log kyu un hindu logo ki bat nhi batate jo train me jinda jala diye gye the. aap ne itihas sahi se padha nhi shayad,aap koi bhi ek hinsak ghatana bata dijiye jo hinduwo ne suru ki ho,kya hua nhi yad aa rahi na!!!! yahi to samasya hai ap jaise logo ki ,ki aap log bas logo ko bhadakana aur khud paisa kamana jante hai.aaj apke jaise log bolte hai ki hame muslimo ko aarakchhad dena chahiye kyuki unki halat bahut kharab hai,lekin ye kisi ko dhyan nahi aata ki ki muslimo ne hindustan ke upar kitne saikado sal raj kiya hai aur us samay hinduwo kya halat thi ,aaj ham unse jada hai to ye samasya ban gayi aap logo ke liye kyuki aap jaise log hamesa gulami hi karna janate hai.

Ashish के द्वारा
July 2, 2012

लोग कहते हैं “हिंदुस्तान में अधिकतर आतंकवादी बनते नहीं बल्कि बनाये जाते हैं……………एक विशेष कौम को जान बुझकर उकसाया और भड़काया जाता हैं” ये वही विशेष कौम है जिसके लोग सदा से ही लूट-पाट करते आये हैं। मै ज्यादा तो नही जानता लेकिन मैने इतिहास की कुछ घटनायें पढ़ा है। जिस पन्थ का उद्भव ही मार-काट के उद्देश्य से हुआ है उस पन्थ के लोग भला सही कैसे हो सकते हैं। आर एस एस संगठन न हो तो हिन्दू का विनाश होते देर न लगेगी। भ्रष्ट राजनेता इस्लाम को केवल वोट बैंक हेतु पूरी छूट देंगे। फिर न तो राम होंगे न ही श्याम। देवादिदेव महादेव का नाम नही होगा। हर तरफ कम बुद्धि के जीव दिखाई देंगे। दाढ़ी बढ़ी हुई, मूछें गायब, विचित्र वेश-भूषा यानि हर तरफ मुसलमान नजर आयेंगे। ये मै साफ कहूँगा कि ये मुसलमान किसी राक्षस से कम नही होते। फिर हर तरफ हड्डियाँ ही हड्डिया होगीं। बिना अस्त्र-शस्त्र के उठाये कुछ नही होता। यदि आर एस एस ऐसा करता है तो बिल्कुल सही है। मै १९९९ से इसे जानता हूँ। आज तक इसमे केवल भारत की सुरक्षा के लिये ही बताया गया है। अगर कोई इसमे आया और उसे लगा कि ये मार-काट सिखाता है तो जरा हमे भी बताये। क्या वो मार-काट बिना किसी मतलब के (जैसा कि मुसलमान जेहाद के नाम पर करते है) करने को कहते हैं। ये समय वो नही कि आप लोग आपस मे लड़कर फिर से किसी अन्य को अपने देश पर राज्य करने दें। समय आ गया है अपनी सत्ता अपने हाथ मे लेने का। यदि त्रेता मे राम न लड़ते तो भारत पर राज्य रावण करता। लेकिन उन्होने शस्त्र उठाये। फिर हम क्यों न उठायें। बिना शस्त्र उठाये शान्ति की कल्पना करना बे-ईमानी है। जब बात से बात न बने तो शस्त्र उठाना पड़ेगा। धर्म की रक्षा प्रत्येक हिन्दू का कर्तव्य है। आज भारत के मुसलमान वो नीच हैं जिनके पूर्वज तलवारों के आगे झुक गये। कर न देने के लालच मे धर्म बेंच दिया। यदि ये उस समय हथियार उठाते तो दशा भिन्न होती। महान शायर अल्लामा इकबाल, जिनके पूर्वज पण्डित थे, ने अपने जीवन के प्रथम दौर मे ही मात्र हिन्दू मुस्लिम एकता पर लिखा यानि १८९९ से १९०५ तक। फिर क्या हुआ मुसलमानी पढ़कर ये भी उसी जेहाद मे रम गये। बाद की सारी रचनाये मुस्लिमो को उकसाने वाली थीं। ये वो हैं जिन्होने बँटवारा करा दिया हिन्दूस्तान का। फिर क्या हक रह जाता है इन्हे यहाँ रहने का। बात साफ है। आकड़े देखिये, १९४७ से आज तक, किस तरह इनकी जनसंख्या बढ़ी है। ये यहाँ नही रहेंगे तो इनके नाम की राजनीति नही होगी। फिर भारत अपना दम पा सकेगा।

    विमल सोनी के द्वारा
    July 2, 2012

    मै सहमत हू पूर्ण सहमत …..  पर भाई आस्तीनों कि सफाई सबसे पहले होगी …. जब सग्राम होगा …. और संग्राम के सिवा कोई रास्ता नहीं …. जब करा पडेगा यही करना होगा … ये बात चन्दन को तब समझ आयेगी जब आग इसके घर पहुचेगी … प्रतापगढ़ के राखी इसकी बहन बेटी होती काश तो ये आलेख अपनी …. में ही घेस्द्लेता और हमसे भी बुरा बोलता …. पर वो इसकी बहन नहीं थी …. वो मेरी बेटी थी…… और मै उसका हिसाब करते रहूगा जब जब मौका मिलेगा …..

vishnu के द्वारा
June 30, 2012

मित्र मुनीश जी, चन्दन जी और अदीन जी का वश चले तो हिन्दुओ पर प्रतिबन्ध लगा दे लगता है की इनको हिन्दुओ के विरोध मै लिखने का पैसा मिलता है अगर नहीं तो मुस्लिम धर्म मे भी बुराई होंगी कभी उनके बारे मे लिखना मै मान जाऊँगा की तुम सचे समाज सुधारक हो I

    munish के द्वारा
    June 30, 2012

    आदरणीय विष्णु जी, आप ठीक कहते हैं …….. अब माननीय चंदनजी से दो छोटे से प्रश्न पूछे जिससे उनके विषय पर चर्चा को बढ़ाया जा सके न तो उन्होंने ही कोई जवाब दिया और जो ताल थोक कर मैदान में सबको चैलेंज कर रहे थे वो अलीन जी भी गायब हैं खैर ……… हो सकता है प्रश्नों के उत्तर ढूंढ रहे हों

munish के द्वारा
June 29, 2012

प्रिय चन्दन जी हिंदुत्व सर्व धर्म समभाव की बात तो करता है परन्तु आपने ये स्पष्ट नहीं किया की हिन्दू – हिन्दुत्व के आधार पर धर्म की परिभाषा क्या है इसलिए किस तरह के धर्म के साथ समभाव रखना है वो स्पष्ट हो जाएगा …….! फिर ज़रा चर्चा आसानी से हो सकेगी. आपके इसी लेख के एक कमेन्ट में श्री मान अनिल ” अलीन” जी ने आर एस एस जैसे संगठनों पर प्रतिबन्ध लगाने की बात की है , आर एस एस पर सरकार पहले भी तीन बार प्रतिबन्ध लग चुका है और हर बार कोर्ट ने प्रतिबन्ध को हटा दिया तो क्या आप भारतीय न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ फिर से प्रतिबन्ध चाहेंगे …….. एक और प्रश्न मंच के इतिहासकारों से की कब इस भारतभूमि के लोगों ने बाहर से आये लोगों का विरोध नहीं किया या कब वो उनके साथ मेल मिलाप से रहे …….. आगे की चर्चा इन समाधानों के बाद

    June 30, 2012

    मनीष जी, प्रतिबन्ध होना और प्रतिबन्ध हुआ था दोनों दो बाते हैं…………..मैं यहाँ बस इतना कहना चाह रहा हूँ कि यह संगठन दागदार होकर भी बेदाग साबित होते रहते हैं……………व्यवस्था कोई भी उससे पहले मानसिकता को समझना होगा. क्योंकि चलाने वाला मन ही होगा…………..और हरेक व्यवस्था उस क्षेत्र के भूगोल, परिस्थिति और मानसिक स्थिति पर निर्भर करती हैं…………….किताबों और ग्रंथों की बात नहीं कर रहा हूँ . मैं अपना विश्लेषण बता रहा हूँ………….. और मैं समझता हूँ कि सच्चाई इससे अलग नहीं होगी……………..!

