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{ "हम विलुप्त हो चुकी "आदमी" नाम की प्रजातियाँ हैं" / "हम कहाँ मुर्दा हुए हमें पता नहीं".....!!! }

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"बिजली भाग गई" ?

Posted On: 19 Jun, 2012 में

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घुप्प इकदम घुप्प अँधेरा पसरा हुआ था, मेरे शेखचिल्ली दिमाग लगा बन्दर गुलाटियां मारने !ख्यालों के पुष्पक विमान पर बैठा में फ्रिसेवा का आनंद उठा ले रहा था !  इसी बहाने मै लगे हाथ सारे सुख भोग लेना चाहता था की तभी जाने क्या हुआ ! शायद विमान में तकनीकी ख़राब हुई और मै धडाम से आ गिरा ,वापिस अपनी नाकाम बेकार हकीकत की जमीन पर !

तभी कान में प्रतिवेशिओं की सुगबुगाहट सी सुनाई दी ,खिड़की से बाहर झांका तो यकीन मानिये इस महंगाई में मेरी धोती का रुमाल हो गया ,बदन के निकम्मे रोंगटे इकदम सेवा- सिग्नल को  चाक-चौकस हो गए ,

मेरे घर की देहरी के ठीक सामने गली के बीचो-बीच बिजली के खम्बे पर लगे सारे ज्योतिर्मय कुमार ,शालीन से दिखने वाले ‘ट्यूब’ ,विलायती फ्लोरोसेंट लैंप, कुछ बिजली के लटटू ,आवारा ‘बल्ब’ , हाथो में देशी ठर्रे का पव्वा लिए, आलती-पालती लगा महफ़िल सजाये बैठे थे !

मेरी तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई ,काटो तो पानी नहीं ,सोचा भाई कंही अँधेरे में मुझे कोई भूतिया असर तो नहीं हो गया,लग गई अपनी वाट ! ,पर जब बजरंगबली जी की टूटी-फूटी कंठस्थ कवितापाठ किया ,और उससे भी कुछ परिवर्तन नहीं हुआ  तो विश्वाश हुआ की भाई ! जो देख रहे हो ,वो सत्य  है !

श्रीमान शर्मीले जीरो वाट का लटटू : मुझे तो पहले ही शक  था बिजली के  चाल-चलन पर,कहती फिरती थी की ,मै तुम्हे जान से ज्यादा चाहती हूँ ,बाकी सब तो मेरे दोस्त है !  भाग गई सा@ बिजली !

ये सुन आवारा ‘बल्ब’ : ( जो खुद बिजली का पुराना आशिक था ) पर तुने भी तो यार हद कर दी ,किस बेगेरत बेहया “बिजली”  से दिल लगाया , जो सारा-सारा दिन भटकती फिरती रहती थी ! लो  अब भाग गई न कुलटा बिजली !

श्रीमान शर्मीले जीरो वाट के लटटू : खिन्नाते हुए ,” भाई जब दिल आया गधी पे, तो  परी क्या चीज है !

यह सुनकर ज्योतिर्मय कुमार ट्यूब : ओये बकवास ना कर , वो मुझसे मिलने आया करती थी ! थक गई थी वो तेरी  दो टके की बक-बक सुनकर !

वैसे भी वो तेरे साथ लिव-इन-रिलेशनशिप में थी ,कोई सात जन्म तक के फेरे नहीं लिए थे !

इससे पहले की दोनों के बीच हाथापाई की नौबत आती सामने से ” देवदास से दिखते  टेलीविजनों ” का पूरा दल विरह गीत गाते हुए आ रहा था ,गीत के बोल थे ,”इन्तहां हो गई इन्तजार की ,आई ना कुछ खबर मेरे यार की” !

ये सुन बेघर ट्यूब बोला,” भाई लोगो, किसके इन्तजार में ये दर्द भरा गीत गा रहे हो ! ये सुन सारे दूरदर्शन इक स्वर में बोले ,”मित्रवर  रूप की रानी हुस्न की मल्लिका” और तुम्हारी भाभी बिजली के इन्तजार में  !

