कलम...

{ "हम विलुप्त हो चुकी "आदमी" नाम की प्रजातियाँ हैं" / "हम कहाँ मुर्दा हुए हमें पता नहीं".....!!! }

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"परमपूज्य पिता जी"

Posted On: 22 Apr, 2012 Others में

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पिता जी पठार है ,

अडिग हिमालय अवतार है !

पूरब के सूरज से पक्के ,

आदर्श,उसूलों से भीष्माचार है !

***

ललाट से छिटकती कौमुदी हिमकर ,

भृकुटियों में मर्यादा सार है !

बाजुओं में साधे हर दुशाध्य ,

पिता जी गुणों के गुलाब हैं !

***

भुटिया खुय्याणी से कड़क तीखे ,

पर मीठी चाशनी भी अपार हैं !

मितभाषी निरीह पिता जी ,

प्रेम पावस की शीतल बयार हैं  !

***

सुख के अकाल में भी ,

सजीले हरे सावन है पिता जी  !

विषमताओ के जेठ में भी,

खुशियों के चेरापूंजी मेघ हैं पिता जी !

***

सत्य उपासक सत्यनुयायी तात,

लोलुपता धूर्तता से बेजार हैं !

ईमानदारी की पावन मूरत ,

हर अन्याय पर चंद्रहास हैं !

***

भोले हैं सरल भोलेनाथ से ,

सर्वजन प्रेमी नारायणी विचार हैं !

इंसानियत के पालक-पोषक  ,

अरिओं के महाकाल हैं !

***

चाँदी-चन्दन के  पलने में पाला मुझको ,

चैन-सुकून के स्वर्ण बिछोने पर सुलाया !

मै घुटुरनि था घिसटता ,

मुझे खड़ा किया,उड़ना सिखाया !

***

लाकर दिए मट्टी-काठ चंद्रमा से ,

हर हठ-जिद्द पर तारों तक को दिलवाया !

शिक्षा का अनमोल वरदान दिया ,

किस्मत को चमकता मार्तंड बनाया !

***

और सिखाया सुन्दरता का अर्थ सद्कर्म ,

मानवता ही सबसे बड़ा धर्म !

सबक के आत्मसम्मान सबसे बड़ी पूंजी ,

चरित्र का खोना है  सबसे बड़ा हनन !

***

कभी नीम सी डांट-डपट  की घोटन-घुट्टी पिलाते है ,

कभी कभी बदन पर बेंत उगाते है पिता जी !

जानता हूँ गीली नर्म मिटटी हूँ जीवन चाक पर,

मेरे सारे दोष काट-छांट मुझे गुणी बनाते है पिता जी !

***

मै चाहे मुट्ठी मे आसमा लाकर दिखा दूँ ,

पर मीठी झड़क से ही काम चलाते है पिता जी !

उनके अधरों पर चाहे ना खिले  शाबाशी ,

पर उनके फूले सीने से जान जाता हूँ जी !

***

होता हूँ कमजोर,बीमार बहुत जब ,

जग कर बगल मे सारी रात बिताते है पिता जी!

मै चाहे कुछ भी न बोलूं जुबां से ,

पर मेरा दर्द जान जाते हैं पिता जी !

***

मेरे सपनो की खातिर त्यागी बन ,

बदन को अथक मशीन बनाते हैं पिता जी !

रोज शाम लाते है आम,चाकलेट और जलेबी,

मेरे एक आंसूं पर तड़प जाते है पिता जी !

***

किवदंती जो पिता चरणों मे समय बिताते हैं ,

पिता हित मे हँसते हँसते वन को जाते है !

बस वो ही राम, श्रवण बैकुंठ पंहुचते है ,

बस वो ही तातप्रेमी मोक्ष को पाते हैं !

***

निर्गुण निराकार हैं पिता जी ,

मेरे लिए मंदिर,मजार ,चार धाम है पिता जी !

मेरी निर्जन पतवार के खेवनहार,

मेरे अराध्य इष्टदेव, सर्व संसार ” परमपूज्य पिता जी ” !

********

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2178 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ambric04 के द्वारा
July 21, 2012

बहुत अच्छे ,भावुक कर दिया

चन्दन राय के द्वारा
May 12, 2012

कविता जी , इक जनश्रुति है की , यत्र बसते नारी , तत्र रमन्ते देवता ,तो यह तो सत्य है की आपके मंच पर मेरे लिए उगाये स्नेह के अंकुर , पुष्प बन अब महक रहे और जनमानस चेतना को प्रफ्फुलित कर पा रहा हु ,आपका ऋणी हूँ , नारी शक्ति में बड़ी ताक़त होती है , इक बात और स्वीकार लेता हूँ और मानता हूँ यदि किसी लेख , कविता को नारी अपने शब्द नहीं देती तो वो रचना महान नहीं हो पाती , आपका तहे दिल से शुक्रिया

    Keischa के द्वारा
    July 11, 2016

    Never seen a betetr post! ICOCBW

Kavita Rawat के द्वारा
May 11, 2012

परमपूज्य पिता जी  को नमन  बहुत सुन्दर रचना

चन्दन राय के द्वारा
May 10, 2012

मनु जी , ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , इक जनश्रुति है की , यत्र बसते नारी , तत्र रमन्ते देवता ,तो यह तो सत्य है की आपके मंच पर मेरे लिए उगाये स्नेह के अंकुर , पुष्प बन अब महक रहे और जनमानस चेतना को प्रफ्फुलित कर पा रहा हु ,आपका ऋणी हूँ , नारी शक्ति में बड़ी ताक़त होती है , इक बात और स्वीकार लेता हूँ और मानता हूँ यदि किसी लेख , कविता को नारी अपने शब्द नहीं देती तो वो रचना महान नहीं हो पाती , आपका तहे दिल से शुक्रिया

मनु (tosi) के द्वारा
May 7, 2012

चन्दन जी नमस्कार !आपकी ये रचना सचमुच बहुत अच्छी है … पंक्तियाँ भाव-विभोर करती हैं … आपको बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक बनने पर मैं शुभकामना नहीं दे पाई थी पर अब दे रही हूँ स्वीकार कीजिये … बधाई

chaatak के द्वारा
May 2, 2012

चन्दन राय जी, सादर अभिवादन, आपकी इस बेहतरीन रचना पर देर से पहुँचने के लिए माफ़ी चाहता हूँ| दिल से निकली ये पंक्तिया दिल तक असर करती हैं पिता सचमुच सागर, हिमालय, कल्पवृक्ष सबकुछ होता है| अच्छी पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

    chandan rai के द्वारा
    May 3, 2012

    चातक भाई आपके बेशकीमती शब्द नगीनो की चमक ने मेरे मंच की चमक को कोहिनूर से भी ज्यादा चमकदार कर दिया , आपके शब्द आभूशनो से आज कुबेर धनी हो गया , आपका ऋणी हूँ