    munish के द्वारा
    June 30, 2012

    अनिल जी मैं ये तो नहीं जानता की आप किस श्रेणी के विश्लेषक हैं लेकिन हर विश्लेषक अपने विश्लेषण को सत्य या सत्य के करीब ही मानता है…….. आपने आर एस एस के विषय में विश्लेषण कब किया ये जानना महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इस कांग्रेसनीत सरकार से पूर्व कांग्रेसी नेताओं ने चाहे वो सरदार पटेल हों या पंडित नेहरू, शास्त्रीजी स्वयं महात्मा गांधी और डॉ आंबेडकर तक ने आर एस एस को देशभक्त संगठन माना था पूर्व प्रधानमन्त्री पी वी नरसिम्हाराव ने भी आर एस एस के विषय में कभी कोई टिप्पड़ी नहीं की हो सकता हैं उन लोगों का विश्लेषण आप के विश्लेषण से ज्यादा दूर हो…… ! परन्तु आपके विश्लेषण से ये बात तो स्पष्ट हो जाती है की आर एस एस के विषय में कुछ भी नहीं जानते, या जानना ही नहीं चाहते एक पूर्व नियोजित धारणा पहले से बना रखी है

    July 1, 2012

    मुनीश जी, वो आप जैसे लोग है जो धरनाओ और दूसरों की कहीं बातों पर यकीं करते हैं…………….मैं आखों देखीं पर यकीं करता हूँ………….और RSS में एक साल रहकर अच्छी तरह जन चूका उसे……………..

    munish के द्वारा
    July 2, 2012

    आदरणीय अनिल जी अब ये तो आपने स्पष्ट कर ही दिया की आप भी स्वयंसेवक हैं, भले ही इस समय आप सक्रिय न हों, लेकिन आप जब तक निष्काम भाव से नहीं जुड़ेंगे आपको विकार ही नज़र आयेंगे …….. एक साल रहकर भी आप आर एस एस को नहीं समझ सके तो इसका सीधा सा अर्थ है की आर एस एस से जुड़ते समय कहीं न कहीं आपका कोई निजी स्वार्थ भी था जो पूरा न हो सका …………. ! वर्ना जब इतने महापुरुषों को वो संगठन देशभक्त लगा तो आपको क्यों कर उसमें विकार नजार आया……. ! इसका अर्थ है की आपमें धैर्य की भी कमीं है तो फिर विश्लेषण भी जल्दबाजी में ही किया होगा

    July 2, 2012

    जी, जब मैं rss से जुड़ा तो उस समय मेरी उम्र १४ की हो रही थी और मुझे यह भी पता नहीं था कि इस भारत में कोई सांप्रदायिक संगठन भी हैं जो हमारे बीच नफ़रत पैदा कर रहे हैं और देश भक्ति के नाम पर देश द्रोहिता कर रहे हैं. जब मैं इससे से जुड़ा तो बस इतना ही मुझे बताया गया था कि यह एक सामाजिक संस्था हैं जो समाज सेवा कर रही हैं और इसके सदस्य स्वयम सेवक हैं………….वो तो उसमे शामिल होने के बाद पता चला कि उसके अधिकतर सदस्य राष्ट्र द्रोही हैं और खुद उन्ही के मुंह से उनके कुकर्मों को सुना और देखा उस नफ़रत के बीज को जो वो इस देश में बो रहे हैं…………! महमूद गजनवी, ओसामा बिन लादेन जैसे लोग भी अपनों के नज़र में क्रन्तिकारी और देश भक्त हैं………..और यह स्वार्थ ही हैं मेरा नहीं बल्कि आप जैसे लोगों का जो यक़ीनन इस दुनिया में सबसे अधिक हैं और यही कारण हैं चारों तरफ अशांति और अधर्म का……………….

    munish के द्वारा
    July 3, 2012

    आदरणीय अनिल जी, आप १४ वर्ष की आयु में आर एस एस से जुड़े और १ वर्ष में आपको सारी बातें समझ आ गयीं और आपने निर्णय कर लिया की ये देशद्रोही संगठन है आपके बचपने का निर्णय आप पर आज तक हावी है इसका सीधा सा अर्थ है की या तो आप अभी भी बचपन में ही जी रहे हैं, या आपके लिए तथाकथित किसी भी महापुरुष के विचारों का महत्त्व ही नहीं है इसीलिए आपने उस बचपने के विश्लेषण को उन महापुरुषों के विश्लेषण से अधिक महत्त्व दिया. और शायद इसीलिए आपने मेरे द्वारा दिए गए कुछ उदाहरणों पर चर्चा नहीं की क्योंकि आपको पता है की जाने अनजाने आपका विश्लेषण है तो गलत ही ……..! रही बात अशांति अधर्म की तो वो आप जैसे नासमझ लोगों के कारण है डरपोक लोगों की अहिंसा, अहिंसा नहीं कायरता है जो आँख मूँद कर हो रहे अन्याय और अधर्म को अहिंसा के नाम पर इसलिए सहते हैं क्योंकि उनके बसकी कुछ करना नहीं है और जो लोग कुछ कर सकते हैं वो अहिंसा का दामन केवल सम्मुख व्यक्ति को एक बार समझाने के लिए करते हैं जैसे महाभारत के युद्ध से पूर्व कृष्ण ने किया था या लंका युद्ध से पूर्व अंगद को दूत बनाकर भेजकर राम ने किया था ……….!

    July 3, 2012

    अपना सोच और सम्मान अपनी तबाही का सबक होता हैं…………..कमबख्त यह खुदगर्जी का जमाना भी अज़ब होता हैं………..ही ..ही…हे…..हे…..हो…हो…..!

    munish के द्वारा
    July 4, 2012

    आदरणीय अनिल जी, अब आप मुद्दों और तर्कों से हटकर इधर उधर की बातें कर रहे हैं इस लेख पर आपने एक दावा किया था की ……….”इससे पहिले कि मैं वाक्-युद्ध की रणभेरी बजाऊ, सभी सम्मानित, आदरणीय और माननीय ब्लागरों से विनती करता हूँ कि अपनी उपलब्धि को किसी तिजोरी में बंद कर दे. वरना फिर उनको मुझसे शिकायत रह जाएगी…….और जितना होमवर्क करना है कर ले ///////इतिहास से लेकर ग्रंथों तक …गीता से लेकर कुरआन तक ..और भूत से लेकर भविष्य तक ……………मतलब अपनी पूरी तैयारी कर ले ……………वरना मुझसे ज्यादा उन्हें खुद से शिकायत रह जाएगी…………!” अब जब हम चर्चा करने को तैयार हैं तो आप या आपके ब्लॉग लेखक चन्दन जी दोनों ने ही मेरे सामान्य से प्रश्नों के उत्तर अभी नहीं दिए जिसके आधार पर चर्चा करनी है हम कुछ तैयारी करें आपसे शास्त्रार्थ की …………. ! परन्तु आप भी दायें बाएं की बात ज्यादा कर रहे हैं और चंदनजी तो लौटे ही नहीं ………….. ;)

    Chandan rai के द्वारा
    July 5, 2012

    सभी मित्रो , धर्म कोई भी हो वह सभी के सद्भाव उत्थान प्रेमभाव की बात कहता है ,कोई धरम अत्याचार ,दुराचार ,आतंक को सही नहीं ठहराता ,उसकी नजर में सब समान है ======== जिस तरह अलाह या राम एक है उसी तरह जितने चाहे धरम मान लो सब धरम का मूल एक है , ———— हमारे देश में सभी संगठनों ,व्यक्ति ,संस्था को अपनी बात एक निश्चित दायरे या विरोध का एक सवेधानिक तरीका है , पर कोई भी व्यक्ति इस सीमा को लान्खता है तो उस पर अंकुश लगाना अनिवार्य है , और यदि उसकी प्रामिन्कता के सबूत हमारी न्याय प्रणाली उपयुक्त मानती है तो जरुर कारवाई होनी चाहिय , पर जिन संस्था का लेख में वर्णन है उनकी भाषा ,आचरण ,संवाद में एक सार्वजानिक दोष पाया गया !