ये सुन जैसे सारे ट्यूबों और बल्बों में वज्रपात हुआ, दो चार तो वँही लुढ़क लिए, और कुछ का तो वँही फ्यूज उड़ गया !

पियक्कड़ फ्लोरोसेंट लैंप बोला ( जो विलायत से पढ़ के आया था ) : अबे ओ दो टके के बल्ब , “क्यूँ इतना रोना लगा रखा है ,जा अंग्रेजी हाफ ले के आ ,इससे तो अपना गला भी गिला नहीं हुआ ,गम क्या ख़ाक गीला होगा” !

इससे पहले की बल्ब निकलता, बिजली के नए “फैन उर्फ़ पंखे ” हाथ में अंग्रेजी की बड़ी सी बोतल लिए किसी जोगी सन्यासी की तरह धुनी रमाते आ रहे थे ,”ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं” !

ये देख पियक्कड़ फ्लोरोसेंट लैंप की बांछे खिल गयी , झट से बल्ब से दमड़ी  लपक अंटी में दबा लिए और बोला:बुद्धिराज मित्रवर ! हम है ना आपकी सेवा में ,हम है ना आपके , और ये महफ़िल तो पूरी की पूरी आप के काम की हैं ! और आप क्यूँ ऐसी जोगियाना गीत गा रहे हैं ,

इस बात ने जैसे उन फैन उर्फ़ पंखे की दुखती राग पर हाथ रख दिया था ! फैन उर्फ़ पंखे : बस यार अब जीने का दिल ही नहीं करता , हमारी मुहब्बत ,हमारी जिन्दगी “बिजली” हमे छोड़  के भाग गई है, हम सारा दिन उसके चक्कर में फिरते थे ,और वो हमे चक्कर दे भाग गई ,

ये सुन तो जैसे पूरी महफ़िल में और मातम छा गया ,लगे सब एक स्वर मे गा-गा कर  भगवान् का सीना चीरने ,”ओ दुनिया के रखवाले सुन दर्द भरे मेरे नाले ” !

ठीक उसी समय इक गाडी आकर रुकी ! सबको लगा, लो भैया हमारी मुहब्बत ने तो भगवान् को जमीं पर आने को मजबूर कर दिया, पर  उसमे से आलमगीर फ्रिज बाबु उतरे और बोले अभी-अभी मुझे किसी ने खबर दी है की ‘ बिजली ‘ अमीरजादे इनवर्टर के साथ गलबहियां डाले घूम रही है !

ये सुनते ही जैसे प्रतिशोध ,जलन ने सारे ज्योतिर्मय कुमार ,शालीन से दिखने वाले ‘ट्यूब’ ,विलायती फ्लोरोसेंट लैंप, दूरदर्शन ,फैन उर्फ़ पंखे ,बिजली के लटटू ,आवारा ‘बल्ब’को ज़िंदा कर दिया, सब इक साथ गुर्राए,”आज नहीं छोड़ेंगे उस कमीने अमीरजादे इनवर्टर को” ,और चल दिए उसके डेरे की तरफ !

मै भी, कब उनके पीछे हो लिया, पता ही नहीं लगा !

पर जैसे ही वो सब उनके घर के दरवाजे तक पहुचे अन्दर से इक एम्बुलेंस निकली  और सायरन बजाती निकल गई, ये देख कुछ सज्जन  से दिखते बल्ब बोले हंगामा खड़ा करने से पहले पता कर लेते है की आखिर माजरा क्या है !

बल्ब ने दरवाजे पर खड़े दरबान से पूछा ,” भाई साहब क्या हुआ” !

दरबान : वो हमारे सेठ जी ” इनवर्टर ” को दिल का दौरा पड़ा है ,पिछले कुछ दिनों से काफी दुखी और सदमे मे थे , सुनने मै आया था की उनकी इकलौती प्रेमिका “बिजली” भाग गई है, और वो ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाए ! ये सुन बल्ब उलटे पाँव हो लिए और आकर सभी पियक्कड़ो को संबोधित करते हुए बोले : ये  बेशर्म, बेवफा, बिजली किसी की सगी नहीं है ,इसने तो अमीरजादे बेचारे इनवर्टर को भी नहीं  छोडा,  भाग गई कलमुंही इसे भी छोड़ कर !