चन्दन राय के द्वारा
May 2, 2012

DEAR ALL jagran family, Editors, You all have poured your blessings, love affection thats encouarge me so much that i have able to write some thing so special ,, pls. keep pouring your blessings, thanks once again from bottom of my heart

    Symona के द्वारा
    July 11, 2016

    I can already tell that’s gonna be super heupfll.

sanjay dixit के द्वारा
May 2, 2012

मित्रवर चन्दन जी नमस्कार सर्वप्रथम बेस्ट ब्लागर बनने पर बधाई ,पिता के प्रति इन भावो को नमन ,बहुत सुन्दर

    चन्दन राय के द्वारा
    May 2, 2012

    संजय साहब सभी लोगो में अपने माता पिता ले लिए प्यार अपार होता है पर उन्हें ये पता होता है की माँ बाप लाख गलती पर भी अपना प्यार कम नहीं करेंगे , इसलिय हम अपना प्यार दिखाते ही नहीं , आपके सुन्दर मनोहारी भावो से आपका ऋणी हो गया हूँ आपकी स्तुति से गद हद हूँ

Deepak Gupta के द्वारा
May 2, 2012

चन्दन जी… बहुत ही भावुक बहुत ही न्यायसंगत लेख आपका ..इसके लिए आपको धन्यवाद .. मैंने जब पहला लेख लिखा था इस मंच पर तब आपकी दी गयी प्रतिक्रिया से मुझे बहुत ही उत्साह मिला और आज आपकी इस क्रति को पढ़ कर आपको प्रणाम करने का मन कर रहा है इसीलिए …. मेरा प्रणाम स्वीकार करें… इसी तरह हमें अपनी सुन्दर – सुन्दर रचनाओं का रसपान krate रहें धन्यवाद

    चन्दन राय के द्वारा
    May 2, 2012

    दीपक भाई , आपके इतने उदार शब्दों और स्तुति से जो ताकत मिलती है , वो रुकने नहीं देती , मेरा तो ये प्रयास है की हर नव आगुन्तक को में अपना समर्थन दे सकूँ , सायद कई दफा आप तक न पहुच पाऊं पर मुझे सबका ध्यान अवस्य रहता है आपके सुन्दर मनोहारी भावो से आपका ऋणी हो गया हूँ आपकी स्तुति से गद हद हूँ

gauravsaxena के द्वारा
May 2, 2012

speech-less…….. thanks buddy

    चन्दन राय के द्वारा
    May 2, 2012

    गौरव सक्सेना जी , आपके मन के भाव शब्दों से कंही ऊपर है , आपका धन्यवाद

चन्दन राय के द्वारा
May 1, 2012

सभी आदरणीय सज्जन , यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते , रमन्ते तत्र देवता …..,,यह सही श्लोक है, देखीय मुझे शास्त्र श्लोक का ज्ञान तो है नहीं , इसलिय निचे सभी नारी शक्ति को कहे श्लोक गलत हो सकते है , पर मन के भाव सच्चे है पर में यह श्लोक सभी नारी शक्ति को समर्पित करता हूँ

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    May 1, 2012

    भाई आज मजदूर दिवस के दिन आप नारी लोगों को खुश काहे कर रहें है……….ज़रा प्रकाश डाला जाए…….

    चन्दन राय के द्वारा
    May 2, 2012

    आनंद भाई , आपको सही बता रहा हूँ , समय की इतनी ज्यादा किल्लत है की लाख चाहकर भी समय बमुश्किल निकाल पा रहा हूँ ,मैंने भी मजदुर दिवस पर अपनी बात रखने की सोची थी ,पर चाहकर भी नहीं कह पाया , वैसे भी इतने गुनी लोगो ने अपनी बात रख दी , जो खुद ही अपने आप में पूरक है , पर आपको वादा करता हूँ कुछ समय इस महीने वह बात जरुरर रखूंगा आपका मुक्तभाव से किया आह्वाहन नितार्थक नहीं होगा

चन्दन राय के द्वारा
May 1, 2012

योगी भाई , आपका मंच पर होना ही बहुत कुछ कह जाता है , आपके अमूल्य समय और सस्नेह शब्दों के लिए आपका ऋणी हूँ

yogi sarswat के द्वारा
May 1, 2012

ब्लोग्गर ऑफ़ दी वीक होने पर हार्दिक बधाई मित्रवर ! बहुत बहुत शुभकामनाएं , आगे भी अच्छा लिखते रहोगे !

Tufail A. Siddequi के द्वारा
May 1, 2012

चन्दन भाई साहब सादर अभिवादन, बेस्ट ब्लौगर बनने पर आप को हार्दिक बधाई !! पिता के प्रति आपके उदगार अति सुन्दर और भावपूर्ण. http://siddequi.jagranjunction.com

    चन्दन राय के द्वारा
    May 1, 2012

    तुफैल भाई सभी लोगो में अपने माता पिता ले लिए प्यार अपार होता है पर उन्हें ये पता होता है की माँ बाप लाख गलती पर भी अपना प्यार कम नहीं करेंगे , इसलिय हम अपना प्यार दिखाते ही नहीं , आपके सुन्दर मनोहारी भावो से आपका ऋणी हो गया हूँ आपकी स्तुति से गद हद हूँ

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 30, 2012

चन्दन जी, सप्रेम ! आप ने इस अनुपम सर्जना से स्वयं पर से पिता का क़र्ज़ उतर लिया | उत्तम कृति व बेस्ट ब्लौगर बनने पर आप को बधाई !!

