कलम...

{ "हम विलुप्त हो चुकी "आदमी" नाम की प्रजातियाँ हैं" / "हम कहाँ मुर्दा हुए हमें पता नहीं".....!!! }

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"बस नेता ही है मेहफूज"

Posted On: 2 May, 2012 Others में

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हमारी थालिओं की भूख गायब, गायब है जिस्म से खून,
मेहफूज है मजबूरियाँ, जिस्म मे बस हड्डियाँ ही हैं मेहफूज !

——————————————————-

हमारी रसोई से आटा-दाल-सब्जी गायब, गायब मीठा और सुकून,
मेहफूज है खाली डिब्बों मे महंगे कंकड़, पेट मे बस पत्थरी ही हैं मेहफूज !

——————————————————————-

हमारे सर की छतनार गायब, गायब अपनी पुश्तैनी जमीन,
मेहफूज है बेमन नींद फुटपाथ पर, बदन पर फटा कुर्ता पजामा ही हैं मेहफूज !

——————————————————————–

हमारी अर्जियां फाईलों से गायब, गायब दफ्तर से बाबुजी और मुनीम,
मेहफूज है नए आवेदन प्रारूप , अभी और नए दफ्तर के चक्कर है मेहफूज !

——————————————————————–

हमारे घरों से हंसी गायब ,ख़ुशी गायब , नदी गायब और सड़क गायब ,
मेहफूज है बस मुफलिसी की बीमारियाँ, बस अब मरना है मेहफूज !

——————————————————————-

हमारे देश की उन्नति गायब, गायब हो रहा गरीब आंम आदमी,
मेहफूज है बस पार्टियाँ ,अब इस गुलिस्तान मे बस नेता ही है मेहफूज !

——————————————————————-

देखो अब ये हालात है की क्या-क्या गायब कर रही राजनीती ,
गनीमत है अभी वतनपरस्ती है सलामत, और कौमी एकता है मेहफूज !

**********

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62 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 12, 2012

प्रिय चन्दन ji , सस्नेह बहुत ही सुन्दर चित्रण किया है. आखिरी पंक्तियाँ तो गजब की हैं. बधाई. कौमी एकता बहुत jaroori है varna ये महफूज नेता.

chandan rai के द्वारा
May 6, 2012

मित्रवर हम भी उन्ही आम लोगो में से है , जो रोज पिस रहे है , घिस रहे , मर रहे है , बस तड़प ही सकते हैं , ये बस वही तड़प है आपका आभार मित्रवर

sandeep के द्वारा
May 6, 2012

Dear, i know you have that fire inside you

    चन्दन राय के द्वारा
    May 7, 2012

    मित्रवर हम भी उन्ही आम लोगो में से है , जो रोज पिस रहे है , घिस रहे , मर रहे है ,

kanahiyaa jha के द्वारा
May 6, 2012

Dear, what a topic ! amazing thoughts

    chandan rai के द्वारा
    May 6, 2012

    आपने मुक्त भाव से अपने विचार रखे आपका आभार आपकी प्रशंशा के लिए आपका तहे दिल से आभार ,

surender के द्वारा
May 6, 2012

Dear Wow ! keep writting

    chandan rai के द्वारा
    May 6, 2012

    हम भी तो उन्ही पीड़ित लोगो में से है , जो सहते है , अपने आप दर्द के उदगार निकल पड़ते है , आपका समर्थन और आपकी उपस्थिति कलम की ताकत है

Sushil के द्वारा
May 5, 2012

मित्र , एसा ही बढ़िया लिखते रहो

ARVIND RAI के द्वारा
May 5, 2012

Dear Bro, marvellous !

Abhinav Srivastava के द्वारा
May 5, 2012

क्या बात है ….गहरी, सजीव और सटीक …..लाजवाब…!