    July 7, 2012

    मुनीश जी, यह तो हम दोनों के बैटन से ही स्पष्ट है कि कौन दायें की बात कर रहा है और कौन बाएं की………………..!

    munish के द्वारा
    July 9, 2012

    प्रिय चन्दन जी, सादर, आपने मेरे मूल प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया बल्कि ये समझाया की सब धर्मों के मूल में क्या निहित है मैंने किसी अन्य धर्म अथवा संगठनों के विषय में आपसे कोई प्रश्न नहीं किया और इस बात से निश्चिन्त रहे की इस तरह के तर्क से हमारे आपसी रिश्तों में कुछ तनाव आएगा बल्कि में हमेशा खुली बहस का समर्थक रहा हूँ ….. वो तो अलीन जी ने चैलेन्ज कर दिया है तो हम उतर आये मैदान में वर्ना तो हमारे अन्दर भी हिंदुत्व के कूट कूट कर भरे हैं कोई कुछ भी कहे – करे सोते ही रहते हैं ……. हाहाहा और अलीन जी आप भी दायें बाएं की बात छोड़ कर प्रश्नों का उत्तर दें………! वर्ना तो में आपके ब्लॉग पर एक कमेन्ट कम करूंगा हाहाहा

Avadhut के द्वारा
June 29, 2012

चंदनजी, लेख पढ़ कर लगा मानो आजकल हिन्दू होना एक गाली हो गई है. कटर हिन्दू होना तो इक महा पाप हो चला है. भाई साब पहले तो आपने दिमाक से ये फितूर निकालो के हिन्दू होना कोई गुनाह है. स्वामी विवेकानंद जी ने सिखाया – गर्व से कहो हम हिन्दू हैं. उस व्यक्ति ने जिसने सर्व धर्मं सभा मैं हिन्दुओं का मस्तक ही नहीं सारे हिंदुस्तान का सीर ऊँचा किया था. हमको जीने दो, और खुद बी जिओ, हमसे उलझाना छोड़ दो सारी उलझन मिट जाएगी. सब लोग याद रखे की हिंदुस्तान के लोग कभी नहीं गए बाहर दुसरे मुल्कों पर चढाई करने. लोग बहार से आये. और ऐसी बीस बेल बो कर गए की आज तक उसकी फसल हम सब काट रहे हैं. कभी कभी आक्रामकता ही बचाव का एकमात्र रास्ता होती है. चेतो भाई चेतो!!

    June 30, 2012

    जब यहाँ के लोग अपने ही भाइयों और बहनों को लूटने में लगे हुए थे तो दूसरों के पास क्या खाक जायेंगे…………और आज भी यह गन्दी मानसिकता का खेल चल रहा है और वह आप जैसे लोगों की बातों से स्पष्ट होता हैं………….हिंदुस्तान में रहने वाला हर शख्स हिन्दुस्तानी हैं…………..पर वो आप जैसी विचारधारा हैं जो न कभी शान्ति चाही और न ही शान्ति रहने दी. ऐसी विचारधारा का न कोई चेहरा है, न कोई धर्म है और न ही संप्रदाय……………बस स्वार्थ, वर्चस्व और भी बहुत कुछ……………….

pritish1 के द्वारा
June 27, 2012

हिंदुत्व का अर्थ सर्वत्र है……मुझे दुःख है की आज हमारा शिक्षित समाज ही हिंदुत्व को हिंसा, घृणा, जेहाद, आतंक और कट्टरपन से जोड़ता है………हिंदुत्व हमारी sristhi है हम हिंदुत्व को कैसे भूल सकते हैं………आवश्यकता है अंग्रेजी और वर्त्तमान की पश्चिमी शिक्षा को छोड़ वेदों पुरानों की ओर लौटने की………agyanta का अन्धकार अवश्य मिट जायेगा………

    June 29, 2012

    जी, कोई भी धर्म या अधर्म हिंसा, घृणा, जेहाद, आतंक और कट्टरपन से नहीं जुड़ा है. सब यह मानसिकता का खेल है……………यह सब स्वार्थ और वर्चस्व की लड़ाई है……………….

Punita Jain के द्वारा
June 27, 2012

चन्दन भाई जी, आज आपने जागरण फोरम की तरह सवाल उठाया है, हिन्दुत्व को कसौटी पर परखना चाहा है | धर्म तो हमें प्रेम, दया, करुणा और जियो व जीने दो का सन्देश देता है | किसी भी धर्म के नाम पर हिंसा, घृणा, जेहाद, आतंक और कट्टरपना सर्वदा निंदनीय है |

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 27, 2012

चन्दन भाई इस विषय पर बहुत ही गहन अध्ययन की आवश्यकता है….आपका लेख सराहनीय है…. सर्वप्रथम हिन्दू शब्द एक समय किसी धर्म का परिचायक न होकर सिर्फ एक क्षेत्र विशेष में रहने वाले लोगों की पहचान से जुड़ा हुआ था…हिंदुत्व शब्द उनके आचरण को संबोधित करता है…और हिन्दुओं का आचरण सदा से ही उदारवादी रहा है…उन्होंने प्रत्येक विदेशी का अपनी भूमि पर हमेशा स्वागत किया, किन्तु जब उन विदेशियों ने ही उनका शोषण करना शुरू किया तब हिदुओं ने उनका विरोध किया….इस प्रकार असली हिन्दू वह है जो किसी धर्म विशेष या जाति विशेष का विरोध न करके बुरे कार्य और उन्हें करने वाले निश्चित लोगों का विरोध करे न की पूरे के पूरे सम्प्रदाय का विरोध…प्रत्येक मनुष्य प्रकृति का एक अभिन्न अंग है और उसे इस संसार में कहीं भी तब तक रहने का अधिकार होना चाहिए जब तक वह प्राकृतिक विधि(नैतिकता) के विरुद्ध कोई आचरण न कर रहा हो…..इस विषय पर आपका लेख सराहनीय कदम है…

    June 29, 2012

    समीर साहब! क्या है…. क्या नहीं है ,……………क्या असली है और क्या नकली है…………….हमें इससे ऊपर उठाकर सोचना होगा…………परिस्थतिया, भूगोल और मानसिकता का अध्ययन करने के बाद ही………यह सब समझ में आएगा कि आखिर यह खेल क्या है……………………? इसमे कोई विशेष समूह दोषी या निर्दोष नहीं है……………………..

Mohinder Kumar के द्वारा
June 27, 2012

चंदन जी, सारपूर्ण लेख के लिये बधाई… निश्चय ही यदि हिन्दुत्व या हिन्दुवा अगर मानवता का दूसरा रूप हो तो किसी को भी इसे मान्यता देने में कोई गुरेज नहीं होगा. बात सिर्फ़ कट्टरपन की है और कट्टरपन किसी भी रूप में किसी भी जाति धर्म या समप्रदाय के लिये हितकर कभी नही होता…. लिखते रहिये.

    Chandan rai के द्वारा
    June 27, 2012

    मोहिंदर साहब , यही मैंने अपने आलेख में कहना चाहा की ,हमे मिल जुल कर सभी धर्मो का सम्मान करना चाहिय ,पर कुछ संस्थाए हमारी सोच को गलत तरीके से बादनाम कर रही है आपके मनोभाव के लिए आपका शुक्रिया !

Santosh Kumar के द्वारा
June 27, 2012

“हिंदुत्व” शब्द हिन्दुस्तान के एकजुट राष्ट्रनिर्माण और उसकी अखंडता और एकता ,संस्कृति के अथाह संकल्प को परिलक्षित करता है !………. चन्दन जी ,..सादर नमस्कार बहुत अच्छी भावना से लिखे गए लेख के बावजूद आप पूर्वाग्रह और पक्षपाती द्रष्टिकोण से नहीं बच पाए … मूरख के विचार से हिन्दुत्व :..एक सामजिक उत्प्रेरक और सर्वहिताय राजधर्म होना चाहिए ,… दुर्भाग्य से आज एसा नहीं है ,..परन्तु पहले यही था ,…और कभी यही होगा ,..हार्दिक आभार

    Chandan rai के द्वारा
    June 27, 2012

    संतोष जी , जन्हा तक आपके विषय में जान पाया था की आप देश सेवा में लगे हुए हैं ,सही कहूँ तो में जानना चाहता था की एक देशभक्त इसके विषय में क्या राय रखता है ,यूँ तो मुझे पहले से आपकी भावना का अनुमान था ,पर आप ने खुले सार्वजनिक रूप में अआपने अपने अंतस की निर्मल भावना से मुझे आप पर ताउम्र नाज करने करने अवसर दिया !

    June 29, 2012

    कौन कह दिया आपसे कि पहले ऐसा ही था !……वेद, ग्रन्थ, पुराण या इतिहास ……………! फिर से पढ़िए और विश्लेषण कीजिये……………………यदि सर्वहिताय धर्म था तो इतने युद्धों से क्यों गुजरा……………………! मैं बस इतना कहना छह रहा हूँ कि उजाला और अँधेरा कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा,,,,,,,,,,,,,,,यह आपको और हमको सोचना है कि उजाले के साथ रहना है या अँधेरे के साथ……………..इस तरह से मुर्ख बनने से काम नहीं चलने वाला………………….!

Rajesh Dubey के द्वारा
June 27, 2012

किसी भी धर्म का उद्देश्य सुन्दर समाज के निर्माण का होता है. धर्म जीवों से नफरत नहीं करता. धर्म गड़बड़ तब हो जाता है, जब धर्म की व्याख्या करने वाले गलत लोग होते हैं. बहुत लोगों को भ्रम हो जाता है कि धर्म उनकी बपौती है और धर्म की ठीकेदारी की जिम्मेवारी उन्ही की है.