ये सुन सारे ज्योतिर्मय कुमार ,शालीन से दिखने वाले ‘ट्यूब’ ,विलायती फ्लोरोसेंट लैंप, दूरदर्शन ,फैन उर्फ़ पंखे ,बिजली के लटटू ,आवारा ‘बल्ब’ सर पकड़ बैठ गए , तभी फ्रिज को जाने क्या सूझा और बोला चलो थाने चल के बिजली की  गुमशुदगी की रपट लिखवाते है ,और जब हाथ आएगी तो सबक सिखायेंगे उसको !

पर विलायती फ्लोरोसेंट लैंप बीच मे ही टोकते हुआ  बोला : मित्रों पुलिसिया काम तो कछुए होते है , अब जाने कितना वक़्त लगे !इससे अच्छा होगा हम खुद “गुमशुदा बिजली” के नाम से पर्चे छपवाते है ,और इनाम भी रख देते है पुरे 50000 रूपए !और इसके लिए हमे उसके रंग रूप बनावट का विवरण देना होगा , तो कृपा मुझे उसकी बनावट शक्ल-सूरत के बारे मे लिखवा दे !

ये सुन जैसे होड़ लग गई ! कोई बोला रंग उसका गेहुआं था ,कोई बोला नहीं यार सांवल थी ,कोई बोला एकदम दूध थी ,और इक शोर गूंजने लगा !

मै खड़ा सोचने लगा भाई ऐसे मौके बार बार नहीं आते , काम से छुट्टी ले निकल पड़ो बिजली की तलाश मे, किस्मत बार बार दस्तक नहीं देती , और 50000 रूपए कोई छोटी रकम नहीं होती !

तो सभी अग्रजो ,मित्रों ,भाई बहनों ,बंधुओं , दुश्मनों (यदि कोई है तो ), जागरण टीम , संपादको , यदि  बिजली का पता, पता हो तो कृपा शीघ्र मुझे सूचित करे ,आपका 50000 रूपए मे से 50  % कमीशन पक्का !

” ढूँढीये ! क्यूंकि बिजली भाग गई ” ?

———————————————————-

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413 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
August 28, 2012

साधुवाद ! लेख के लिए बधाई 1

mataprasad के द्वारा
July 8, 2012

नमस्कार चन्दन राय जी, आरे साब बिजली के न आने से हम भी दुखी और ऐसे टाइम पर धोखा देती है की पूछो मत !! बहुत अच्छी अभिव्यक्ति !!!!!!!!१

    Chandan rai के द्वारा
    July 8, 2012

    माताप्रसाद जी , अब तो बिजली से करवाई जा रही बंधुआ मजदूरी से मुझे लगने लगा है की अच्छा है जो बिजली भाग गई !

    Cheyenne के द्वारा
    July 11, 2016

    This is what we need – an insight to make evyorene think

jyotsnasingh के द्वारा
June 29, 2012

प्रिय चन्दन जी, बल्ब,टिउब,फ्रिज,टोस्टर,मिक्सेर,जूसर,पंखा, एयर कंडिशनर ,वाशिंग मशीन ,हम सब ले आये ,पर हाय री बिजली ये सब कोई काम न आये,बैठे हैं अँधेरे में पसीने में तरबतर ,बिजली आये तो सोयें,बिजली आये तो खाएं,बिजली आये तो पानी आये ,पानी आये तो नहाये धोएं,इन्वेर्टर भी क्या करे बजली आये तो चार्ज हो पाए ,क्या करे हाय क्या करे हाय .