    चन्दन राय के द्वारा
    May 1, 2012

    आचार्य विजय गुंजन साहब , ये आपका बड़प्पन है , आप जैसे अजीम बेनजीर विद्वान् जब हम गौण की झोपडी तक आते है तो प्रकाश होना लाजिमी है , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है

Meenakshi Srivastava के द्वारा
April 30, 2012

चन्दन राय जी,” बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ द वीक ” बनने की आपको ढेरों बधाइयाँ . बहुत कम लोग हैं जो अपने पिता या – माता -पिता के प्रति ऐसे उदगार रखतें हैं ; आपके इस प्रकार वर्णन से आपका व्यक्तित्व उजागर होता है. आशा है आपकी ये रचना दूसरों को भी मार्ग-दर्शन करने में सहायक होगी , प्रेरणादायी होगी . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    चन्दन राय के द्वारा
    May 1, 2012

    मिनाक्षी श्रीवास्तव मेम, ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , इक जनश्रुति है की , यत्र बसते नारी , तत्र रमन्ते देवता ,तो यह तो सत्य है की आपके मंच पर मेरे लिए उगाये स्नेह के अंकुर , पुष्प बन अब महक रहे और जनमानस चेतना को प्रफ्फुलित कर पा रहा हु ,आपका ऋणी हूँ , नारी शक्ति में बड़ी ताक़त होती है , इक बात और स्वीकार लेता हूँ और मानता हूँ यदि किसी लेख , कविता को नारी अपने शब्द नहीं देती तो वो रचना महान नहीं हो पाती , आपका तहे दिल से शुक्रिया

ित्रलोचन के द्वारा
April 29, 2012

पुत्रधर्म की िशक्षा से भरी पौराणिकी में िरक्तिपूर्ति-सी यह कविता पाठकों को अच्छा िपता बनने के िलए प्रेरित करेगी। स़ाधुवाद । धन्यवाद ।

    चन्दन राय के द्वारा
    April 30, 2012

    त्रिलोचन साहब , कलम की पहचान पाठक से है , और उसकी स्तुति उसका सम्मान , आपका आभार

चन्दन राय के द्वारा
April 29, 2012

सूबे सिंह साहब , आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है आपका आभार

sube singh sujan के द्वारा
April 28, 2012

बहुत ही अच्छी लगी यह रचना….. बधाई चन्दन जी

vaidya surenderpal के द्वारा
April 28, 2012

चन्दन राय जी नमस्कार । जीवन मेँ माता के साथ साथ पिता का स्थान भी अपनी जगह बहुत महत्व रखता है । पिताजी के प्रति भावपूर्ण रचना के लिए बधाई ।

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    वैद्य सर , ये आपका बड़प्पन है , आप जैसे अजीम बेनजीर विद्वान् जब हम गौण की झोपडी तक आते है तो प्रकाश होना लाजिमी है , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है

s.p. singh के द्वारा
April 28, 2012

चन्दन राय जी पहले तो बधाई स्वीकार करें. अतिसुन्दर रचना, सरस ,सरल ,अविरल , कल-कल,चंचल, गंगा की धार जैसे ?

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    स,प सिंह सर , आप जैसे अजीम बेनजीर विद्वान् जब हम गौण की झोपडी तक आते है तो प्रकाश होना लाजिमी है , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है

omprakash pareek के द्वारा
April 28, 2012

चंदनजी, आपको साधुवाद. यह रचना वसंत की मधुर बयार सी मन को झंकृत कर गयी. भाषा की प्रांजलता, आंचलिक प्रभाव, माकूल मुहावरे और सरस उपमाओं वाली इस रचना की जितनी प्रशंसा की जाए थोड़ी होगी.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    April 28, 2012

    मैं भी ओमप्रकाश जी के शब्दों में ही अपनी भावनाओं को भी पाता हूँ,इस रचना ने भीतर तक प्रभावित किया,अत्यंत उत्तम रचना,जितने शब्द अर्पित करूँ,पर्याप्त नहीं लगेंगे.बहुत शानदार.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    राहुल साहब , ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , कलम की पहचान पाठक से है , और उसकी स्तुति उसका सम्मान , आपका आभार

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    पारीक साहब , आपके बेशकीमती शब्द नगीनो की चमक ने मेरे मंच की चमक को कोहिनूर से भी ज्यादा चमकदार कर दिया , आपके शब्द आभूशनो से आज कुबेर धनी हो गया , आपका ऋणी हूँ

jlsingh के द्वारा
April 28, 2012

चन्दन जी ,’बेस्ट ब्लोगेर ऑफ़ दी वीक’ बनने की बधाई स्वीकार करें .कविता पर प्रतिक्रिया तो मैंने पहले ही दे दी थी एक बार पुन: नमन कविता को और आपके माता पिता दोनों को!

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    सिंह सर , ये आपका बड़प्पन है आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है

minujha के द्वारा
April 27, 2012

चंदन जी सबसे पहले रचना की बधाई,माता-पिता के लिए हम कुछ भी कर दे वो कम है…,उनके सम्मान में आपने जो लिखा वो अक्षरश सत्य है ,आभार प्रकट करने का एक बहुत अच्छा तरीका..बधाई उसके बाद बेस्ट ब्लॉगर बनने की बधाई,जिसकी ये रचना सही मायनों में हकदार भी है….,लिखते रहें

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    मीनू झा जी ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , इक जनश्रुति है की , यत्र बसते नारी , तत्र रमन्ते देवता ,तो यह तो सत्य है की आपके मंच पर मेरे लिए उगाये स्नेह के अंकुर , पुष्प बन अब महक रहे और जनमानस चेतना को प्रफ्फुलित कर पा रहा हु ,आपका ऋणी हूँ , नारी शक्ति में बड़ी ताक़त होती है , इक बात और स्वीकार लेता हूँ और मानता हूँ यदि किसी लेख , कविता को नारी अपने शब्द नहीं देती तो वो रचना महान नहीं हो पाती , आपका तहे दिल से शुक्रिया

vinodkumar के द्वारा
April 27, 2012

chandan ji, आपकी “मेरे अराध्य इष्टदेव, सर्व संसार ” परमपूज्य पिता जी ” पंक्ति ही पूरी कविता का सार कह देती है. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    विनोद सर , ये आपका बड़प्पन है आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है

vasudev tripathi के द्वारा
April 27, 2012

चन्दन जी, एक बहुत ही भावुक व महान विचारों से सुसज्जित कविता है आपकी| सच ही है- मै चाहे मुट्ठी मे आसमा लाकर दिखा दूँ , पर मीठी झड़क से ही काम चलाते है पिता जी ! उनके अधरों पर चाहे ना खिले शाबाशी , पर उनके फूले सीने से जान जाता हूँ जी ! ब्लॉगर ऑफ़ थे वीक बन्ने पर हार्दिक बधाई!!