    Chandan rai के द्वारा
    June 27, 2012

    दुबे साहब , आप जैसे अनुभवी प्रकांड विद्वान् के द्वारा दी गई धर्म की परिभाषा से सम्भवत भटके लोगो ला मार्गदर्शन हो जाए ! आपकी मार्गदर्शक विचारों के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया !

seemakanwal के द्वारा
June 26, 2012

कोई भी धर्म कट्टरता नही सिखाता है ये तो इंसानों ने अपनी सुविधानुसार तोड़ -मरोड़ दिया है .आप ने एकदम सत्य लिखा है .

    Chandan rai के द्वारा
    June 27, 2012

    सीमा जी , आपकी कविताओं की तरह आपके विचार भी शुद्ध और निर्मल है , आपके विचारों के लिए आपका शुक्रिया !

rekhafbd के द्वारा
June 26, 2012

आदरणीय चन्दन जी ,हिंदु धर्म सर्वहिताय राजधर्म ही है न किएक साम्प्रदायिक उत्प्रेरक ,हमारा धर्म मानवता का उपदेश देता है ,मानवता ही परम धर्म है और यह साम्प्रदायिक हो ही नही सकता ,हाँ कुछ लोग अपने फायदे लिए आम लोगों को बांटने का काम करते है , मेआदरणीय भ्रमर जी कि बातो से सहमत हूँ ,आभार

    Chandan rai के द्वारा
    June 27, 2012

    रेखा जी , आपके विचार आपकी सुन्दर कथाओं के नैतिक मूल्यों के संदेस से ही जगमगा रहे है , यूँ तो क्षेत्रवादी नहीं हूँ ,पर एक फरीदाबादी दुसरे अग्रज फरीदाबादी की सोच पर फक्र मह्सुश करता है , आपकी सोच को सलाम !

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
June 26, 2012

प्रिय चन्दन जी ये ज्वलंत मुद्दे हैं ..सच में देखिये तो मानव धर्म ही हम सब के लिए हितकर है ..हम हिन्दू हैं वो मुस्लिम हैं तो है सब धर्म कुछ न कुछ क्या बल्कि सभी अच्छी बातें सिखाता है ये बात अलग है की हम उसे किस तरह से लेते हैं ..हिंदुत्व..हिन्दू धर्म बुरा नहीं है बहुत सहन शील है मानवता को लेकर चलता रहा है सहिष्णु रहा है अब इसे लेकर राजनीति करें लोग एकजुटता कर नेतागिरी कर तो बुरा हो ही जाता है कभी कभी जब कोई एक धर्मं अन्याय करता दिखाई देता है तो दूजा उसे सामने ला एक वाद मुस्लिमवाद हिन्दू वाद बना लेता है ..कभी कभी ये अपनी रक्षा के लिए जरुरी भी देखा गया है कभी अति हो जाती है तो हानि ऐसे मुद्दे छेड़ने से अंत नहीं है … आइये मानव धर्म अपनाएं सब को मित्र बनायें भाई चारा रख स्थिति को देखते हुए प्यार बरसाने का यत्न करें सुन्दर जानकारी दी है आप ने … भ्रमर ५

    Chandan rai के द्वारा
    June 27, 2012

    भ्रमर साहब , आप जैसे अग्रज की मानवतावादी भावना पढ़ कर महशुश होता है की भारत की एकता अभी विभाजित नहीं सकती ! आपकी व्यक्तिगत सोच एक राष्ट्रिय हितार्थ लिए हुई है , आपकी इस उदारवादी सोच के लिए मेरे पास शब्द नहीं है

meenakshi के द्वारा
June 26, 2012

Chandan जी, ” हिंदुत्व ” का अर्थ आपने समझा तो दिया पर न समझ वालों को समझ में आने से रहा..मुझे भी बड़ी हैरानी होती है … कि.. भारतवासियों ..हिन्दुस्तानियों के खून में …अब ..वो बात क्यों नहीं…? एक बहुत ही महत्व पूर्ण विषय में आपने लिखा … बहुत-२ शुभकामनाएं.. मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Chandan rai के द्वारा
    June 26, 2012

    मिनाक्षी जी , इक महिला और भारतीय होने के नाते मुझे आपकी विचारधारा पर गर्व है , आपकी विचारणीय उपस्थिति मेरे विश्वाश को मजबूत कर रही है , आपका हार्दिक धन्यवाद !

yogi sarswat के द्वारा
June 26, 2012

राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ, बजरंग दल,सनातन संस्था , कुछ ऐसे संगठन है ,जो समय समय पर अपनी हिंदूवादी सोच के लिए हिंदुत्व के लिए इक शर्मनाक उदाहरण के रूप में चिन्हित हुए है ! मित्रवर चन्दन जी , आप अगर उदहारण देकर समझाते की किस तरह से ये संगठन आपको श्रम महसूस करवाते हैं तो बेहतर होता ! मैं आपकी इन बातों से बिलकुल भी सहमत नहीं हूँ , क्योंकि मुझे लगता है ये सब राष्ट्रीयता से ओतप्रोत , राष्ट्र हित में ही काम करने वाले संगठन हैं ! कभी वक्त मिला तो और भी स्पष्ट लिखूंगा इस विषय पर !

    Chandan rai के द्वारा
    June 26, 2012

    योगी मित्र , मेरे ही आलेख में उनका विवरण दिया है ,काश आप उसे देख पाते ! अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद ध्वस्तीकरण ,गुजरात में गोधरा काण्ड ,मालेगांव ब्लास्ट , मडगांव ब्लास्ट, इत्यादि बहुते उदहारण है , पर में हिंदुत्व पर चर्चा करना चाहता हूँ इसलिए मैंने इसे ज्यादा विस्तारित रूप नहीं दिया ! पर आप इस तरह दो टूक आक्षेप कर अपना पल्ला नहीं झाड सकते ! मुझे तो बस इस विषय पर एक भारतीय की राय जाननी है बस !

    June 29, 2012

    आपके लगाने और न लगने से सच्चाई छुप नहीं जाएगी……………………और न ही छुपाने से ! यदि सिमी जैसे संगठन असामाजिक समूह थे तो निश्चय ही यह सब भी है पर आज तक इन पर रोक क्यों नहीं लगा…………..स्वाभाविक सी बात है कि इनकी संख्या समाज और हरेक व्यवस्था में अधिक है और कोई भी व्यवस्था खुद को दोषी कैसे ठहरायेगी……..! हमारे देश में सांप्रदायिक हिंसा होते थे . परन्तु विस्फोट नहीं …………क्या कारण है कि RSS जैसे संगठन का इसराइल से युद्ध प्रशिक्षण लेने के बाद हिंदुस्तान में विस्फोट होना शुरू हुआ. स्पष्ट है कि बहुतों विस्फोटों में इन सबका का हाथ है……और इससे पुरे मुस्लिम कौम को जोड़ा गया ताकि उन्हें बदनाम किया जाय .! उन्हें या तो देश के बाहर निकला जाय या फिर उन्हें अपने अधीन किया जाय. मैं दुसरे मुल्कों की बात नहीं करना चाहता क्योंकि फिलहाल बात हिन्दुस्तान की हो रही है तो हिंदुस्तान की करूँगा. और हिंदुस्तान में अधिकतर आतंकवादी बनते नहीं बल्कि बनाये जाते हैं……………एक विशेष कौम को जान बुझकर उकसाया और भड़काया जाता हैं ताकि वो कोई गलत कदम उठाये और उन्हें दोषी ठहराया जाय…………….और यह सब मैं अपने आखों से देखा हूँ> यहाँ तक कि यदि उनका जुलुस निकलता है तो उनके द्वारा लगाये गए नारे को तोड़-मोड़कर पेश किया जाता तथा इसे असामाजिक और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से जोड़ा जाता हैं…………! मैं किसी भी समाज विशेष के विरोध में नहीं बोलना चाहता पर यदि कोई खुद को अच्छा या बेहतर प्रस्तुत करने की कोशिश करेगा तो मुझे हकीकत प्रस्तुत करना ही पड़ेगा……..! हकीकत तो यह है कि आज जो कुछ भी है ….यह सिर्फ वर्चस्व और स्वार्थ की लड़ाई है …………….यहाँ शांति, प्रेम, भाईचारा, उदारता चाहता कौन है और यदि चाहता है तो इस शहर की हालत ऐसी क्यों है………….. फिलहाल एक लिंक दे रहा हूँ उसपर जाइये ………….. http://merisada.jagranjunction.com/2012/01/29/%E0%A4%90-%E0%A4%85%E0%A4%A6%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%8B/

utkarsh singh के द्वारा
June 26, 2012

बोल गए सच तो फिर भोगो ! तैयार हो जाइए देशद्रोही , छद्मधर्मनिरपेक्षतावादी आदि-आदि विशेषणों से विभूषित होने के लिए | अब एक अति का जवाब दूसरी अति है , कम से कम बहुसंख्यक पढ़ा – लिखा समुदाय ऐसा ही मानने लगा है | मुझे लगता है कि यह प्रयोग भी संभव हो जाए तो अच्छा होगा ( यधपि अभी दूर की कौड़ी दिख रही है ) ,भारतीय लोकतंत्र इतना सुदृढ़ है कि इससे भी उबर जाएगा पर किस कीमत पर कोई नहीं जानता |