    चन्दन राय के द्वारा
    May 5, 2012

    मित्र , आपके वैचारिक समर्थन और प्रोत्शाहन के लिए आपका आभारी हूँ

akraktale के द्वारा
May 4, 2012

चन्दन जी नमस्कार, हमारी अर्जियां फाईलों से गायब, गायब दफ्तर से बाबुजी और मुनीम, मेहफूज है नए आवेदन प्रारूप , अभी और नए दफ्तर के चक्कर है मेहफूज ! बहुत सुन्दर रचना बधाई. जर्जर हो चुका तन अपना मन प्राण अभी बाकी हैं. मुफलिसी सही,कोमी एकता के निशाँ अभी बाकी हैं.

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    अक्रक्ताले सर , जिस तरह से आप मनोबल बढ़ाते है , यकीं मनिय ऐसी ताक़त मिलती है की शब्द सीने में अंकुरित हो जाते हैं , आप सुझाते रहीय , हम लिखते रहेंगे

dineshaastik के द्वारा
May 4, 2012

चंदन जी आम आदमी की पीड़ा को शब्द देती हुई प्रस्तुति, निश्चित  ही सराहनीय  है। बधाई….

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    दिनेश सर , हम भी तो उन्ही पीड़ित लोगो में से है , जो सहते है , अपने आप दर्द के उदगार निकल पड़ते है , आपका समर्थन और आपकी उपस्थिति कलम की ताकत है

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 4, 2012

मित्र चन्दन जी सादर नमस्कार- बहुत ही ज्वलंत मुद्दे पर कविता प्रस्तुत करने पर हार्दिक बधाई. लेकिन जब तक लोगों में हौंसला रहेगा कुछ भी गायब नहीं होगा. जन जन की आवाज़ जन जन तक पहुँचाने के लिए धन्यबाद.

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    अंकुर भाई हम भी उन्ही आम लोगो में से है , जो रोज पिस रहे है , घिस रहे , मर रहे है , बस तड़प ही सकते हैं , ये बस वही तड़प है आपका आभार मित्रवर

rekhafbd के द्वारा
May 3, 2012

चन्दन जी ,सादर नमस्ते ,अति सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई गनीमत है अभी वतनपरस्ती है सलामत ,कौमी एकता है महफूज़ ,बहुत बढ़िया

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    रेखा मेम, आपके वैचारिक समर्थन और प्रोत्शाहन के लिए आपका आभारी हूँ

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 3, 2012

हमारे घरों से हंसी गायब ,ख़ुशी गायब , नदी गायब और सड़क गायब , मेहफूज है बस मुफलिसी की बीमारियाँ, बस अब मरना है मेहफूज ! ——————————————————————- हमारे देश की उन्नति गायब, गायब हो रहा गरीब आंम आदमी, मेहफूज है बस पार्टियाँ ,अब इस गुलिस्तान मे बस नेता ही है मेहफूज ! चन्दन जी सटीक अभिव्यक्ति आप की …काश ये सब गायब हुयी चीजें फिर से मिल सकें ..मानव मानव बनने की कोशिश करे फिर शांति सुकून चैन मिल सके तो आनंद और आये .. सुन्दर रचना भ्रमर ५

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    भ्रमर साहब , आपने मुक्त भाव से अपने विचार रखे आपका आभार आपकी प्रशंशा के लिए आपका तहे दिल से आभार ,

chaatak के द्वारा
May 3, 2012

चन्दन जी, सादर अभिवादन, एक और अच्छी रहना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें|

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    चातक भाई आपकी प्रशंशा के लिए आपका तहे दिल से आभार , आपके विचार आपकी सज्जनता का बोध कराते हैं

jyotsnasingh के द्वारा
May 3, 2012

प्रिय चन्दन जी, क्या हम सब कुछ राजनीती और नेताओं पर थोप के एक आसान सा रास्ता नहीं ढूंढ लेते अपनी dushwaarion के लिए . मेरे विचार से नेता और अफसर जनता में से ही बनते हैं.और जनता तो हमीं हैं . ज्योत्स्ना