    Chandan rai के द्वारा
    July 8, 2012

    ज्योत्सना जी , आपकी समस्या लाजिमी है , आखिर यूँ ही तो बिजली हमारी जान नहीं है है !

ajaykr के द्वारा
June 27, 2012

चंदन भाई ,बिजली मेरे शहर में हैं ,,जहां महापौर का चुनाव हों रह हैं ……आज चुनाव के बाद जायेंगी …जैसे आपके यहाँ से गयी हैं , मेरी नयी रचनाये आपकी प्रतीक्षा में हैं – http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/06/26/विचार-एवं-भावनाएं/

    Chandan rai के द्वारा
    June 27, 2012

    ajay mitr , aapne तो बिजली को गिरफ्तार कर रखा है , चलिय कोई बात नहीं , बस यूँ ही खबर देते रहिये

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
June 27, 2012

चन्दन भाई आपकी कल्पना शक्ति का जवाब नहीं…आपकी पहली कविता पढ़ते ही मुझे इस बात का एहसास तो हो गया था किन्तु आपके इस लेख को पढने के बाद तो मेरे आश्चर्य का ठिकाना ही नहीं……बेमिसाल है आपका यह व्यंगात्मक, यथार्थ की धरती से उठाया गया काल्पनिक पात्रों से सजाया गया उम्दा लेख….बहुत बहुत बधाई हाँ इस बात की भी बधाई की आज 27 जून 2012 को आपका लेख दैनिक जागरण में छपा है साथ में मेरा लेख भी छपा है…..

    Chandan rai के द्वारा
    June 27, 2012

    मित्र , ये आपका बड़प्पन है जो आप हमेशा मुझे प्रोत्साहित करते आये हैं , आपके साथ अख़बार में मंनच साँझा करके मुझे बेहद ख़ुशी हुई ! आपकी सुचन और उपस्थति के लिए आभार !

alkargupta1 के द्वारा
June 24, 2012

चन्दन जी , आपको अभी तक बिजली रानी मिली या नहीं मैं तो उसे बहुत दिनों से ढूँढ रही हूँ पर क्या करें मिल ही नहीं रही हैं मिलने की प्रतीक्षा कर रहीं हूँ……. क्या खूब लिखा है बहुत ही सुन्दर और आनंददायक व्यंग्य….

    Chandan rai के द्वारा
    June 24, 2012

    अलका जी , आपका चिंतन और आपका अथक प्रयास जरुर रंग लाएगा , बिजली अब खुदा हो गई है , भाव खा रही है हमारा दिल खाकर ! आपका कोटिश धन्यवाद !

roshni के द्वारा
June 24, 2012

चन्दन जी बिजली रानी अगर मिल जाये तो उसे यहाँ भी भेज दीजियेगा … लेकिन मुझे तो लगता है बिजली स्वर्गवासी हो गयी है तबी तो तलाश करने पर भी नहीं मिलती.. खैर दुआ है की मिल जाये .. सुंदर व्यंग आभार

    Chandan rai के द्वारा
    June 24, 2012

    रौशनी जी , आपकी चिंता लाजिमी है ,और यदि बिजली सवार्लोकी हो गई है तो अब हम तप करेंगे और वर में मांगेंगे बिजली को ! आपके सुन्दर उदगारो के लिए धन्यवाद !

rajanidurgesh के द्वारा
June 23, 2012

वाह क्या लिखा है. बिजली रानी तो होती है नेताजी की प्यारी. जब-जब नेताजी के पग शहर में पड़ते हैं तब-तब बिजली रानी आती है. जहाँ जहाँ नेताजी का घर होता है वहां वहां बिजली रानी बंदी होती है. मुलायम जी का इटावा अखिलेशजी का कन्नौज और आजम खान जी का रामनगर बिजली रानी का बंदी गृह है. एन सी आर की गाज़ियाबाद से बिजली रानी रूठी रहती है. डा.रजनी.