    Chandan rai के द्वारा
    June 26, 2012

    उत्त्कर्ष मित्र , आज हमारी वफादारी राष्ट्र के प्रति कम और किसी व्यक्ति विशेष और संस्था के प्रति ज्यादा हो गई ! आपकी बाते हकीकत के नजदीक हैं ,हम में से अधिकतर कहने वाले कुछ और , मानने वाले कुछ और और करने वाले कुछ और है ,सचमुच यह दूर की बात है जब अलगावबाद इतना विस्तार रूप लिए हो , पर एक और बात भारतीय समाज आज भी उन्ही रुढ़िवादी जातपात धर्म वर्ग के भेदभाव को खिचे जा रहा है , मित्र आपकी बातो से में शत प्रतिशत सहमत हूँ

June 26, 2012

कुछ व्यस्तता के कारन बहुत से ब्लॉगों तक नहीं पहुँच पा रहा था और पहुंचा भी तो सब जगह से घूमकर इस ब्लाग पर मेरे कदम रुक गए…………..अब तो जो कुछ भी होगा अगले दो-चार दिनों तक इसी ब्लॉग पर होगा…….. इससे पहिले कि मैं वाक्-युद्ध की रणभेरी बजाऊ, सभी सम्मानित, आदरणीय और माननीय ब्लागरों से विनती करता हूँ कि अपनी उपलब्धि को किसी तिजोरी में बंद कर दे. वरना फिर उनको मुझसे शिकायत रह जाएगी…….और जितना होमवर्क करना है कर ले ///////इतिहास से लेकर ग्रंथों तक …गीता से लेकर कुरआन तक ..और भूत से लेकर भविष्य तक ……………मतलब अपनी पूरी तैयारी कर ले ……………वरना मुझसे ज्यादा उन्हें खुद से शिकायत रह जाएगी…………! और हाँ मैं नहीं चाहता कि कोई कायरों और बुजदिलों की तरह यह मैदान छोड़कर जाएँ……….और अपने नापाक इरादों को लेकर समाज और देश में नफ़रत का बीज बोता रहे क्योंकि अब बहुत हो चूका गन्दी मानसिकता का खेल …………खुद को हिन्दू, मुस्लिम, सिख ईसाई कहकर मानवता को रौदने वालो बेशर्मो और बेर्लाज्जों सावधान………………….अब और हिन्दू, मुस्लिम का रोना बंद करों………………….अलीन…………

    June 26, 2012

    आदरणीय अशोक जी, भरोदिया जी, दिनेश जी, सतीश जी, विक्रम जी, अजय जी और जागोजागोभारत …….. आप सभी तैयार रहे …………..हाँ एक विनती जुरूर कहूँगा कि स्वार्थ और निज-हित को छोड़कर मैदान में उतारियेगा वरना आप सभी को खुद से शिकायत रह जाएगी……………!

    Chandan rai के द्वारा
    June 26, 2012

    अनिल मित्र , मुझे आपके क्रांतिकारी विचारो को पढ़कर बड़ा ही आनंद मिला , आपकी मानसिकता किसी झूठे दंभ को नहीं ओढ़ती, सबसे ज्यादा प्रसन्ता इस बात की आज का इक युवा ऐसी खुली सोच रखता है , मुझे लगता है हम सभी के मुस्लिम मित्र जरुर होंगे , फिर कैसे हम मुस्लिम विरोधी बात रख सकते है !

akraktale के द्वारा
June 26, 2012

चन्दन जी नमस्कार, मैंने आलेख के साथ ही प्रतिक्रियाएं भी पढ़ीं कई पाठकों ने प्रतिक्रया में गुस्सा जाहिर किया है. साफ़ कारण है की हिन्दुस्तान में बार बार हिन्दू की ही क्यों परिक्षा ली जाती है क्या हमारे देश में मुसलमानों को हिन्दुओं के क़त्ल की खुली छुट मिली हुई है और हिन्दुओं को उसमे उफ़! तक कहने का हक़ नहीं है? मै किसी की धार्मिक भावना को नहीं भड़का रहा हूँ किन्तु हमारे देश में धर्मनिरपेक्षता का सम्पूर्ण आभाव है और इसी कारण बार बार सहिष्णु धारावादी हिन्दुओं को ही नसीहत दी जाती है और इसके परिणाम भी सामने हैं. पिछले कई दिनों से मै देख रहा हूँ मोदी के नाम पर गुजरात दंगो को ही सिर्फ याद किया जाता है गोधरा में हुए हिन्दुओं के क़त्ल को भुला दिया जाता है. एक आँख खोलकर कोई भी शिकारी शिकार ही करता है दुनिया को सही नजरिये से देखना है तो फिर दोनी आँखे खुली रखनी होगी. राजनैतिक दल देश में अपने निजी स्वार्थों के वशीभूत होकर सिर्फ वैमनस्यता ही फैला रहे हैं. हम सामान्य नागरिक भी उनमे शामिल हो कर हिंदुत्व और मुस्लिमत्व की बातें करने लगे तो देश के नागरिकों का जीवन ही नरक हो जाएगा. इसलिए यदि बात करनी है तो सर्वधर्म समभाव की बात करें वाही उचित होगा.

    Chandan rai के द्वारा
    June 26, 2012

    अशोक जी , मैंने यही माना है और यही लिखने का उद्देश्य भी की हिन्दुस्तान का हिंदुत्व सबसे उदारवादी सोच है और कर्म है , यदि हम पर कोई आक्षेप करता है तो क्या हम उदारवादी सोच त्याग दे ,हम भी अशभय ,दुराचारी कार्य में सम्मिलित हो जाए ,आज जब विश्व हमारी जैविक विविधतता के पश्चात हमारी राष्ट्रिय एकता का उदाहरण देता तो क्या हम उसे खंडित कर दे , यदि कोई मुस्लिम विरोधी बात कहता है ,वो भी चंद आतंकवादिओं के कारन तो जरा वह इतिहास और अपना मन खंगाल ले की भारत को आजादी दिलाने वाले क्रान्तिकारिओन में मुस्लिम सामान रूप से सहभागी थे , और इसी सनुचित मानसिकता ने देश को बाट दिया ,और समय पर दंगों का घात ,आतंकवाद इसी अलगाववादी रुग्न सोच का नतीजा है , मे अपनी कविता के दो पंक्तिया कहना चाहूंगा , कौन कहता है लहू मत उबालो ,म्यान से तलवार न खींचो , में कहता हूँ मेरे भाई जन्हा देखो मुहब्बत ,अदब से सर झुका लो !

bharodiya के द्वारा
June 25, 2012

चन्दनभाई नमस्कार आप हिन्दुत्व, हिन्दु विचारधारा जैसे विभाग बना रहे हो । दोनों अलग चीज नही है । विचारधारा ही धर्म है । हिन्दुत्व को फालतु में ही सराहा जा रहा है । ईस ने आदमी को आत्मरक्षा का मूलभूत पाठ ही नही सिखाया है, बस, मार खाना सिखाया है । कुदरतने भी सभी प्राणीयों को आत्मरक्षा के लिये कुछ ना कुछ दिया है । गधे-घोडे को मजबूत पैर दिये हैं । संकट समय ऐसी लात मारता है की दुश्मन दोबारा नजदिक नही आता है । हिन्दु तो गधों से भी गया ।

    Chandan rai के द्वारा
    June 26, 2012

    भरोदिया जी , विचारधारा धर्म है , गर वो राष्ट्रिय धर्म है तो ठीक है ,गर वो सम्प्रादयिक धर्म तक सिमित है तो आप किसी भी कीमत पर एक उन्नत राष्ट्र की कल्पना नहीं कर सकते , किसने कहा की इश्वर ने सहना सिखाया ,हमारा इतिहास गवाह है की राम ने यही शश्त्र उठाये थे , आप पुरे हिन्दू समाज पर अपशब्द का तल्ख्तर आक्षेप कर रहे है ,जो कटाई सही नहीं है , राष्ट्रवादी बनिय , धर्मवादी नहीं !