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    वासुदेव मित्र , ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है

Madhur Bhardwaj के द्वारा
April 27, 2012

भाई चन्दन जी, सर्वप्रथम आप मेरी और से सप्ताह के बेस्ट ब्लागर बनने के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें! चन्दन जी मैंने आज तक बहुत सी कवितायेँ पड़ीं हैं मगर पिता के लिए समर्पित कविता आज पहली बार पड़ी है! सच कहूँ तो कविता की प्रशंसा करने के लिए उपयुक्त शब्दों का चयन नहीं कर पा रहा हूँ! इसलिए सिर्फ इतना ही कह सकूँगा कि आपकी अपने पूज्यनीय पिताजी के लिए समर्पित कविता को बेस्ट कविता चुन कर जागरण मंच ने आपको वो सम्मान दिया है जिसके लिए आपकी कविता सही मायने में हकदार है! मैं आपकी कविता के अन्दर छिपे हुए पितृ प्रेम के भावों को महसूस कर आपके पिता को दंडवत प्रणाम करता हूँ, यक़ीनन आपके पिता जब इस कविता को पड़ेंगे तो आप पर उन्हें गर्व होगा! मेरा निवेदन है कि आप अपने पिताजी को अपनी यह कविता ज़रूर पद्वायें……धन्यवाद्!

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    मधुर साहब , लोगो में अपने माता पिता ले लिए प्यार अपार होता है पर उन्हें ये पता होता है की माँ बाप लाख गलती पर भी अपना प्यार कम नहीं करेंगे , इसलिय हम अपना प्यार दिखाते ही नहीं , आपके सुन्दर मनोहारी भावो से आपका ऋणी हो गया हूँ, आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है आपका और मेरी इच्छा से अवश्या में यह कविता पिता को भेंट करूंगा

Seema के द्वारा
April 27, 2012

हिंदी साहित्य में कविता अपना मार्ग पाने की दिशा में अग्रसर है ,आप की कविता ऐसा ही कुछ कह रही है ,बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ the वीक -बनने पर हमारी बहुत -बहुत शुभकामनाएँ …..!

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    सीमा मेम, इक जनश्रुति है की , यत्र बसते नारी , तत्र रमन्ते देवता ,तो यह तो सत्य है की आपके मंच पर मेरे लिए उगाये स्नेह के अंकुर , पुष्प बन अब महक रहे और जनमानस चेतना को प्रफ्फुलित कर पा रहा हु ,आपका ऋणी हूँ , नारी शक्ति में बड़ी ताक़त होती है , इक बात और स्वीकार लेता हूँ और मानता हूँ यदि किसी लेख , कविता को नारी अपने शब्द नहीं देती तो वो रचना महान नहीं हो पाती , आपका तहे दिल से शुक्रिया

ajay kumar pandey के द्वारा
April 27, 2012

आदरणीय चन्दन राय जी बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ the वीक बनने की हार्दिक बधाई आपको देते हुए एक असीम ख़ुशी हो रही है और ज्यादा ख़ुशी तो इस कविता को पढ़कर हो रही है की आपने अपनी कविता में अपने पिताजी का गुणगान किया है ऐसे लेखक बहुत ही कम मिलते हैं जो अपने पिता के बारे में लिखते हैं आपने पहली बार इस मंच को कृतार्थ किया है अपने पिता को सम्मान देकर खेर आपको हार्दिक बधाई बेस्ट ब्लॉगर बनने की आपकी कविता इस सम्मान का हक़दार भी थी धन्यवाद

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    अजय मित्र , लोगो में अपने माता पिता ले लिए प्यार अपार होता है पर उन्हें ये पता होता है की माँ बाप लाख गलती पर भी अपना प्यार कम नहीं करेंगे , इसलिय हम अपना प्यार दिखाते ही नहीं , आपके सुन्दर मनोहारी भावो से आपका ऋणी हो गया हूँ, आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है

satya sheel agrawal के द्वारा
April 27, 2012

चन्दन जी ,’बेस्ट ब्लोगेर ऑफ़ दी वीक’ बनने की बधाई स्वीकार करें .सुन्दर कविता

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    सर , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है, आपका आभार

Dr.D.K.Mall के द्वारा
April 27, 2012

वाह क्या बात है  शायद पहली बार पिता को समर्पित कविता पढ़ी । बधाई हो।

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    सर ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है

rekhafbd के द्वारा
April 26, 2012

चन्दन जी ,बेस्ट ब्लागर ऑफ़ द वीक बनने पे बधाई ,परम पूज्य पिता जी में पिता के प्रति आपकी भावनाओं को मेरा नमन

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    रेखा मेम, इक जनश्रुति है की , यत्र बसते नारी , तत्र रमन्ते देवता ,तो यह तो सत्य है की आपके मंच पर मेरे लिए उगाये स्नेह के अंकुर , पुष्प बन अब महक रहे और जनमानस चेतना को प्रफ्फुलित कर पा रहा हु ,आपका ऋणी हूँ , नारी शक्ति में बड़ी ताक़त होती है , इक बात और स्वीकार लेता हूँ और मानता हूँ यदि किसी लेख , कविता को नारी अपने शब्द नहीं देती तो वो रचना महान नहीं हो पाती , आपका तहे दिल से शुक्रिया

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 26, 2012

प्रिय खुशबूदार चंन्दन जी आपके साथ -२ आपके पिता जी की खुशबु भी इस मंच पर फैलती चली जा रही है ….. इस हफ्ते का सुपरस्टार बन जाने पर हार्दिक बधाई

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    राजकमल साहब , आपके मंच पर मेरे लिए उगाये स्नेह के अंकुर , पुष्प बन अब महक रहे और जनमानस चेतना को प्रफ्फुलित कर पा रहा हु ,आपका ऋणी हूँ ,

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
April 26, 2012

चन्दन जी, बेस्ट ब्लोगर ऑफ़ द वीक चुने जाने पर हार्दिक बधाई………………………………

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    अंकुर साहब , कलम की पहचान पाठक से है , और उसकी स्तुति उसका सम्मान , आपका आभार

alkargupta1 के द्वारा
April 26, 2012

चन्दन जी , सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर के सम्मान प्राप्ति हेतु हार्दिक बधाई

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    अलका मेम, इक जनश्रुति है की , यत्र बसते नारी , तत्र रमन्ते देवता ,तो यह तो सत्य है की आपके मंच पर मेरे लिए उगाये स्नेह के अंकुर , पुष्प बन अब महक रहे और जनमानस चेतना को प्रफ्फुलित कर पा रहा हु ,आपका ऋणी हूँ , नारी शक्ति में बड़ी ताक़त होती है , इक बात और स्वीकार लेता हूँ और मानता हूँ यदि किसी लेख , कविता को नारी अपने शब्द नहीं देती तो वो रचना महान नहीं हो पाती , आपका तहे दिल से शुक्रिया

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 26, 2012

प्रिय चन्दन जी, सस्नेह. पिता की महिमा गान, एवं best ब्लागर हेतु बधाई.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    सर ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आपकी स्तुति ही मेरा मनोबल है