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    ज्योत्सना मेम, यही तो मेम हमारी कमी है की हम किसी को भी आपने माथे पर बिठा लेते है , और फिर फस जाते है उसी दलदल में , पर अब हम लोग बदल रहे है , बदलाव की बयार बह चली है , आपने मुक्त भाव से अपने विचार रखे आपका आभार

yogi sarswat के द्वारा
May 3, 2012

देखो अब ये हालात है की क्या-क्या गायब कर रही राजनीती , गनीमत है अभी वतनपरस्ती है सलामत, और कौमी एकता है मेहफूज ! बहुत सुन्दर ! एक आम हिन्दुस्तानी की के man की आवाज़ को आपने कलम दी है चन्दन जी ! बहुत खूब

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    योगी मित्र , हम भी उन्ही आम लोगो में से है , जो रोज पिस रहे है , घिस रहे , मर रहे है , बस तड़प ही सकते हैं , ये बस वही तड़प है आपका आभार मित्रवर

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 3, 2012

मित्र चन्दन जी, नमस्कार अब तो मरना ही है महफूज ……..क्या सुन्दर लिखा है……………जोरदार बहोत सुन्दर भाव आपके हमेसा अलग विचारों को दर्शाते है

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    आनंद भाई , जिस तरह से आप मनोबल बढ़ाते है , यकीं मनिय ऐसी ताक़त मिलती है की शब्द सीने में अंकुरित हो जाते हैं , आप सुझाते रहीय , हम लिखते रहेंगे

yamunapathak के द्वारा
May 3, 2012

महफूज़ शब्द का प्रयोग इतना सटीक.दुनिया ही जब महफूज़ नहीं होगी तो मनुष्य भी कहाँ रह पायेगा?

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    यमुना मेम, आपकी प्रशंशा के लिए आपका तहे दिल से आभार , आपके विचार आपकी सज्जनता का बोध कराते हैं

vikramjitsingh के द्वारा
May 3, 2012

गनीमत है अभी वतनपरस्ती है सलामत, और कौमी एकता है मेहफूज…… क्या बात है…चन्दन भाई……. खुद सवाल किया और खुद ही जवाब भी दे दिया…….. वर्तमान परिदृश्य का सटीक चित्रण किया है आपने……

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    विक्रम साहब , हम भी तो उन्ही पीड़ित लोगो में से है , जो सहते है , अपने आप दर्द के उदगार निकल पड़ते है , आपका समर्थन और आपकी उपस्थिति कलम की ताकत है

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 3, 2012

चन्दन भाई नमस्कार, आज की वस्तुस्थिति का बहुत ही मार्मिक और वास्तविक चित्रण प्रस्तुत किया है …. बधाई………

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    अजय मित्र , इक आम आदमी जब दुसरे आम आदमी को समर्थन देता है , तो मन को बड़ा बल मिलता है , लगता है कुछ बदलाव जरुर आयेगा

May 3, 2012

चन्दन जी सादर! मित्रवर, बेहद अच्छी रचना आपकी, बधाई…

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    कुमार गौरव अजीतेन्दु भाई , आपके वैचारिक समर्थन और प्रोत्शाहन के लिए आपका आभारी हूँ

shashibhushan1959 के द्वारा
May 3, 2012

आदरणीय चन्दन जी, सादर ! “”राजनीति का जादूगर, सब कुछ गायब कर देगा, वतनपरस्ती अभी सलामत, कौमी एकता है मेहफूज !”" बेबस आत्मा की आवाज ! जनता की आवाज ! जन-जन का दर्द बयान करती रचना ! हार्दिक बधाई !

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    शशि सर , आम आदमी की मनोदशा को समझने और समझाने का प्रयास किया , आपका सस्नेह स्वर मिला , आपका उपकार है मुझ पर

    jlsingh के द्वारा
    May 4, 2012

    बिलकुल सही! पर मरना मना है! गिरना मना है उठकर सम्हलना और गिरे हुए को उठाना तभी हम सभी रह पाएंगे महफूज! सुन्दर रचना पर बधाई!