    June 28, 2012

    सतीश सर को जो कमेन्ट दिया हुआ ……पढ़ लीजिये और पूरा इतिहास का विश्लेषण कर लीजिये गलतफहमी दूर हो जाएगी…………..मैं तो कहता हूँ इतिहास को छोडिये आज को पढ़िए ……अरे आज को छोडिये अब को पढ़िए………..! यह सब मानसिकता का खेल है …..बेहतर होगा कि हम हिन्दू-मुस्लिम कि बजे मानसिकता से लड़े ………..

dineshaastik के द्वारा
June 25, 2012

चंदन  जी, नमस्कार,  हिन्दुत्व के  विचार हमें महान  तो बनाते हैं, साथ  ही  गुलाम  भी बनाते हैं। हजारों वर्ष  तक  हम  इसी सोच  के कारण  गुलाम  बने रहे। मैं हिंसा का समर्थन नहीं कर रहा, लेकिन  यह भी स्वीकार नहीं कर सकता कि कोई हम  पर अत्याचार करता रहे और हम  अपने मूलभूत  विचारों तथा सिद्धांतों की दुहाई देकर चुप रहें। मैं यह भी नहीं कहता कि प्राचीन  काल  मैं हम  पर जो  अत्याचार  किये गये उनका बदला लिया जाय। मेरा तो यही कहना कि अब  हमें हिन्दुत्व की दुहाई देकर कायर न बनाया जाय। मुझे इतिहास  में  कहीं भी नजर नहीं आता कि धार्मिक  हिंसा की शुरूआत  हिन्दुओं ने की हो। हमारा इतिहास  बहुत  दर्दनाक  है।  मैं हिन्दुवाद  का कतई समर्थन  नहीं करता, किन्तु मुस्लिम  तुष्टिकरण  की नीति का खुलकर  विरोध  करता हूँ।  आपने जिस  तरह का आलेख  लिखा है, क्या किसी मुसलमान में इतना सामर्थ  है कि  इस्लाम  के संबंध  में इस  तरह का आलेख  लिख   सके। तुरन्त फतवा जारी हो जायगा। हो सकता है कि उसके कत्ल का भी फऱमान  जारी हो जाय  तथा फतवा और  फरवान  जारी करने वाले को दिग्गी, मुलायम , नितीश  तथा लालू आदि की पार्टी से टिकट भी मिल जाय। क्या यह शर्मनाक  नहीं है? बहुसंख्यक  हिन्दु दूसरे धर्म  का अपने धर्म  जितना सम्मान करते हैं। किन्तु क्या आप अन्य धर्मालम्बियों के बारे में ऐसा दावे से कह सकते हैं? शायद नहीं।

    Chandan rai के द्वारा
    June 25, 2012

    दिनेश जी , मै हिंदुत्व के सैधांतिक मूल्यों की बात कह रह हूँ , जिसमे कायरता का होना या ना होना एल अलग पहलु है ,मै पहले ही लिख चुका हूँ की हमारे राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करना हमारे मूल उद्देश्य है ,फिर इसमें कायरता की कोई बात ही नहीं रह जाती , मै अल्पसंख्यकों के आचरण पर बात कर लेख के उद्देश्य से भटकना नहीं चाहता ,मै तो हिंदुत्व के दायित्व की बात कह रहा हूँ !इसलिय तो हिदुत्व सबसे उदार और श्रेष्ठ सोच है ! पर हां अल्पसंख्यकों के आचरण ,उनके जेहादी मूल पर ,गहन चर्चा की आवश्यकता है की आम जन का भ्रम दूर हो सके , क्यूंकि चंद लोगो ने मुजाहिदों की फितरत को बरगला उन्हें देश तोड़ने पर आमादा कर दिया है

    satish3840 के द्वारा
    June 25, 2012

    में दिनेश जी की बात से शत प्रतिशत सहमत हूँ / चन्दन जी से आग्रह हें क़ि वो इस तरह की विवेचना पूर्ण लेख अल्संख्यक अर्थात मुस्लिम वर्ग के लिए लिखें तो हम सभी को आटे दाल का भाव पता चल जाएगा / हिन्दू वो संस्कर्ती हें जिसने सभी धर्में का आश्रय किया चाहे वो मुस्लिम हो या इसाई / कुछ धर्म तो हिन्दू धर्म से विकसित हुए उसमें सिख , जेन , बोध्ध धर्म तो इससे धर्म की शाखा हें /

    Chandan rai के द्वारा
    June 25, 2012

    सतीश जी , देखीय मैंने ना तो हिन्दू विरोधी बात कहने का प्रयास किया है ,ना ही मुस्लिम हितो के पक्षधर होके बात रखी है , मैंने वाही कहना चाहा है की हमारा राष्ट्र हिन्दुस्तान सबसे उदारवादी विचारधारा हिंदुत्व को मानता है , इक तरफ आप लोग कहते है की आप हिंदुत्व को मानते है , पर दुसरे ही पल आप अल्प्शंख्यकों के विरोधी मनोभाव को रखते है , यह तो हमे हिंदुत्व नहीं सिखाता , जन्हा तक मुस्लिम पक्ष की बात है एक भारतीय होने के नाते यदि मुझे समय मिला तो अवश्य में अपनी बात रखूंगा !

    June 28, 2012

    भैया, हमें भी पता है कि हिन्दू कितना चुप थे और आज कितना चुप है. वैसे आप कब से हिन्दू बन गए. वो आज के pariwesh ko dekhkar saaf dikhta hai aur haa yah is blog par dikh raha hai aap sab ki udarata aur सहिशुनता. इतिहास मैंने भी पढ़ाहै और आज को बहुत अच्छा तरह से देख रहा हूँ………….जब हमारा देश धन-धन्य से परिपूर्ण था तो भला हम किसी दुसरे मुल्क में क्या ख़ाक छानने जायेंगे….! इतिहास को फिर से पढ़िए ………….यही खुद को हिन्दू कहने वाले आपस में लड़ते रहते थे और अपने भाइयों का क़त्ल आम किये. साथ ही स्वार्थ, परंपरा , उंच-नीच और इज्जत के नाम पर अपने ही माँ बहनों को जिन्दा जलाये और साथ ही उनकी इज्जत से खेले भी. अरे जब हमारे पास सबकुछ था फिर भी हम उसका सही सदुपयोग नहीं किये और अपनों को ही लूटे तो फिर भूखे और नंगे लोग आकर हमें लूटे गतो कौन सा बुरा कर दिए. आखिर धन, दौलत, जमीं और जोरू कौन नहीं चाहता. मुझे तो इसमे कोई बुराई नहीं लगती कि जो बाहरी लोग हम पर आक्रमण किये क्योंकि अपनी आवश्यकताओ के लिए कौन नहीं लड़ता………… एक चीज बताये ……यदि वो सभ असभ्य, जंगली और लालची थे तो हम सब क्या थे जो सब कुछ हमारे पास रहते हुए भी इतने नीच हरकत किये जो शायद ही कोई इतिहास में किया होगा………….. यदिबाहरी आक्रमण कारियों की जगह पर हिन्दू होते तो निश्चय ही ये भी वैसा करते परन्तु सामने से नहीं बल्कि पीछे से वार करते………..और भूख और हवस के मारे एक सगा बेटा अपने ही माँ और बाप को नहीं छोड़ता…………. अरे इतिहास की बात छोडिये…..आज को देखिये ……आज से ही स्पष्ट हो जायेगा कितना घिनौना चेहरा हैं…..हिन्दुओ का……! अब अपना कान बंद कर लीजिये और आखें खोलिए…………. …………………..और अंत में बस इतना ही कहूँगा कि हमेव हिन्दू-मुस्लिम से नहीं लड़ना है और नहीं कोई महान है और न ही बेहतर ……………..! इंसान अपने स्वार्थ और आवश्यकता के कारण यह सब कुछ करता जाता है…….यदि वास्तव में सुधार चाहते हैं हम लोग देश और समाज का तो हमें अपनी गन्दी मानसिकता से लड़ना होगा………………………और हाँ फतवा -मत्वा की बात छोडिये ………..जब हिन्दुओ की कोई एक सोच नहीं है और कोई एक विचार धारा नहीं तो ख़ाक फतवा जारी करेंगे…………..वेदों के अर्थों को अनर्थ निकालकर लाखों कारणों देवी देवताओ को स्वार्थ, डर और अज्ञान वश पूजने का काम करने लगे………………..और जो आप सम्मान की बात कर रहे हैं …वो आप लोग यहाँ सम्मान दिखा दिए हैं………..