Tamanna के द्वारा
April 26, 2012

चंदन जी… बहुत बहुत सुंदर रचना… मुझे लगता है मंच पर पहली बार किसी लेखक ने पिता को समर्पित कोई रचना लिखी है… वास्तव में आपके भाव और अपने पिता के प्रति आपका दृष्टिकोण सम्मानजनक है… ब्लॉगर ऑफद वीक बनने के लिए हार्दिक बधाई

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    तमन्ना जी , भी लोगो में अपने माता पिता ले लिए प्यार अपार होता है पर उन्हें ये पता होता है की माँ बाप लाख गलती पर भी अपना प्यार कम नहीं करेंगे , इसलिय हम अपना प्यार दिखाते ही नहीं , आपके सुन्दर मनोहारी भावो से आपका ऋणी हो गया हूँ इक बात और स्वीकार लेता हूँ और मानता हूँ यदि किसी लेख , कविता को नारी अपने शब्द नहीं देती तो वो रचना महान नहीं हो पाती , आपका तहे दिल से शुक्रिया

sinsera के द्वारा
April 26, 2012

वाह चन्दन जी वाह!!!! आपकी कविता तो लाजवाब ही थी लेकिन आपने मेरी प्रतिक्रिया का जो बेहतरीन जवाब दिया था , ये बेस्ट ब्लॉगर की उपाधि उसी के कारण मिली है……(याद कीजिये, मिस इंडिया कॉन्टेस्ट का लास्ट राउंड:-)) अब तो अपने पापा को ये कविता पढ़ा दीजिये..और भावुक होने का मज़ा उठाइए ….

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    April 26, 2012

    मित्र मैं भी अपनी बधाई सन्देश यहीं पर घुसा देता हूँ क्या पता सरिता दीदी के कमेन्ट के कर्म से अगला नंबर मेरा लग जाए…………..हा हा हा आपको ब्लोगर आफ द वीक की हार्दिक बधाई

    sinsera के द्वारा
    April 26, 2012

    प्रिय आनंद जी , मेरा आशीर्वाद सदा आपके साथ है.यहीं नहीं, जीवन के हर क्षेत्र में….

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    April 27, 2012

    aadrniy sarita ji priy anand ji ko pyaar me saflta ka mool mantar + aashirwad + tips dijiyega (apne shishy ke liye chintatur ek guru ) 

    sinsera के द्वारा
    April 27, 2012

    मान्यवर राजकमल जी, नमस्कार, आशीर्वाद तो आज के ज़माने में एकदम फालतू चीज़ है, मुफ्त में मिलती है, जब चाहो उठा के किसी के सर पर धप्प से रख दो..इसी लिए मैं मांगती भी रहती हूँ और बाँटती भी रहती हूँ. सफलता का मूल मन्त्र और टिप्स जैसी कीमती चीजें मेरे पास कहाँ है……होती तो मैं सफल न होती…….??

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    सरिता जी , इक जनश्रुति है की , यत्र बसते नारी , तत्र रमन्ते देवता ,तो यह तो सत्य है की आपके मंच पर मेरे लिए उगाये स्नेह के अंकुर , पुष्प बन अब महक रहे और जनमानस चेतना को प्रफ्फुलित कर पा रहा हु ,आपका ऋणी हूँ , नारी शक्ति में बड़ी ताक़त होती है , इक बात और स्वीकार लेता हूँ और मानता हूँ यदि किसी लेख , कविता को नारी अपने शब्द नहीं देती तो वो रचना महान नहीं हो पाती , आपका तहे दिल से शुक्रिया

    sinsera के द्वारा
    May 1, 2012

    चन्दन जी, क्षमायाचना के साथ कहना चाहती हूँ की एक गलती सुधार लीजिये.. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते , रमन्ते तत्र देवता …..,,यह सही श्लोक है, ..अर्थ तो आप जानते ही हैं…

    चन्दन राय के द्वारा
    May 1, 2012

    सरिता जी , देखीय मुझे शास्त्र श्लोक का ज्ञान तो है नहीं , और दूसरा आप मुझे क्षमा याचना मांग शर्मिन्दा कर रही है , हम सब एक परिवार की तरह है , मुझे तो सबसे ज्यादा जब अच्चा लगता है जब कोई मेरी कमी बताता है , वैसे बस कहना था तो दिल की बात कह दी थी

    sinsera के द्वारा
    May 1, 2012

    चन्दन जी , मुझे पता था कि आप सीखने के लिए उत्सुक रहते हैं इसीलिए बताया था, क्षमा मांगना तो एक बात कहने का तरीका होता है, that does not mean so…..अगर आप नहीं मानते तो हम क्षमा वमा को दरकिनार कर, सर पर चढ़ कर मनवाते …निश्चिन्त रहिये…

    Namari के द्वारा
    July 11, 2016

    Wait, I cannot fathom it being so stiawghtforrard.

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 26, 2012

चन्दन बधाई हो बेस्ट ब्लागर बन गये हैं आप.आपकी कविता  इसकी हकदार भी है.बधाई…..बधाई

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    मिश्र साहब , कलम की पहचान पाठक से है , और उसकी स्तुति उसका सम्मान , आपका आभार

omdikshit के द्वारा
April 26, 2012

चन्दन जी, बधाई…….बेस्ट ब्लागर की ,पिता के प्रति भाव की,भावुकता से परिपूर्ण कविता की.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    ॐ सर ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं ,

akraktale के द्वारा
April 26, 2012

आदरणीय चन्दन जी नमस्कार, पिता को परिवार से प्रेम के साथ ही घर में पुलिस की भूमिका भी निभाना पड़ता है. इसीलिए हमें उनका प्रेम कम नजर आता है. पिताके प्रेम में, सम्मान में उनकी भूमिका के प्रति आपकी स्नेहांजलि बहुत सुन्दर है.बधाई.

    akraktale के द्वारा
    April 26, 2012

    सादर, आपको ब्लोगेर ऑफ़ द वीक बनने के लिए बधाई.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    सर , उन सभी लोगो में अपने माता पिता ले लिए प्यार अपार होता है पर उन्हें ये पता होता है की माँ बाप लाख गलती पर भी अपना प्यार कम नहीं करेंगे , इसलिय हम अपना प्यार दिखाते ही नहीं , आपके सुन्दर मनोहारी भावो से आपका ऋणी हो गया हूँ आपकी स्तुति से गद हद हूँ

