कलम...

{ "हम विलुप्त हो चुकी "आदमी" नाम की प्रजातियाँ हैं" / "हम कहाँ मुर्दा हुए हमें पता नहीं".....!!! }

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खुदा नहीं पर खुदा सा है मेरा शहर

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mera shahr

. खुदा नहीं पर खुदा सा है मेरा  शहर


मेरी माँ सा नर्म है ,

और बाबूजी सा सख्त है मेरा शहर ,

चन्दनवणी॑॔ तन मे राममन है मेरा शहर ,

भारत माँ का लाडला राजकुंवर है मेरा शहर ,

खुदा नहीं पर खुदा सा है मेरा  शहर .

************

मंदिर चर्च मस्जिद गुरूद्वारे जाता है ,

भजन कीर्तन गुरुबाणी प्रभु सन्देश सुनाता है ,

भंडारे लंगर मे बैठ ईद सेवियां खाता है

लेकर हाथों मे प्रेमवीणा सडको पर ,

एक हैं हम एक बने गीत गाता है मेरा  शहर ,

खुदा नहीं पर खुदा सा है मेरा  शहर .

*************

पढ़ाता है लिखाता है खिलाता है किस्मत बनाता है ,

दिन रात सेवक सा दौड़ता रहता है मेरा  शहर ,

मै जब चैन से करवट बदलता हूँ बिस्तर पर,

बाहर मेरी हिफाजत मे होता है  मेरा  शहर,

सूरज डूबे चाहे चाँद उगे पर कँहा सोता है  मेरा  शहर,

खुदा नहीं पर खुदा सा है मेरा  शहर .

***********

पर आजकल कपटी भ्र्ष्टासुर पापियों ने,

चंद सर्प से पाखंडी विश्वाश्खातियो ने,

जहर पिला कर रख दिया चिता पर मेरा  शहर,

कोई आतंकवादी न बम फोड़े कंही,

कोई तो बचा लो मेरा शहर,

निकलो  हाथ मे ले ले झाड़ू

आओ साफ़ करे मेरा शहर,

खुदा नहीं पर खुदा सा है मेरा  शहर .

**** *********

Chandan Rai

Dear all i imagine every city of india as my city.

But for your kind imformation & interest i live in Faridabad, Haryana.

Love you & respect you all my beloved ones.

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25 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

satish3840 के द्वारा
March 19, 2012

चन्दन राय जी सभी को अपना शहर व् गावं अच्छा लगता हें / जेसे एक मां को अपने बच्चे सभी से प्यारे लगते हें / उसी प्रकार हर बच्चे को मां भी प्यारी लगती हें / जिस मिटते में हम पले बढे वो मिट्टी हमें मरते दम तक अच्छी लगती हें / अच्छी प्रस्तुती /

मनु (tosi) के द्वारा
March 13, 2012

चन्दन जी , नमस्कार ! खुदा नहीं पर खुदा सा है मेरा शहर सुंदर रचना … बधाई

    chandanrai के द्वारा
    March 13, 2012

    Dear Manu ji, If young blood have liked my poem in true sense, that will be my achievement. as i am in same generation group. Thanks a lot. Keep suggesting & commenting

    chandanrai के द्वारा
    March 13, 2012

    Dear Manu ji, I have also read your poem, They are all inpirational

sinsera के द्वारा
March 12, 2012

चन्दन जी नमस्कार, बहुत खुबसूरत सोच के साथ खुबसूरत कविता … बधाई..

    chandanrai के द्वारा
    March 13, 2012

    your most welcome, thanks for lovely comments keep suggesting

yogi sarswat के द्वारा
March 12, 2012

चन्दन राय जी नमस्कार ! हर एक व्यक्ति को अपने शहर , अपने गाँव , अपनी जन्मभूमि से प्यार होता है , लेकिन आपने इस प्यार को बहुत खूबसूरत शब्दों से सजाया है ! बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ! बहुत बढ़िया !

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 12, 2012

चन्दन जी नमस्कार, हम तेरे शहर में आयेंगे मुशाफिर की तरह…..बस एक बार मुलाकात का मौका दे देना.. सुन्दर…. अति सुन्दर…..

vivek1959 के द्वारा
March 11, 2012

कोई तो बचा लो मेरा शहर, निकलो हाथ मे ले ले झाड़ू आशा…….

    RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
    March 11, 2012

    सुन्दर कविता,चन्दन जी. मै जब चैन से करवट बदलता हूँ बिस्तर पर, बाहर मेरी हिफाजत मे होता है मेरा शहर, सूरज डूबे चाहे चाँद उगे पर कँहा सोता है मेरा शहर, खुदा नहीं पर खुदा सा है मेरा शहर . बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं.

    chandanrai के द्वारा
    March 11, 2012

    Dear Sir, Your comments are always encouraging. whatever you feel pls. you are free for a true comment

March 11, 2012

सादर नमस्कार! जितना भाईचारा और मुहब्बत का सन्देश आपका शहर देता है, उससे कहीं ज्यादा प्यार भरा सन्देश है आपके इस रचना में, बहुत अच्छा लगा पुरे 5 star.

    chandanrai के द्वारा
    March 11, 2012

    Thank you buddy, You are a true commenter whatever you feel you suggest speak. thank you for rating my poem 5 *. Read my new poem Berojgar

shashibhushan1959 के द्वारा
March 11, 2012

आदरणीय चन्दन जी, सादर ! अपने शहर के प्रति आपने सुन्दर तरीके से अपनी भावनाओं का प्रेषण किया है ! बधाई !

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 11, 2012

बहोत सुन्दर कविता चन्दन जी,…………..किन्तु सभी की भाँती मैं भी आपके शहर का नाम जानना चाहूँगा…..

    chandanrai के द्वारा
    March 11, 2012

    Dear pravin ji, Every city in india is my city . i imagined each & every city of our country. But for your kind interest Faridabad is my city. Read my poem Berojgar

dineshaastik के द्वारा
March 11, 2012

चंदन जी नमस्कार, आपने अपने शहर का नाम नहीं बताया। मेरा शहर दिल्ली स्वयं खुदा है। जन्मभूमि एवं कर्मभूमि की वन्दना करती सुन्दर रचना।

    chandanrai के द्वारा
    March 11, 2012

    Thank you Sir, For using these beautiful words for me, i lives in your neighborhood sir, i live in Faridabad Sec-55 sir, Pls. keep raining you blessings

omdikshit के द्वारा
March 10, 2012

चन्दन जी, बहुत अच्छी पंक्तियाँ.

    chandanrai के द्वारा
    March 11, 2012

    Thank you Sir, Giving time to a non valuable person like me Sir, Pls. keep raining your blessings

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 10, 2012

बहुत सुन्दर तरीके से बात कही है. बधाई.

    chandanrai के द्वारा
    March 11, 2012

    Thank you Sir, You are so much generous & humble in giving your time to non valuable person like me . Your comment is so much valuable to me , that i can’t explain, It strengthen my writting Read Berojgar Poem

akraktale के द्वारा
March 10, 2012

चन्दन जी, आपने अपने शहर कि तारीफ़ में कसीदे तो बहुत पढ़ दिए किन्तु शहर का नाम नहीं बताया.आपका शहर सिर्फ खुदा सा है जबकि मेरा शहर खुदा खुदा सा है.बधाई.

chandanrai के द्वारा
March 11, 2012

Dear Sir, Thankyou, for your highlighting what affected you most. Pls keep pourng your blessings

chandanrai के द्वारा
March 11, 2012

Dear Sir, Thankyou, for your highlighting what affected you most. Pls keep pourng your blessings see berojgar poem


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