    June 28, 2012

    सतीश सर! इतिहास गवाह है कितना आश्रय किये हैं हिन्दू. अपने ही भाइयों और बहनों को लूटने वाला दूसरो को आश्रय क्या ख़ाक करेगा………..हकीकत तो यही है कि जब किसी पेट भरता रहता है तो वह अपने ही लोगो से लड़ता है………….! वैसे भी भूखे और भरे की लड़ाई में भूखा ही जीतेगा……………क्यों? आप खुद समझदार है…………..

    vishnu के द्वारा
    June 30, 2012

    Bhaai Dinesh Jee, Chandan जी और अलीन जी ने हिन्दुओ की सुपारी ली है या हिन्दुओ के विरोध मै लिखने का पैसा मिलता है अगर नहीं तो मुस्लिम धर्म मे भी बुराई होंगी कभी उनके बारे मे लिखना मै मान जाऊँगा की तुम सचे समाज सुधारक हो I

    July 1, 2012

    यहाँ कौन कह दिया की मैं समाज सुधारक हूँ वो भी सच्छा…………….मैं तो न हिन्दुओ के खिलाफ लिखता हूँ और न ही मुस्लिमों के खिलाफ मैं उस विचारधारा के खिलाफ लिखता हूँ जो हिन्दू और मुस्लिम के आड़ में अपने स्वार्थ और वर्चस्व के लिए संसार में नफ़रत फैला रही. फिलहाल तो इस मंच पर देख रहा हूँ यह विचारधारा हिन्दू का मुखौटा पहनी हुई हैं तो स्वाभाविक सी बात हैं मुखौटा तो आप ही का हटेगा…………

jyotsnasingh के द्वारा
June 25, 2012

प्रिय चन्दन जी, आपने सच कहा कोई भी धरम हमें असहिष्णुता नहीं सिखाता ,हिंसा नहीं सिखाता ,सभी दया,सहिष्णुता,और अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं फिर धर्म के नाम पर ये क्रूर खेल क्यों खेले जाते हैं ,क्यूँ बदले के नाम पर निर्दोष बच्चों महिलाओं और पुरुषों की बलि चढ़ा दी जाती है,मुझे तो लगता की सभी धर्मों के असामाजिक तत्वों ने धर्म के नाम को हथियार बना लिया है अपने नापाक इरादों की पूर्तिके लिए.

    Chandan rai के द्वारा
    June 25, 2012

    ज्योत्सना जी , आपके विचारों को जान्ने के बाद मुझे ज्ञात हुआ की आपके विचार राष्ट्रवादी हैं , आज देश को ऐसी ही मानसिकता की आवश्यकता है , एक तरफ हम हिन्दू मुस्लिम भाईचारे का दंभ भरते है और दुसरे ही पल सांप्रदायिक बात को तूल देते हैं आपके विचारों से पुर्णतः सहमत !

snnsharma के द्वारा
June 24, 2012

हिन्दू का मतलब है जो अपनो की टांग खीचे दूसरो की गुलामी करे जैसे म.क.गान्धी अपना हित साधे  देश व धर्म भाड मे जाय

    Chandan rai के द्वारा
    June 25, 2012

    मित्र , बहुत ठीक कहा आपने ऐसे हित साधना जिसमे देश गुलामी से आजाद हुआ ,भारत ने एक नव शुरुआत की , ऐसे हित साधने वाले गाँधी जी को मेरा बारम्बार नमन ! और आप खुद अपनी पहली कही बात का बहुत बड़ा उदहारण है !

    June 28, 2012

    महात्मा गाँधी नहीं बल्कि आप जैसे सोच वाले लोग अपने स्वार्थ के लिए कभी समाज और देश का भला न किये और न ही करने दिए ………….और यहं सिलसिला आज भी चल रहा है……………

    snnsharma के द्वारा
    June 30, 2012

    14-4-2012 का वासुदेव त्रिपाठी का आालेख पढो पता लग जायेगा म क गान्धी हिन्दुओ का कितना बुरा कर  गया साथ ही डा. अम्बेदकर का भारत का विभाजन पढो.अधूरे ज्ञान से आलेख लिखना कोई मतलब हल नही करता गान्धी डोमीनियन स्टेट पर राजी था धन्यवाद मि.चन्दन

    June 30, 2012

    आप जैसे लोगो की मानसिकता काफी है मुझे सच्चाई तक पहुचने के लिए……………जहाँ वासुदेव जी की कलम रूकती हैं वहां से मेरी कलम शुरू होती हैं…………..

    Shivendra Mohan Singh के द्वारा
    July 3, 2012

    बिलकुल ठीक कहा अलीन जी …. जहाँ से वासुदेव जी की कलम रूकती है वहीँ से आपकी शुरुआत होती है और तथाकथित शर्मनिरपेक्ष लोगों के तलवे तक जाती है…. सदभाव और शांति के पाखंड का अच्छा बजा बजा लेते हैं. गाल बजाने में आपका जवाब नहीं .

dharamsingh के द्वारा
June 24, 2012

अब तक पढे गये बलागो मे सबसे घटिया आलेख है कहीं कांग्रेस के एजेंट तो नही

    Chandan rai के द्वारा
    June 25, 2012

    मित्र , मैंने लेख को भरसक संतुलित रखने का प्रयास किया है , मैंने किसी राजनेतिक पार्टी का विवरण भी नहीं दिया , और हाँ एल भारतीय होने के नाते मैंने अपने विचार रखे है ,मै अपने भारत का एजेंट हूँ ,गुलाम हूँ , और आपके भारतीय नजरिय का सम्मान करता हूँ, पर यदि आप इस घटियापन पर व्याख्या कर पाते तो मेरा मार्गदर्शन हो जाता !

    June 27, 2012

    घटिया आपकी सोच है…………..

    June 27, 2012

    घटिया, आपकी सोच है…………..

jagojagobharat के द्वारा
June 24, 2012

चन्दन जी हिंदुत्व एक जीवन पद्दति है ना की कोई धर्म और ऐसा आप अपने लेख में स्वीकार भी करते है की हिंदुत्व कभी तोड़ने की बात नहीं करता तो आज के तथाकथित धर्म निरपेक्षो को इससे डर क्यों लगता है .सिर्फ मुसलमानों का १५ फीसदी वोट प्राप्त करने के लिए पूरी की पूरी हिन्दू संस्कृति को ही कटघरे में खड़ा करना क्या जायज है चाहे राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ हो या फिर उसके अनुसांगिक संगठन कभी ये नहीं कहते की मुश्ल्मानो ,यहुदियो ,इसइयो को हिन्दुस्थान में रहने का कोई हक़ नहीं है या इन्हें यहाँ से भगा देना चाहिए जबकि मुश्लिम चरमपंथी गुट भारत को खंडित कर मुश्लिम राज्य सत्ता स्थापित करने की घोषणा खुले आम करते है ,(आसाम ,नागालैंड ,मणिपूर ,मिजोरम ,बंगाल के कुछ क्षेत्र ,बिहार ,उत्तर प्रदेश ,झारखण्ड के कुछ क्षेत्र , ,केरल ,गोवा )में हिन्दुओ की स्तिथि देखे ,लेकिन तब आप जैसे लोग कोई टिका टिपण्णी नहीं करते .आज आप मुश्लिम मुल्को में चले जाये क्या आप खुद के उपासना पद्दति से उपासना कर सकते है लेकिन ये हिंदुत्व ही है जो हिंदुस्तान में सब अपनी अपनी उपश्ना पद्दति निर्भीक हो कर मानते है और उपासना करते है . १०० करोड़ की हिन्दू आबादी वाले इस देश में भगवन राम के मंदिर में पूजा करने के लिए कोर्ट के आदेश का इंतजार शांति पूर्वक करना हिंदुत्व का दर्शन है अन्यथा इतनी तो ताकत है की आज चाह ले तो मंदिर भी बन सकता है और पूजा भी हो सकती है लेकिन हिंदुत्व ऐसा नहीं सिखाता इस लिए चुप्पी साधे कोर्ट के आदेश का इंतजार किया जाता है संघ हमेशा जोड़ना सिखाता है तोडना नहीं .संघ और उसके अनुसांगिक संगठनों को नजदीक से जाने अनेको साहित्य है संघ की कर्यपद्दाती से सम्बंधित उसे पढ़े .फिर देखे संघ क्या है .?