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    JL SINGH साहब , आपके वैचारिक समर्थन और प्रोत्शाहन के लिए आपका आभारी हूँ

May 3, 2012

……………….. अल्लाह जाने क्या-क्या रंग दिखता है आदमी, यहाँ कही बंदा तो कही खुदा बनाता है आदमी, यह आदमी की ही फितरत है और आदमी ही है, क़त्ल करके, खुद को महफूज बतलाता है आदमी………………….अनिल कुमार ‘अलीन’

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    अनिल भाई , आपने अपने स्वर को क्या खूब आवाज दी , आपके शायराना अंदाज ने कह दिया है आपके दिल का हाल

nishamittal के द्वारा
May 3, 2012

थोड़े शब्दों में सारी पीड़ा को व्यक्त कर रही है,आपकी रचना चन्दन राय जी.

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    निशा मेम, आम आदमी की मनोदशा को समझने और समझाने का प्रयास किया , आपका सस्नेह स्वर मिला , आपका आभार

Rajesh Dubey के द्वारा
May 3, 2012

आम आदमी की पीड़ा को दर्शाती ग़ज़ल का भाव सुन्दर है. कम शब्दों में आपने सारी पीड़ा को कह डाला है. बहुत सुन्दर.

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    दुबे सर , आपकी उपस्थिति हमेशा मेरा मनोबल मजबूत करती है , आपने आम आदमी के दर्द को समझा , अच्छा लगा

rajkamal के द्वारा
May 2, 2012

Aadrniy खुशबूदार चन्दन जी ….. सादर अभिवादन ! मन का सकूँ गायब हो रहा है मेरे भारत महान में यह क्या हो रहा है आपकी इस रचना की खुशबू इस बार भी है महफूज मुबारकबाद

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    राजकमल साहब , जब तक आप है हमारे साथ ,हम है महफूज , बिन आपके स्नेह के, हम तो है बस धूल, आप अपना स्नेह बरसते रहे

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 2, 2012

देखो अब ये हालात है की क्या-क्या गायब कर रही राजनीती , गनीमत है अभी वतनपरस्ती है सलामत, और कौमी एकता है मेहफूज …. चन्दन जी नमस्कार , हूँ अठाईस रुपया वाले गरीब है बाबूजी के बाद .. ये महफूज … आप तो हैट्रिक लगा रहे है जनाब … बहुत ही मार्मिक और वास्तविक चित्रण किया है …. आज की वस्तुस्थिति का बधाई आपको

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    महिमा जी , देखीय ये तो आपका स्नेही मन है , जो आपको मेरी रचनाये इतनी पसंद आ रही है , HATTRICK क्या ,में तो CENTUARY मार दूंगा , यदि आप लोगो का सहयोग रहा तो आपके सुन्दर शब्दों के लिए आपका आभार

vinitashukla के द्वारा
May 2, 2012

वर्तमान हालात पर तीक्ष्ण कटाक्ष. सार्थक रचना पर बधाई.

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    विनीता मेम, आम आदमी की मनोदशा को समझने और समझाने का प्रयास किया , आपका सस्नेह स्वर मिला , आपका आभार

prashantsingh के द्वारा
May 2, 2012

अति उत्तम

    चन्दन राय के द्वारा
    May 3, 2012

    प्रशांत मित्र , आपका आभार, आपने सीधे अपने मन की बात कह दी

RAHUL YADAV के द्वारा
May 2, 2012

चन्दन जी नमस्कार, कौन कहता है कि फूल से पत्थर नहीं टूटतें जरा चन्दन भाई की रचना तो पढ़कर देखो यारो।……………सार्थक रचना ।

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    राहुल भाई , अरे मित्र , यह रचना क्या है कुछ भी नहीं , आप के अन्दर वो भविष्य , संभावनाए है जिस पर भारत टिका हुआ , तो मित्र आप की शक्ति सामर्थ्य के आगे तो आकाश भी छोटा है , आपके अमूल्य शब्दों से आपका ऋणी हो गया हूँ

ashishgonda के द्वारा
May 2, 2012

चन्दन भाई! आपने हर बार की तरह इस बार भी बहुत सुन्दर प्रसंग और बहुत सुन्दर पंक्तियों के साथ आगमन किया है मैं आपको इसके लिए धन्यवाद देता हूँ.

    चन्दन राय के द्वारा
    May 4, 2012

    आशीष गोंडा जी , आपके अमूल्य शब्दों से आपका ऋणी हो गया हूँ, आपका आभार


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