    Chandan rai के द्वारा
    June 24, 2012

    डा.रजनी. जी , आपके सुन्दर बिजली के विभिन्न रूपों का वर्णन ,तो मेरी रचना में चार चाँद जड़ गया है , और आपकी इस खबर को सुनकर सायद ज्योतिर्कुमारों का मन शांत हो जाए , आपके बहुमूल्य उपस्थिति के लिए धन्यवाद !

yamunapathak के द्वारा
June 23, 2012

bahut sundar blog,haasya पर gahraa vyang hai chandanjee aapkee pratikriya apne recent blog पर padhaa मैंने.darasal main us blog पर sabhee pita kee ray janana chahtee hun. thanx

    Chandan rai के द्वारा
    June 23, 2012

    यमुना जी , आपको अच्छा लगा ,आपके उत्साहवर्धन के लिए कोटिश आभार ! पर क्षमा प्रार्थी हूँ क्यूंकि में पिता नहीं हूँ पर ,हाँ मेने पिता के व्यवहार का हर पल आकलन किया है

kamal yadav के द्वारा
June 23, 2012

चन्दन जी बहुत ही मजेदार हास्य -व्यंग |

    चन्दन राय के द्वारा
    June 23, 2012

    कमल मित्र , आपके अमूल्य समय और विचार के लिए धन्यवाद

Rahul के द्वारा
June 23, 2012

चन्दन जी , आपने तो बिजली की खूब खिचाई की है , सुन्दर रचना

    चन्दन राय के द्वारा
    June 23, 2012

    राहुल जी आपके स्नेह के लिए आपका धन्यवाद !

sandeep के द्वारा
June 23, 2012

चन्दन जी सुन्दर रचना पर मुबारकबाद !!!

    चन्दन राय के द्वारा
    June 23, 2012

    मित्र , आपके अमूल्य समय और विचार के लिए धन्यवाद

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 22, 2012

दुश्मनों (यदि कोई है तो ),,अरे चन्दन जी खोजने से खुदा भी मिल जाता है तो आप के दुश्मन …आप की दुश्मन बिजली आंटी क्यों नहीं मिलेंगी …बड़े बड़े हाथियों ने उन्हें रोक रखा होगा …बड़ी रंगीन हैं न ये ..तुनक मिजाज अभी आयीं अभी गयीं तौबा तौबा ज्यादा शिकायत की तो मेरे यहाँ से भी … जय श्री राधे … भ्रमर ५

    चन्दन राय के द्वारा
    June 23, 2012

    भ्रमर साहब , अब आप जैसे अग्रज इतना संबल देंगे तो हम बिजली को ढूंढ़ ही लेंगे , अब देखते है ये बिजली कब तक छुप के रहेगी , अरे ये क्या ये तो आपके यंहा से भी भाग गई

narayani के द्वारा
June 22, 2012

नमस्कार चंदन राय जी अपने सुंदर लेखन द्वारा ,आपने सत्यता बखान की है .जनता बहुत त्रस्त है ,बिजली की समस्या से . धन्यवाद नारायणी

    चन्दन राय के द्वारा
    June 23, 2012

    नारायणी जी , आपने सही कहा हम सब दुखी है , आपके अमूल्य समय और विचार के लिए धन्यवाद

Punita Jain के द्वारा
June 22, 2012

चन्दन भाई जी , आजकल बिजली ने सबको रूलाया है , हास्य- व्यंग में आपने बिजली का असली चेहरा दिखलाया है | बहुत ही मजेदार हास्य -व्यंग | पढ़कर बहुत ही हँसी आई| —बधाई

    चन्दन राय के द्वारा
    June 23, 2012

    पुनीता जी , आपका उदार मन मुक्त भाव से अपने विचार रखता है , आपके चेहरे पर मुस्कान का फल हर पुरस्कार से बड़ा है ,

sadhna srivastava के द्वारा
June 22, 2012

hahahahahha…..Awesome! Chandan ji the way you have written is so good….. am still laughing….. :)

    चन्दन राय के द्वारा
    June 23, 2012

    साधना जी , It’s so much kind of you, my intention has fulfilled, if i hadn’t succeeded in bringing smile on face of reader, All my efforts will be in vain , Thanks ,from bottom of my heart

yogi sarswat के द्वारा
June 22, 2012

मित्रवर चन्दन राय जी , सादर नमस्कार ! ये बिजली किसी डोन से कम नहीं है ! इसे आज पूरे भारत के ३५ राज्यों की सरकार ढूंढ रही है लेकिन इसे पकड़ना आसान ही नहीं नामुमकिन है ! बहुत गज़ब का लेखन !