    Chandan rai के द्वारा
    June 25, 2012

    मित्रवर , में आपकी विचारधारा से शतप्रतिशत सहमत हूँ , आपने सचमुच हिंदुत्व की तर्कसंगत परिभाषा दी है , और जो लोग हिन्दू संस्कृति पर अपनी स्वार्थपरता सिद्ध करने के लिए कुटिल आक्षेप करते है ,यदि वो हिन्दू है तो वो हिन्दू कहलाने लायक नहीं है , और ना ही वो हिंदुत्व को जन पाए हैं ! देखीय मित्र रही बात किसी हिन्दू संस्था संघ की यदि वह जोड़ने की बात कहता है और राष्ट्रवाद की बात कहता है तो मे उस संस्था का पहला समर्थक हूँगा !

    June 27, 2012

    हिंदुत्व कभी तोड़ने की बात नहीं करता तो आज के तथाकथित धर्म निरपेक्षो को इससे डर क्यों लगता है ..तो आप क्या कर रहे हैं…….मेरे इस छोटे से जीवन में कुछ हिन्दुओ को छोड़ दिया जाय तो शायद ही कोई मिला जो भाई-चारे की बात करें………..कुछ आतंकवादी घटनाओ की वजह से पुरे मुस्लिम कौन के खिलाफ नफरत का बीज बोया जा रहा जबकि हकीकत यह है इन आतंकवादी घटनाओ में हिन्दू संगठनो का बहुत बड़ा हाथ है मुसलमानों को बदनाम करने की. चुकी हरेक डिपार्टमेंट में हिन्दुओ की संख्या ज्यादे है अतः वो खुद बा-इज्जत बच जाते और दुनिया के सामने रोना रोते रहते हैं……और जो आप यहाँ राम मंदिर में राम की पूजा को लेकर नफ़रत फैला रहे हैं……..तो हकीकत तो यह है की मुसलमानों को वहां राम मंदिर होने से कोई शिकायत नहीं बल्कि आप जैसे कुछ विचार धारको को वह बाबरी-मस्जिद होने से शिकायत थी जो आज भी है. और जो हिस्सा विवादस्पद है वह मंदिर से काफी दूर है ………….अरे आप हिन्दू नहीं बन सकते तो कम से कम आदमी तो बनकर रहिये . क्यों शैतान बनाना चाहते हैं………

vikramjitsingh के द्वारा
June 24, 2012

चन्दन जी….नमस्कार… हो क्या गया है आपको….??? आज कहीं भंग या कुछ ऐसा ही कोई नशा तो नहीं कर के आये….. अरे साहब….आपको….ये तो दिख गया…और आपने बोल भी दिया….या ये कहिये….आप ‘हिन्दू’ को ‘आतंकवादी’ घोषित करने पर आमादा हैं….. ”अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद ध्वस्तीकरण ,गुजरात में गोधरा काण्ड ,मालेगांव ब्लास्ट , मडगांव ब्लास्ट, हमारे हिंदुत्व के कपाल पर कभी ना मिटने वाली कालिख और शर्मनाक राष्ट्रिय दुर्घटना है! लेकिन….मुंबई ब्लास्ट कांड……..पार्लियामेंट पर हमला……मुंबई में आतंकवादी अटैक…….दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर….जम्मू का रघुनाथ मंदिर…..जम्मू की हाजी दरगाह….और भी बहुत सारे हैं…..इन सबको तो आप (शायद नहीं यक़ीनन) ‘उच्चतम राष्ट्रीय गौरव’ का नाम देंगे…….??? और अफज़ल गुरु…कसाब…जैसों को ‘भारत-रत्न’ देने की मांग भी करेंगे…… आपको तो ‘दिग्विजय दिग्गी’ के साथ वाली कुर्सी पर बैठना चाहिए……

    Chandan rai के द्वारा
    June 24, 2012

    विक्रम जी , मैंने हिंदुत्व और हिन्दुवाद के मर्मांतर को रखने का प्रयास किया है , कोई भी भारतवासी हिन्दू मुस्लिम ,सिख ,इसाई, हिंदुत्व का विरोधी नहीं है ,मै भी उसी हिंदुत्व का समर्थक हूँ , क्यूंकि हिंदुत्व सर्वधर्म हिताय की बात रखता है ,वह इक विशेष वर्ग वर्ण के उत्थान की बात नहीं कहता ! पर हिंदूवादी सोच केवल हिन्दू धर्म समुदाय के हित और अन्य धर्म की उपेक्षा करता है ,जिसका में समर्थक नहीं हूँ , ऐसे ही चंद संकुचित मानसिकता के लोगो ने जेहाद की परिभाषा बदल दी थी ! और चंद लोगो की सोच हिंदुत्व पथ पर चलते हुए हिन्दुवाद के दायरे में फस कर रह गई है ! मैंने कंही भी हिन्दू या मुसलमान को आतंकवाद का जिम्मेदार नहीं कहा , बल्कि में तो उस दकियानूसी सोच की बात कह रहा हूँ जो इक आस्था से अंधविश्वास की और बढ़ चली है अब आप को तय करना है आप हिंदुत्व के पक्षधर है या हिंदूवादी सोच के !

    June 27, 2012

    नहीं ये सिर्फ आतंकवादी को आतंकवादी घोषित करना चाह रहे हैं………..और आतंकवादियों का कोई चेहरा नहीं भले ही वे हिन्दू और मुस्लिम का चेहरा लगा बैठे हैं………………..

vikramjitsingh के द्वारा
June 24, 2012

चन्दन जी….नमस्कार… हो क्या गया है आपको….??? आज कहीं भंग या कुछ ऐसा ही कोई नशा तो नहीं कर के आये….. अरे साहब….आपको….ये तो दिख गया…और आपने बोल भी दिया….या ये कहिये….आप ‘हिन्दू’ को ‘आतंकवादी’ घोषित करने पर आमादा हैं….. ”अयोध्या में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद ध्वस्तीकरण ,गुजरात में गोधरा काण्ड ,मालेगांव ब्लास्ट , मडगांव ब्लास्ट, हमारे हिंदुत्व के कपाल पर कभी ना मिटने वाली कालिख और शर्मनाक राष्ट्रिय दुर्घटना है! लेकिन….मुंबई ब्लास्ट कांड……..पार्लियामेंट पर हमला……मुंबई में आतंकवादी अटैक…….दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर….जम्मू का रघुनाथ मंदिर…..जम्मू की हाजी दरगाह….और भी बहुत सारे हैं…..इन सबको तो आप (शायद नहीं यक़ीनन) ‘उच्चतम राष्ट्रीय गौरव’ का नाम देंगे…….??? और अफज़ल गुरु…कसाब…जैसों को ‘भारत-रत्न’ देने की मांग भी करेंगे…… आपको तो लोकसभा में ‘दिग्विजय दिग्गी’ के साथ वाली कुर्सी पर बैठना चाहिए……

    Ajay Kumar Dubey के द्वारा
    June 25, 2012

    चन्दन भाई नमस्कार… यहाँ मैं विक्रम भाई से सहमत हूँ. पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि आप लिखना कुछ और चाह रहे थे और लिख गए कुछ और….. यार मेरे…. यह हिन्दू शब्द ही भ्रामक है…हमारे शास्त्रों में कहीं भी हमें हिन्दू शब्द से संबोधित किया गया है. यह तो स्वार्थी तत्वों ने हमें बांटने के लिए हिन्दू नाम से संबोधित कर दिया और हमने भी उसे स्वीकार लिया. और आज भी वही परिपाटी चली आ रही है. सच कहूँ…तो हमारी हालत ” हमें तो अपनों ने लूटा..गैरों में कहाँ दम था..” वाली हो गयी है….हमारे ही देश में, हमारे ही घर में…हमको ही तबाह करने वाले…अपने ही “गद्दार” लोग थे और हैं…

    Chandan rai के द्वारा
    June 25, 2012

    दुबे जी मित्र , बड़े दिवस बाद आपकी उपस्थति से मन गद गद है , एक विषय पर खुली चर्चा होना आवश्यक है ! हर किसी के नजरिय को जानना आवश्यक हो जाता है , सायद अलग अलग सोच होने से ही तो मंथन होता है और कुछ बेहतर निकलता है ! इसे ही ब्रेन स्टोर्मिंग कहते हैं ! मैंने तो मित्र पूरा का पूरा लेख हिंदुत्व के मुद्दे से ना हटते हुए , किसी अन्य चर्चा से बचते हुए लिखा है , फिर भी यदि आपको लगता है की में भटक गया तो भी आपके विचारों का स्वागत !


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