कुमार गौरव के द्वारा
April 26, 2012

चंदन जी, सर्वप्रथम तो बेस्ट ब्लॉगर ऑफ दी वीक बनने पर आपको बधाई. चलिए आज इस तथाकथित ‘लव/प्रेम/प्यार’ के युग में जिसमें लोग सिर्फ एक लड़की/लड़के से शादी के लिए अपने जन्मदाताओं को अप्रासंगिक बना देते हैं…कोई तो है जिसके ह्रदय में अपने माँ-बाप के लिए प्यार है…

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    गौरव मित्र , मित्र में भी उन लोगो सा ही हूँ , उन सभी लोगो में अपने माता पिता ले लिए प्यार अपार होता है पर उन्हें ये पता होता है की माँ बाप लाख गलती पर भी अपना प्यार कम नहीं करेंगे , इसलिय हम अपना प्यार दिखाते ही नहीं , आपके सुन्दर मनोहारी भावो से आपका ऋणी हो गया हूँ

anupammishra के द्वारा
April 26, 2012

शानदार शानदार शानदार…

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    अनुपम मिश्रा जी , आपका ऋणी हूँ

Jamuna के द्वारा
April 26, 2012

चंदन जी, बेस्ट ब्लॉगर ऑफ दी वीक बनने पर आपको बधाई.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    जमुना जी , बड़े दिवस बाद आपको मंच पर पाया , आपकी स्तुति से गद हद हूँ

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
April 26, 2012

प्रिय चंदन जी ये रचना मेरे मन को छू गयी थी बस गयी थी और जागरण जंक्शन और अन्य पाठकों ने आप को बेस्ट ब्लागर आफ दी वीक से नवाजा सुन ह्रदय गदगद हो गया ..शुभ कामनाएं ..अपने अनमोल खजाने यों ही लुटाते रहें और हिंदी साहित्य को गति देते रहें आभार ..जय श्री राधे भ्रमर ५

    चन्दन राय के द्वारा
    April 29, 2012

    भ्रमर साहब , ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आप खुद इतना उत्कृष्ट लिखते है और फिर भी मुझ गौण को अपने अनमोल शब्दों से नवाजा , आपका अभिनन्दन

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
April 24, 2012

जानता हूँ गीली नर्म मिटटी हूँ जीवन चाक पर, मेरे सारे दोष काट-छांट मुझे गुणी बनाते है पिता जी ! चन्दन जी लाजबाब क्या कहने धरोहर है ये रचना ..मन को छू गयी अभी शशि भाई ने शुरुआत की और आप ने सोने पर सुहागा कस दिया ..माँ पर तो अनेक रचनाएँ लिखी गयीं लेकिन पिताश्री के त्याग और वलिदान समर्पण को बहुत कम नमन किया गया ….हम सब को सुन्दर संस्कार देने वाले ..सत्कर्मों का आकर देने वाले हर पिता को नमन भ्रमर का … बधाई आप को भ्रमर ५

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    भ्रमर साहब , ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आप खुद इतना उत्कृष्ट लिखते है और फिर भी मुझ गौण को अपने अनमोल शब्दों से नवाजा , आपका अभिनन्दन

MAHIMA SHREE के द्वारा
April 24, 2012

चन्दन जी नमस्कार , क्या लिखा है आपने , बहुत अच्छे , आदरणीय शशिभूषण सर ने पूछा था ” दर्द पिता का समझे कौन ” और आपने पिता के दर्द , उनके बलिदान , त्याग , तपस्या और अनकहे प्रेम भाव सब लिख कर सभी पिताओ को मान दिया है … आपके पिता जी आप पे निसंदेह गर्व करेंगे .. .. और शशि सर को भी santusti मिली होगी की बच्चे है जो पिता के दर्द को समझते है …. बधाई आपको …

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    महिमा जी , आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , में क्या माता पिता पर जो भी लिखेगा वो रचना स्वत ही खुबसूरत बन पड़ेगी, पिता की छाया मेरे लिए जीवन मझदार के किनारे सा है , आप ने इस प्रेम को प्रमाणित किया आपका शुक्रिया

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    April 26, 2012

    और भई चन्दन जी महाराज …. कैसा लग रहा जनाब :) …. ईश्वर ने आपकी आवाज सुन ली जो दिल के गहराइयों से निकली थी .. मुबारक ….मुबारक … मुबारक ……. अब तो पिता जी को बताएँगे न .. :)

shashibhushan1959 के द्वारा
April 24, 2012

आदरणीय चन्दन जी, सादर ! आपकी इन पवित्र व मासूम भावनाओं को मेरा नमन ! “”चाँदी-चन्दन के पलने में पाला मुझको , चैन-सुकून के स्वर्ण बिछोने पर सुलाया ! मै घुटुरनि था घिसटता , मुझे खड़ा किया,उड़ना सिखाया !”" अद्भुत ! सम्मोहक ! खुले दिल और समर्पण भाव से लिखी गई इस रचना के लिए मेरी शताधिक हार्दिक बधाई ! (लेकिन….. क्षमा के साथ निवेदन :: थोड़ा परिश्रम और !!!)

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    सर , पित परकाष्ठा तक पंहुचना किसी कलम के लिए संभव नहीं , ऐसी करोरो बाते है जिनका में लिख भी नहीं पाया हूँ , मेरे जीवन का इक इक पल सवारने वाले पिता के गुणों का बखान कर लूँगा तो ज्ञान को पा लूंगा , और आपका ये विनम्र महात्मय सुझाव जरुर अनुकरणीय हैं , आपका तहे दिल से शुक्रिया

    Suzyn के द्वारा
    July 11, 2016

    If only there were more cleevr people like you!

Mohinder Kumar के द्वारा
April 24, 2012

पिता जी को अनेकों प्रकार से प्रभाषित करने के लिये आभार. प्रत्येक में उनकी महानता की एक झलक है. तभी तो कहते हैं जिन्होंने अपने माता पिता को पूज लिया उन्होंने सब देवों के पूजन का पुण्य पा लिया.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    मोहिंदर साहब , आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आप खुद इतना उत्कृष्ट लिखते है और फिर भी मुझ गौण को अपने अनमोल शब्दों से नवाजा , आपका अभिनन्दन

sadhna के द्वारा
April 24, 2012

कोई भी शब्द बहुत छोटा है आपकी कविता की तारीफ़ के लिए……

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    साधना जी , ये आपका बड़प्पन है और आपका आपके पिता के प्रति प्यार , आपके समय और शब्द दोनों का कर्जदार हो गया

ashishgonda के द्वारा
April 23, 2012

किवदंती जो पिता चरणों मे समय बिताते हैं , पिता हित मे हँसते हँसते वन को जाते है ! बस वो ही राम, श्रवण बैकुंठ पंहुचते है , बस वो ही तातप्रेमी मोक्ष को पाते हैं ! *** निर्गुण निराकार हैं पिता जी , मेरे लिए मंदिर,मजार ,चार धाम है पिता जी ! मेरी निर्जन पतवार के खेवनहार, मेरे अराध्य इष्टदेव, सर्व संसार ” परमपूज्य पिता जी ” बहुत सुन्दर भाव,,,,,नमन करता हूँ आपको तथा आपके भावों को .