    चन्दन राय के द्वारा
    June 23, 2012

    योगी मित्र , बिलकुल ठीक कहा आपने ज्ञात सूत्रों से पता लगा है की बिजली आजकल सैफई में घूम रही है , बस आप यूँ खबरे देते रहीय आपका कमीशन पक्का है

rekhafbd के द्वारा
June 21, 2012

चन्दन जी ,सच में बिजली का आवागमन बहुत सताता है ,सटीक व्यंग

    चन्दन राय के द्वारा
    June 23, 2012

    रेखा जी , आपके उत्साह का बल है जो मुझे मार्गदर्शन करता है , आपका कोटिश धन्यवाद

June 21, 2012

ढुढो-ढुढो रे बलमा मेरे कान का बाला …………….मेरा बाला चंदा का जैसे हाला रे – मेरा बाला……..हाँ ….हाँ….! जाते-जाते ……………..बहुत खूब लिखा है आपने……………………………!

    चन्दन राय के द्वारा
    June 21, 2012

    अनिल मित्र , का करूँ मित्रवर आये ना बालम ! ढूंढ़ रही है उसे प्यासी अंखिया आये ना बालम !,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 20, 2012

बाकि की बाते तो बाद में होती रहेंगी लेकिन आज सिर्फ आपके अंदाज़े बयाँ के बारे में ….. क्या खूब लिखा है आपने ….. बदले -२ से मेरे हजूर नज़र आते है आज ….. कायम रहे हमेशा ही चढ़ा हुआ यह रंग इसी तरह मस्ती में डूबे रहो बिना पिए हुए भंग …. सुन्दर रचना पर मुबारकबाद !!! हमने जिससे इश्क था किया वोह ज़मीं पर नहीं आसमानों पे रहती है बरसते है जब -२ बादल वोह लपक-२ के चमकती और बरसती है

    चन्दन राय के द्वारा
    June 21, 2012

    राजकमल जी , आपके सुन्दर शब्द ,स्नेह ,और प्रोत्साहन के लिए जो कहूंगा कम होगा , आपके उत्साह का बल है जो मुझे मार्गदर्शन करता है , आपका कोटिश धन्यवाद

vikramjitsingh के द्वारा
June 20, 2012

चन्दन भाई…..नमस्कार…. ”आपका ये रूप बहुत भाया बिजली रहे या ना…. आपका व्यंग बहुत पसंद आया……” शुक्रिया….

    चन्दन राय के द्वारा
    June 21, 2012

    विक्रम साहब , ये तो आपका प्रेम है ,जो आप बिजली को भुला मुझे याद रख रहे है , आपका स्नेह ही तो मनोबल देता है

akraktale के द्वारा
June 20, 2012

चन्दन जी नमस्कार, गरमीयों में बिजली को ढूंढ़ पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकीन है. क्योंकि ये कभी गाँव में खेतों में घुमने चली जाती है तो कभी शहरों में सरपट दौड़ती नजर आती है. हाँ मगर रात तो शहरों में ही बिताती है, कभी रात में इसे गाँवों में नहीं देखा. गाँव में आधी रात को जब कोई बच्चा गर्मी से बेहाल होता है तो माँ कहती है सो जा सो जा वरना तेरे छोटे भाइयों की भी नींद खुल जायेगी. तेरा बापू भी कितना पंखा हिलाएगा, बिजली तो पौ फटने से पहले नहीं आएगी. अच्छा आलेख मगर बिजली की हाल तो सब जगह एक सा है कहीं ज्यादा कहीं कम.

