कलम...

{ "हम विलुप्त हो चुकी "आदमी" नाम की प्रजातियाँ हैं" / "हम कहाँ मुर्दा हुए हमें पता नहीं".....!!! }

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*****न हरिये अभिव्यक्ति के प्राण ! *****

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कविता    *****      न हरिये अभिव्यक्ति के प्राण     *****

*******************

खामोश किताब बिफर बिगड़ बोल पड़ी ,
क्यूँ सिल लू होंठ खामखाह,
काट लू अपनी ही जीभ बेगुनाह,
कर दूँ खून रचना का पाल पोष किया जिसे जवान !

********************

चाहे आग अंगार झोंक दो कंठ में,
राख लगा चाहे खींच लो मेरी जुबान ,
मेरा हक़ है अभिव्यक्ति,
कैसे छीन लेगा कोइ मुआ स्वान !

*************

आँखे जो देखेंगी झूठ, सच ,अनर्थ ,मनगढ़ंत
कहेगी बिना लाग लपट के हर हाल समाचार,
कर्म यही के जन जन तक पहुंचे सत्य स्वर ,
खबर करे जन गण मन का जागरण !

*****************

कविता न हारेगी कभी, न मरेगी
अमर अजर है गजल ,
शेर शेर सा ही दहाडेगा सर्वथा,
राज करेगा सबके दिलों पर !

*************

कवि बावरे मतवारे चन्दन,क्या जाने कानून
गर रंग मुलजिम मुजरिम है , तो चित्रकार गुनाह करेगा जरूर
फूहड़ मनोरोगी विक्षिप्त नहीं ,काले झंडे काले बैनर
चाहते हैं काली करतुते ,हो जाएँ श्वेत निखरकर !

*******************

लेखक पत्रकार हो या गायक नायक निर्देशक
सब वहन करेंगे अभिव्यक्ति धर्म
गीत भाव से, चित्र वृति ,से नृत्य मुद्रा से,
नुक्कड़ ,नाटक ,चलचित्र, सब बनेंगे सामाजिक दर्पण !

*****************

भाषा कोई भी हो शब्द प्रादुर्भाव करेंगे
हो चाहे आग उत्पन्न या फिर खिले फूल
संत आचरण भी सिखाएगा सेवा भाव भी जगायेगा
ठग कहो या सूली चढवा दो इंकलाब भी फैलाएगा !

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अभिव्यक्ति आरक्षण नहीं जम्हूरियत का ,
किसी के बाप की जागीर नहीं,
सनातन मुतालबा है ,
जिन्दा है इससे इन्सनियात !

***********

साहित्य सृजनता है ,
कला चेतना चराचर की,
है तजबीज न घोटिए गला इसका ,
न हरिये अभिव्यक्ति के प्राण !

*********

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 4, 2012

चन्दन जी, नमस्कार एक ही रचना को आप तीसरी बार पोस्ट कर रहें है ……..?????? ये समझ से पड़े है …… यदि कुछ संसोधन करना है ….तो एडिट करें……..उन बार बार एक ही वास्तु को नहीं……….धन्यवाद

    chandanrai के द्वारा
    March 4, 2012

    नमस्कार महोदय मैंने और भी कविताये पोस्ट की है यह मेरे संशोधन का प्रयास है तथा जो मित्रगन इस कविता पाठ से वंचित रह गए वो भी इस का आनंद ले सके मै कविता शौक से नहीं लिखता, न ही मै प्रसिद्धी पाने की कोशिश करता हूँ कृपया अभिव्यक्ति की आज़ादी दे , अच्छा बुरा जैसा महसूस करे विचार देते रहें आपका कोटि कोटि अभिनन्दन

akraktale के द्वारा
March 3, 2012

चन्दन जी, अभिव्यक्ति की आजादी पर आपकी सुन्दर अभिव्यक्ति.बधाई.

    chandanrai के द्वारा
    March 4, 2012

    मै दास इस काबिल नहीं मेरी आत्महत्या कविता का आनंद ले अपने विचार रखें

Amita Srivastava के द्वारा
March 3, 2012

चंदन जी मंच पर एक अच्छे प्रयास की बधाई

    chandanrai के द्वारा
    March 4, 2012

    आपका कोटि कोटि अभिनन्दन मेरी आत्महत्या कविता का आनंद ले अपने विचार रखें

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 3, 2012

भावों की अच्छी अविव्यक्ति | बधाई हो चन्दन जी !

    chandanrai के द्वारा
    March 4, 2012

    आपका अभिनन्दन मेरी आत्महत्या कविता का आनंद ले अपने विचार रखें

mparveen के द्वारा
March 3, 2012

चन्दन राय जी नमस्कार , रचना तो बहुत ही अछी लगी पर क्षमा चाहूंगी कुछ शब्दों के अर्थ समझ नहीं आये जिससे रचना को पढने का मज़ा किरकिरा हो गया . कृपया अर्थ सहित लिख देते तो थोडा आसान होता . तजबीज , मुतालबा , जम्हूरियत कृपया अर्थ सपष्ट करें … धन्यवाद…

    chandanrai के द्वारा
    March 4, 2012

    तजबीज प्रस्ताव मुतालबा कथन जम्हूरियत गणतंत्र

yogi sarswat के द्वारा
March 3, 2012

साहित्य सृजनता है , कला चेतना चराचर की, है तजबीज न घोटिए गला इसका , न हरिये अभिव्यक्ति के प्राण ! आदरणीय चन्दन राय जी , नमस्कार ! फिर से आपने एक और प्रभावशाली , साहित्य के महत्व और उसकी ताक़त को दिखलाती रचना प्रस्तुत की , बहुत बहुत साधुवाद ! कोई कालिदास क्यों बनेगा ? ( भारतीय राजनीति में सुधार ) http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/23 आपके विचारों का स्वागत करूँगा !कृपया ध्यान दें !

    chandanrai के द्वारा
    March 4, 2012

    आपको कोटि कोटि नमन


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