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    आशीष भाई , आपने प्रशंशा का स्तुति गान कर के मन हर्षित कर दिया , आपके अनमोल समय और शब्दों के लिए आपका आभार

sinsera के द्वारा
April 23, 2012

चन्दन जी, नमस्कार, मैं सोच रही थी की शायद कोई बात ऐसी हो जो आप कहना भूल गए हों पर सब कुछ है …लेकिन फिर भी कम है..आप के पापा ने ये कविता पढ़ कर क्या कहा, बताइए गा…..

    shashibhushan1959 के द्वारा
    April 24, 2012

    आदरणीय सरिता जी, सादर ! क्या खूब प्रश्न है ! अब तो मैं भी जानने को उत्सुक हूँ !

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    सरिता जी , पिता का इक गंभीर स्वरूप का रूपक होते हैं , कभी भी ना पिता यह दर्शा पाता है की वह अपने पुत्र से कितना प्रेम करता है , ना ही पुत्र , जो आचार विचार पिता प्रदर्शित करते हैं वह पिता के स्नेह का अंश भी नहीं होता, पिता स्नेह के मामले में थोड़े संकोची ही होते हैं , रही बात मेरी तो मेरे पिता श्री को यह ज्ञात भी नहीं की में कविता लेखन करता हूँ , और आप को सुन के बड़ा अजीब लगेगा की मेरे अन्दर भी वो शर्मिला संकोच है जो ये साहस ही नहीं देता की में उन्हें कभी ये कविता भेट कर सकूँ , पर हाँ वो मेरे मौन रूप से भी जानते है की में उन्हें कयामत से ज्यादा चाहता हूँ , और पर में भी चाहता हूँ की यदि कभी किसी PRINT MEDIA में मेरी यह कविता प्रकाशित होती है तो में उन्हें जरुर यह कह कर दिखाउंगा की देखीय मेरी इक कविता प्रकाशित हुई है , यह सब लिखते लिखते भावुक हो रहा हूँ ,

D33P के द्वारा
April 23, 2012

पिता के कोमल स्नेह को कितनी ख़ूबसूरती से संवारा है आपने …….सच में इन भावनाओ का मुकाबला और कोई भावना नहीं कर सकती यही भावनाए बच्चो के ऊपर एक कवच की तरह उनको संबल प्रदान करती है …बहुत अच्छा बधाई

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    दीप्ती जी , मुझे लगता हर पिता का ऐसा ही रूप होता है , पर यह सत्य है की मेरे पापा सचमुच गुणों के गुलाब हैं , और उनके सबक ने मेरी जिन्दगी को सही रास्ते पर बढाया है ,,,,,,,,,,,,,,, और में क्या सर माता पिता पर जो भी लिखेगा वो रचना स्वत ही खुबसूरत बन पड़ेगी

alkargupta1 के द्वारा
April 23, 2012

चन्दन जी , पिता के अस्तित्त्व को बहुत ही सुन्दर शब्द दिए हैं…… उत्कृष्ट भावपूर्ण अभिव्यक्ति

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    अलका मेम, आपके शब्द आपकी सज्जनता के परिचायक हैं , आप खुद इतना उत्कृष्ट लिखते है और फिर भी मुझ गौण को अपने अनमोल शब्दों से नवाजा , आपका अभिनन्दन

jlsingh के द्वारा
April 23, 2012

निर्गुण निराकार हैं पिता जी , मेरे लिए मंदिर,मजार ,चार धाम है पिता जी ! मेरी निर्जन पतवार के खेवनहार, मेरे अराध्य इष्टदेव, सर्व संसार ” परमपूज्य पिता जी ” ! इससे अच्छी बात हो ही नहीं सकती ! इस बात को अगर मनुष्य समझ ले तो फिर काहे को रोना! नमन आपके पिताजी को और आपकी कविता को भी आप अपना दिल निकाल कर शब्दों में डाल देते हैं. बधाई!

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    सिंह साहब , में क्या माता पिता पर जो भी लिखेगा वो रचना स्वत ही खुबसूरत बन पड़ेगी, आपने मेरे पिता को सम्मान देकर मुझ को अपना गुलाम बना लिया है , आपके उत्साहवर्धक स्तुति के लिए आपका दिल से आभार

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
April 23, 2012

मित्र चन्दन, जी, एक और शानदार रचना के लिए बधाई. माँ – बाप का क़र्ज़ कभी भी नहीं चुकाया जा सकता. कविता में पूरी तरह से डूब गए कर लिखी गई है.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    अंकुर मित्र में क्या माता पिता पर जो भी लिखेगा वो रचना स्वत ही खुबसूरत बन पड़ेगी, आपके उत्साहवर्धक स्तुति के लिए आपका दिल से आभार

yogi sarswat के द्वारा
April 23, 2012

मित्रवर चन्दन राय जी ! पिता को समर्पित क्या खूब रचना दी है आपने इस मंच को ! वाह ! बहुत खूब !

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    योगी मित्र , आपकी सराहना से मन हर्षित है , आपकी स्तुति मेरा मनोबल है आपका शुक्रिया मित्र

Santosh Kumar के द्वारा
April 23, 2012

चन्दन जी ,.सदर नमस्कार बहुत ही सुन्दर भाव भरी अभिव्यक्ति ,..बहुत बहुत अच्छी ,.हार्दिक बधाई

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    संतोष जी , आपके अनमोल समय और शब्दों के लिए आपका आभार आपके उत्साहवर्धक स्तुति के लिए आपका दिल से आभार

rekhafbd के द्वारा
April 23, 2012

चंदन जी , मेरे आराध्य इष्टदेव ,सर्व संसार ,परमपूज्य पिता जी ,पिता के प्रति भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति ,धन्य है ऐसे पिता आप जैसा पुत्र पा कर ,प्रणाम

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    मेम, पिता की छाया मेरे लिए जीवन मझदार के किनारे सा है , आप ने इस प्रेम को प्रमाणित किया आपका शुक्रिया

jalaluddinkhan के द्वारा
April 23, 2012

पिता हमारे पालन -पोषण में अहम् भूमिका निभाते हैं.बिना पिता के इन्सान कटी पतंग की तरह होता है.आपकी कविता पिता को समर्पित बेहतरीन कविता है.बधाई स्वीकारें.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    जलालुद्दीन खान मित्र , में क्या माता पिता पर जो भी लिखेगा वो रचना स्वत ही खुबसूरत बन पड़ेगी, आपके उत्साहवर्धक स्तुति के लिए आपका दिल से आभार

krishnashri के द्वारा
April 23, 2012

प्रिय चन्दन जी बहुत सुन्दर भाव लिए कविता आपने प्रस्तुत की है , बधाई .