    चन्दन राय के द्वारा
    June 21, 2012

    अशोक साहब , वैसे बेचारी बिजली भी क्या करे ,पुरे शहर का बोझ उठा उठा ,गाँव ,मशीनों ,कारखानों का बोझ उठा बेचारी किसी बंधुआ मजदुर की तरह हो गई है , अब तो मुझे लगने लगा है की ठीक किया जो बिजली भाग गई है !

allrounder के द्वारा
June 20, 2012

दुखती राग पर हाथ रख दिया भाई :) बड़ा सताए ये बैरन बिजुरिया ……….. धत्त तेरे की फिर गई :) :)

    चन्दन राय के द्वारा
    June 21, 2012

    सचिन भाई , आप भी चोट खाए बालम लग रहे है बिजली के , पर घबराए मत बिजली बस पकड़ में आने वाली है

seemakanwal के द्वारा
June 20, 2012

सादर नमस्कार अति सुन्दर आलेख है .बिजली पर भरोसा ,कभी नहीं

    चन्दन राय के द्वारा
    June 21, 2012

    सीमा जी , आपके अनमोल और बहुमूल्य शब्द और समय के लिए आपका आभार

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 20, 2012

आपको कहीं दूर नहीं जाना है बिजली हेतु नाम कमाना है आपको उत्तर प्रदेश आना है माननीय मुलायम का जमाना है २४ घंटे बल्ब जगमगाना है बिजली भाग के है यहाँ आई रोज प्रदर्शन होते भाई

    चन्दन राय के द्वारा
    June 21, 2012

    कुशवाहा जी , बिलकुल ठीक कहा आपने ज्ञात सूत्रों से पता लगा है की बिजली आजकल सैफई में घूम रही है , बस आप यूँ खबरे देते रहीय आपका कमीशन पक्का है

Mohinder Kumar के द्वारा
June 20, 2012

चन्दन भाई, बिजली की क्या कहिये… जिसके हाथ लग जाये वो भी गया और जिससे रूठ जाये वो भी गया…

    चन्दन राय के द्वारा
    June 21, 2012

    मोहिंदर साहब , ठीक कहा आपने , पर क्या करे फिर भी हमे मुहब्बत है इससे

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 20, 2012

चन्दन जी,आपने एकदम नई शैली को अपनाते हुए सुन्दर व्यंग्यात्मक आलेख प्रस्तुत किया है.बिजली की कटौती से सभी हलकान हैं.

    चन्दन राय के द्वारा
    June 21, 2012

    राजीव जी , अब क्या करे बिजली ने ऐसा धोका दिया ,की न जीते है ना मरते है , दर्द तो बंया हो ही जाता है , और आप मेरे दर्द का मजा ले रहे है

jlsingh के द्वारा
June 20, 2012

प्रिय कवि से परिवर्तित व्यंग्यकुमार जी ये बिजली बड़े काम की चीज है काम की चीज है, नाम की चीज है XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX बिजली जब आती जाती है अपना महत्व बतलाती है और हाँ बिजली नहीं है, यह बहाना कर आप मधुशाला में घुसने के अवसर मत तलाशिये अपने सभी विद्युतीय उपकरण को हराही भी मत बनाइये वरना … बिजली तो प्यारी बच्ची है न छेड़ समझ यह कच्ची है चाहे कोई हो शूरमा गलती से इसको छेड़ ना औकात तुम्हे बतलायेगी कन्धों पर तुम्हे सुलायेगी इसीलिये यह समझाती छेड़ो न मैं हूँ बलखाती! चन्दन हो माथे पर चमको खबरदार मत तुम भटको. कैसी लगी… अगर बिस्वास न हो तो हलके से ही छूकर देखो…..

    चन्दन राय के द्वारा
    June 20, 2012

    जवाहर साहब , आपको ये बिजली बड़ी मासूम लग रही है बड़ी चिरकुट है , मौका देखते ही भाग जाती है , जाने कितने चाहने वालों का दिल तोड़ चुकी , अब लगता है आपकी बारी आ गई , — मैंने तो ये धोके बिजली के धोके दिल पे सहे रो रो के के बिजली को कोई प्यार ना करे इससे कोई प्यार न करे !

dineshaastik के द्वारा
June 20, 2012

चंदन जी नमस्कार, बहुत ही सुन्दर प्रतीक, लाजवाब रचना, बेहतरीन शैली……बधाई….

    चन्दन राय के द्वारा
    June 20, 2012

    दिनेश साहब , आपने तो विशेषताओं के फूलों से मुझे लबरेज कर दिया , आपके स्नेह के लिए आपका धन्यवाद !


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