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    कृष्णा सर , आपके अनमोल समय और शब्दों के लिए आपका आभार

Rajesh Dubey के द्वारा
April 23, 2012

पिता जी पर सुन्दर कविता. पिता की बातें मानने वाले बैकुंठ पहुच जाते हैं, यह सत्य है.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    दुबे सर , आपके उत्साहवर्धक स्तुति के लिए आपका दिल से आभार आपके अनमोल समय और शब्दों के लिए आपका आभार

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 23, 2012

सुन्दर कविता,चन्दन जी. किवदंती जो पिता चरणों मे समय बिताते हैं , पिता हित मे हँसते हँसते वन को जाते है ! बस वो ही राम, श्रवण बैकुंठ पंहुचते है , बस वो ही तातप्रेमी मोक्ष को पाते हैं ! बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    झा साहब , आपने प्रशंशा का स्तुति गान कर के मन हर्षित कर दिया , आपके अनमोल समय और शब्दों के लिए आपका आभार

April 23, 2012

मेरे लिए मंदिर, मस्जिद, मजार, चार धाम है पिता जी…..भावनाओं की सुन्दर प्रस्तुतीकरण.!

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    अनिल भाई , आपके मन में भी अपने पिता के लिए कितना सम्मान हैं ये इस बात से पता लगता है की आपने उपरोक्त वाकया में मस्जिद भी जोड़ दिया , आपकी स्तुति के लिए शुक्रिया

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 23, 2012

चन्दन भाई जी नमस्कार..….. आपके परमपूज्य पिता जी को हमारा भी नमन…. काबिले तारीफ रचना…… बधाई……

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    अजय भाई , आज आप को इक बात बता देता हूँ की इस मंच पर कुछ अच्छे लोगो में आप हो आपने मेरे पिता को सम्मान देकर मुझ को अपना गुलाम बना लिया है , आपको मेरे कोटि कोटि कोटि नमन

dineshaastik के द्वारा
April 23, 2012

पितृभक्त चंदन जी आपकी पितृ महिमा को वर्णित  करती रचना एवं आपके पिताजी को नमन…..

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    दिनेश सर , आपने मेरे पिता को सम्मान देकर मुझ को अपना गुलाम बना लिया है , आपको मेरे कोटि कोटि कोटि नमन

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 22, 2012

मित्र चन्दन जी, नमस्कार जितनी तारीफ़ की जाय कम है……………….पिता को समर्पित आपकी सुन्दर शब्दों से बनी रचना को नमन

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    मित्र , में क्या माता पिता पर जो भी लिखेगा वो रचना स्वत ही खुबसूरत बन पड़ेगी, आपके उत्साहवर्धक स्तुति के लिए आपका दिल से आभार

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 22, 2012

प्रिय खुशबूदार चन्दन जी ….. सप्रेम नमस्कारम ! इतने ज्यादा गुण भरे है आपके पूज्य पिता जी में की हर कोई चाहेगा की काश उसके पिता जी भी इन्ही गुणों से भरपूर होते यह अपनाप में विलक्षण रचनाओं की श्रेणी में इसलिए आती है क्योंकि माता पर ही ज्यादातर लिखा गया है और लिखा जाता है :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    राजकमल साहब , मुझे लगता हर पिता का ऐसा ही रूप होता है , पर यह सत्य है की मेरे पापा सचमुच गुणों के गुलाब हैं , और उनके सबक ने मेरी जिन्दगी को सही रास्ते पर बढाया है ,,,,,,,,,,,,,,, और में क्या सर माता पिता पर जो भी लिखेगा वो रचना स्वत ही खुबसूरत बन पड़ेगी

    Ellie के द्वारा
    July 11, 2016

    Glad I’ve finally found sonhietmg I agree with!

punitajain के द्वारा
April 22, 2012

Very nice poem.Father is great.

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    PUNITA , yOU ARE MOST WELCOME , I AM OBLIGED ,FOR YOUR GOLDEN COMMENTS & PRECIOUS TIME

    Latasha के द्वारा
    July 11, 2016

    You’ve really captured all the eseiatsnls in this subject area, haven’t you?

nishamittal के द्वारा
April 22, 2012

पिता की छाया ऐसी ही होती है,सर पर ,चन्दन राय जी.बधाई

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    मेम, पिता की छाया मेरे लिए जीवन मझदार के किनारे सा है , आप ने इस प्रेम को प्रमाणित किया आपका शुक्रिया

    nishamittal के द्वारा
    April 26, 2012

    हार्दिक बधाई चन्दन जी और शुभकामनाएं

कुमार गौरव  के द्वारा
April 22, 2012

चन्दन जी नमस्कार पिता को समर्पित आपकी ये रचना वाकई प्रशंसनीय है. http://kg70.jagranjunction.com

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    गौरव दोस्त , आपकी सराहना से मन हर्षित है , आपका शुक्रिया मित्र

vikramjitsingh के द्वारा
April 22, 2012

मित्रवर चन्दन जी….. आपके परमपूज्य पिता जी को हमारा भी नमन….

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    विक्रम साहब , आपने मेरे पिता को सम्मान देकर मुझ को अपना गुलाम बना लिया है , आपको मेरे कोटि कोटि कोटि नमन

    vikramjitsingh के द्वारा
    April 26, 2012

    साथ ही आप को ”बेस्ट ब्लोगर ऑफ़ द वीक” बनने की हार्दिक शुभकामनायें…… अब एक पूरा हफ्ता ऐश करो…..टंगे रहो डिब्बी में…..हा…हा….हा….. हार्दिक शुभकामनायें

    Cathy के द्वारा
    July 11, 2016

    Your’s is a point of view where real intlielgence shines through.

सुधीर अवस्थी 'परदेशी' के द्वारा
April 22, 2012

काबिले तारीफ रचना । धन्यवाद पितु भक्त

    चन्दन राय के द्वारा
    April 24, 2012

    मित्रवर , आपकी उत्साहक प्रशंशा के लिए आपका आभार , में आपके मंच पर आना चाहता था , पर आपका लिंक नहीं खुला


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